यूफोरिया के सिंगर पलाश सेन बोले- फिल्म इंडस्ट्री के बड़े लोगों की जी हुजूरी में इंटरेस्ट नहीं

पलाश सेन 'मायरी', 'महफूज', 'धूम पिचुक' जैसे गानों के लिए जाने जाते हैं (फोटो साभारः Instagram/instadhoom)

पलाश सेन 'मायरी', 'महफूज', 'धूम पिचुक' जैसे गानों के लिए जाने जाते हैं (फोटो साभारः Instagram/instadhoom)

मशहूर म्यूजिक बैंड यूफोरिया (Euphoria) के लीड सिंगर पलाश सेन (Palash Sen) ने हाल में अपना दिल का हाल बयां किया है. सिंगर कहते हैं कि उन्हें फिल्म इंडस्ट्री (Film Industry) के बड़े लोगों की जी हुजूरी करने में कोई इंटरेस्ट नहीं है. वे बॉलीवुड की म्यूजिक इंडस्ट्री से कुछ दूरी बनाकर रहते हैं.

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  • Last Updated: April 27, 2021, 9:04 PM IST
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नई दिल्लीः म्यूजिक बैंड यूफोरिया (Euphoria) के लीड सिंगर पलाश सेन (Palash Sen) का कहना है कि वे बॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्री (Bollywood Music Industry) में जी हुजूरी नहीं कर सकते. इंडियन पॉप-रॉक बैंड यूफोरिया के फाउंडर और लीड सिंगर पलाश सेन, जिन्होंने 'मायरी', 'महफूज', 'धूम पिचुक' और कई चार्टबस्टर्स हिट गाने दिए हैं, वे इंडी म्यूजिक लवर के बीच खासे लोकप्रिय हैं, लेकिन वे बॉलीवुड की म्यूजिक इंडस्ट्री से कुछ दूरी बनाकर रहते हैं.

पलाश ने म्यूजिक इंडस्ट्री से दूरी बनाने की वजह बताई. टाइम्स नाउ को दिए एक इंटरव्यू में पलाश ने कहा कि वे निजी कारणों से म्यूजिक इंडस्ट्री से दूरी बनाकर रहते हैं, क्योंकि वे इंडस्ट्री में कायम जी हुजूरी के कल्चर को नहीं मानते. उन्हें इंडस्ट्री में पुराने गानों के रीमिक्स बनाने का चलन भी पसंद नहीं है. पलाश कहते हैं, 'मुझे फिल्म इंडस्ट्री के बड़े दिग्गजों की जी हजूरी करने में कोई दिलचस्पी नहीं थी. मैंने हमेशा ऐसे गीत लिखे और बनाए, जिन्हें मैं बनाना चाहता था. मैंने ऐसी कहानियां बताईं, जो मैं कह सकता हूं.'

(फोटो साभारः Instagram/instadhoom)


सिंगर आगे कहते हैं, 'हम गर्व से कह सकते हैं कि हमने ईमानदारी के साथ संगीत बनाए, जो लोगों के दिलों को छूते हैं. इंडस्ट्री से दूर रहने से मैं लोगों के करीब पहुंच गया. लोग हमसे आज तक जुड़े हैं. अफसोस की बात है कि हमारे देश में म्यूजिक इंडस्ट्री नहीं है. हमारी एक फिल्म इंडस्ट्री है, जिसका संगीत एक हिस्सा है. मैं कभी फेम और पैसे के पीछे नहीं भागा. मैंने कभी भी ग्लैमर की लालसा नहीं की. मैं हमेशा ही एक बैंड का फ्रंटमैन और लीडर सिंगर बनकर खुश था.'
पलाश आगे कहते हैं, 'कल्पना कीजिए कि कैसे हम क्रिएटिवली 80 और 90 के दशक के गानों के रीमिक्स बनाने के लिए तैयार हो जाते हैं? और वह भी बार-बार बहुत खराब रीमिक्स बनाना. क्या नया गाना बनाना मुश्किल है? क्या इंडस्ट्री में नए विचारों का अकाल पड़ गया है? मेरे कई सवाल हैं. अफसोस कि कोई भी उनके जवाब नहीं दे सकता है. लोग जो जवाब दे सकते हैं, वे किसी दूसरे गाने का रीमिक्स बनाने या उससे बर्बाद करने में बिजी हैं.'
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