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जब पत्नी के साथ बॉयज होस्टल में रहने को मजबूर हो गया था ये एक्टर

News18Hindi
Updated: September 5, 2019, 5:30 AM IST
जब पत्नी के साथ बॉयज होस्टल में रहने को मजबूर हो गया था ये एक्टर
हैप्पी बर्थडे पंकज त्रिपाठी.

पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) ने न्यूज 18 से खास बातचीत में अपनी जिंदगी से जुड़ा ये किस्सा शेयर किया.

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  • Last Updated: September 5, 2019, 5:30 AM IST
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मेरा जन्म बिहार, गोपालगंज के एक गांव बेलसंड में हुआ था. एक्टिंग का चस्का मुझे यहीं से लगा था. मैं गांव की नाटक मंडली में लड़की का रोल प्ले करके कॉमेडी करता था. गांव वालों को मेरी ऐक्टिंग बहुत पसंद आती थी. समय बीता और आगे की पढ़ाई के लिए मैं साल 1993 में पटना पहुंच गया. यहां से मेरे कॉलेज का दौर शुरू हुआ. कॉलेज के दिनों में मैं बहुत एक्टिव हुआ करता था. छात्र आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था.

ऐसे ही एक आंदोलन में हिस्सा लेने की वजह से मुझे एक हफ़्ते के लिए जेल भेज दिया गया. मेरे पास करने को कुछ नहीं था. मैं लाइब्रेरी में जाता और ख़ूब हिंदी साहित्य पढ़ता. 7 दिनों तक जेल में रहा और इन 7 दिनों में मैंने इतना साहित्य पढ़ा कि मुझे हिंदी साहित्य से लगाव हो गया. पटना में उन दिनों मैं घूमता भी बहुत था. ऐसे ही घूमते-टहलते हुए मैं लक्ष्मण नारायण राय का एक नाटक देख आया. मुझे नाटक बहुत अच्छा लगा, उसका एक-एक सीन मेरे दिमाग पर छप गया. लाल-पीली रोशनी में एक्टिंग करते कलाकार दर्शकों को अपनी भाव-भंगिमाओं से नचा रहे थे. मैंने तय कर लिया कि मुझे भी एक्टर बनना है और सिर्फ एक्टर ही बनना है. बस फिर क्या था, नाटक शुरू हो गया. मैंने 7 साल तक लगातार पटना में नाटक किया.

pankaj tripathi

नाटक करने वाले हर कलाकार की तरह मेरा भी सपना था कि NSD में दाखिला लूं. मैंने जमकर मेहनत की और दो विफल कोशिशों के बाद आखिरकार साल 2001 में मेरा सेलेक्शन NSD में हो गया. मैं दिल्ली आ गया. मेरे हॉस्टल जीवन की शुरुआत यहीं से होती है. 'नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा' एक तो स्कूल इतना भव्य ऊपर से इसका हॉस्टल भी शानदार. एक कमरे में दो लोग. मैंने अपने कमरे में सामान रखा और हॉस्टल का एक चक्कर लगाया तो भारत की विविधता का एहसास हुआ. हॉस्टल में देश के हर कोने से आए लोग मौजूद थे.

नींद गायब थी, बेचैनी थी उस कमरे को देखने की जिसमें नसीरुद्दीन साहब रहा करते थे. इस बात पर यकीन करने में कई दिन निकल गए कि यह वही जगह है जहां पर कभी बड़े-बड़े अभिनेता रहा करते थे. कई बार मेरे मन में भी बड़ा एक्टर बनने की लहर सी उठती, लेकिन यह कहकर दबा देता था कि अभी बहुत मेहनत करनी है.

pankaj tripathi family

NSD के हॉस्टल में आने के बाद मैंने पहली बार कलर टीवी का मज़ा लिया. इसके पहले मैंने कलर टीवी देखा तो था लेकिन भरपूर सुख नहीं लिया था. कलर टीवी के चटख रंग की तरह जीवन गुज़रने लगा. मैं दिल्ली में बे लगाम घोड़ा हो चुका था. लेकिन जब घोड़े से लगाम हटा ली जाए तो उसे ख़ुद-ब-ख़ुद लगाम का एहसास होने लगता है. थर्ड इयर आ चुका था, NSD आपको अधर में छोड़ता है. इसके बाद आपके करियर की कोई गारंटी नहीं होती है और न ही विवाह की! क्योंकि उम्र हो चुकी होती है और घर-परिवार की ज़िम्मेदारियों का दबाव भी बढ़ने लगता है.
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करियर का तो पता नहीं लेकिन मैंने शादी का फैसला कर लिया था. NSD से पास आउट होने में अभी 4-5 महीने थे लेकिन मैं जनवरी महीने में शादी करके पत्नी के साथ दिल्ली आ गया. हमने लक्ष्मी नगर में ठिकाना तलाशा और बस गए. मेरा मानना था कि ऐक्टर को मस्तमौला होना चाहिए लेकिन NSD प्रशासन ने कहा कि, अटेंडेंस पूरी चाहिए. अब हालात कुछ यूं बने कि मुझे आखिरी महीने में हर रोज़ स्कूल आने का फ़रमान सुनाया गया. अब लक्ष्मी नगर रहूं तो रोज़ ड्रामा स्कूल आना पॉसिबल नहीं था तो मैंने सोचा एक महीने की ही तो बात है और पत्नी समेत NSD के बॉयज़ हॉस्टल में शिफ़्ट हो गया.

pankaj tripathi wife

ये बात लगभग सभी को पता थी लेकिन NSD एडमिनिस्ट्रेशन को इस बात की कोई ख़बर नहीं थी. मेरा रूममेट दूसरे कमरे में शिफ़्ट हो चुका था. अब मेरे कमरे में खाना बनता और सभी साथी मिलकर खाना खाते. यह सिलसिला 1 महीने तक चला.

(ये पंकज त्रिपाठी से न्यूज 18 की खास बातचीत के अंश हैं)

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First published: September 5, 2019, 5:30 AM IST
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