'Bombay Begums' Review: अपने एक्टिंग से सबको चौंकाने वाली हैं पूजा भट्ट

पूजा भट्ट (फोटो साभार: @Pooja)

पूजा भट्ट (फोटो साभार: @Pooja)

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day) के मौके पर नेटफ्लिक्स ने अपने फैंस को तोहफा दिया. पू़जा भट्ट की मोस्ट अपेटेड वेब सीरीज 'बॉम्बे बेगम्स (Bombay Begums)' रिलीज हो गई है.

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  • Last Updated: March 9, 2021, 12:55 AM IST
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नई दिल्ली: 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day) के मौके पर नेटफ्लिक्स ने अपने फैंस को तोहफा दिया. पू़जा भट्ट की मोस्ट अपेटेड वेब सीरीज 'बॉम्बे बेगम्स (Bombay Begums)'  इसी दिनरिलीज हो गई है. इस सीरीज के जरिए एक्ट्रेस पूजा भट्ट ओटीटी पर डेब्यू कर रही हैं. सीरीज में पांच अलग महिलाओं की कहानी दिखाई गई है, जिनका किरदार सुहाना गोस्वामी, अमृता सुभाष, प्लाबिता बोर-ठाकुर, आध्या आनंद और पूजा भट्ट ने निभाया है.

'बॉम्बे बेगम्स (Bombay Begums)' सीरीज पांच अलग महिलाओं की कहानी है, जिसमें महिलाएं अपनी इच्छा, नैतिकता, व्यक्तिगत संकटों और कमजोरियों से जूझती हैं. कहानी में जैसे-जैसे परिस्थितियां बदलती हैं और दिल टूटते हैं, वैसे-वैसे उन्हें मुश्किल चुनाव करना पड़ता है. इसमें कोई क्वीन है तो कोई सरवाइवर. इस सीरीज में समाज के अलग-अलग तबको के महिलाओं की कहानी दिखाई गई है.

कहानी कुछ ऐसी है कि एक दिन रानी (पूजा भट्ट) की गाड़ी से लिली के बेटे का एक्सीडेंट हो जाता है. लिली के बेटे की हालत थोड़ी क्रिटिकल हो जाती है. रानी मामला सेटल करने की कोशिश करती है. लेकिन लिली को बदले में सिर्फ पैसा नहीं बल्कि इज़्ज़त भी चाहिए. दूसरी ओर फातिमा की कहानी चल रही है.



करियर में अपना मार्क छोड़ना चाहती है, लेकिन पर्सनल लाइफ की अपनी कुछ कमिटमेंट हैं. आएशा रानी की कंपनी में ही काम करती है. कॉर्पोरेट लैडर चढ़ना चाहती है. लेकिन इस ‘शॉट टू सक्सेस’ के पीछे क्या कुछ छुपा हुआ है, उन सब से अनजान है. कैसे ये पांच औरतें इस पेट्रिआर्कल सोसायटी से लड़ते हुए पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में अपना मार्क छोड़ पाती हैं, यही सीरीज की कहानी है.
एक्टिंग की बात की जाए तो सभी कलाकारों ने अपने रोल के साथ ईमानदारी दिखाई है. बात सीरीज के मेन कैरेक्टर पूजा भट्ट की जाए तो उनके एक्टिंग को देखकर ये नहीं लगता की उन्होंने काफी समय बाद पर्दे पर वापसी की है. सीरीज में एक और पहलू जिसकी तारीफ होनी चाहिए. इसमें महिलाएं अपनी समस्या से जूझती हुई उसका समाधान खुद निकालती हैं. सीरीज के अंत में कोई पुरुष सुपर हिरो बनकर उनकी समस्या नहीं सुलझाता है.

सीरीज की राइटर और डायरेक्टर अलंकृता श्रीवास्तव हैं. क्रिटिकली अकलेम्ड ‘लिप्स्टिक अंडर माय बुर्का’ और पिछले साल आई ‘डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे’ जैसी फिल्मों की भी राइटिंग और डायरेक्शन कर चुकी हैं.
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