सुशांत केस पर बोले CBFC चेयरमैन प्रसून जोशी- हत्या से बड़ी चिंता का मामला है आत्महत्या

प्रसून जोशी की फाइल फोटो.
प्रसून जोशी की फाइल फोटो.

प्रसून जोशी (Prasoon Joshi) ने कहा कि, हत्या में आप एक अपराधी हैं. आत्महत्या एक बीमारी है. यह इस तथ्य से सामने आ रहा है कि कुछ सही नहीं है. लोग असुरक्षित हैं और अपनी जिंदगी का डटकर सामना करने में सक्षम नहीं हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 5, 2020, 6:32 PM IST
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मुंबई. गीतकार, पटकथा लेखक, कवि और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के चेयरमैन प्रसून जोशी (Prasoon Joshi) ने कहा है कि 'आत्महत्या (Suicide) एक बीमारी है' और हत्या की तुलना में उनके लिए एक बड़ी चिंता है. एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की मौत के बाद से चल रही बहस के बीच उनकी टिप्पणी आई है, जिसे मुंबई पुलिस ने आत्महत्या माना और दिल्ली एम्स के पैनल ने एक्टर के परिवार के वकील के प्रतिरोध के बावजूद पोस्टमार्टम रिपोर्ट का पुनर्मूल्यांकन किया.

एक इंटरव्यू में प्रसून जोशी ने कहा कि सभी उद्योगों की तरह फिल्म इंडस्ट्री को भी इस बारे में आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि कुछ लोग इस तरह के दबाव में क्यों हैं? सुशांत सिंह राजपूत 14 जून को अपने अपार्टमेंट में मृत पाए गए थे. उन्होंने टाइम्स नाउ को दिए इंटरव्यू में कहा, 'आत्महत्या मेरे लिए हत्या से भी बड़ी चिंता है, क्योंकि हत्या में आप एक अपराधी हैं. आत्महत्या एक बीमारी है. यह इस तथ्य से सामने आ रहा है कि कुछ सही नहीं है. लोग असुरक्षित हैं और अपनी जिंदगी का डटकर सामना करने में सक्षम नहीं हैं.'

प्रसून ने आगे कहा कि, 'यह कोई छोटी बात नहीं है, यह एक बीमारी का निदान है. इसे एक इंडस्ट्री को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए. यह केवल कुछ हिट फिल्मों के निर्माण के बारे में नहीं है, जीवन फिल्मों से बड़ा है. इंडस्ट्री के बाहर बहुत से संवेदनशील लोग हैं. जरूरत इस बात की है कि इन सभी से रचनात्मक रूप से हाथ मिलाया जाए.'




जोशी ने कहा कि, 'कलाकार लाइफ को कॉमर्स से ऊपर रख सकते हैं, क्योंकि वे संवेदनशील हैं. एक कलाकार कभी भी पैसे को किसी के जीवन से अधिक प्राथमिकता नहीं देगा. एक कलाकार का दिल दयालु होता है. यही कारण है कि लोग निराश हो जाते हैं.'

शनिवार को एम्स के डॉक्टरों के एक पैनल ने सुशांत की मौत को 'फांसी लगाकर आत्महत्या से हुई मौत का मामला' करार दिया. 29 सितंबर को सीबीआई को सौंपी गई एक रिपोर्ट में, फोरेंसिक डॉक्टरों की 6 सदस्यीय टीम ने कहा कि 'फांसी के अलावा शरीर पर कोई चोट नहीं थी और न ही कुछ और उल्लेखनीय निशान मिला. एम्स के पैनल ने सुशांत का गला घोंटने या उनको जहर देने के दावों को खारिज कर दिया.
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