'TRP, रीडरशिप और रेवेन्यू के लिए बॉलीवुड के बारे में चलाई जा रही झूठीं खबरें'

'TRP, रीडरशिप और रेवेन्यू के लिए बॉलीवुड के बारे में चलाई जा रही झूठीं खबरें'
फिल्म निर्माताओं के संगठन ने सुशांत सिंह राजपूत केस को लेकर बॉलीवुड के बारे में की जा रही मीडिया कवरेज की निंदा की.

प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (Producers Guild of India) ने कहा, ‘फिल्म उद्योग नए लोगों के काम करने के लिए भयावह जगह नहीं है, ऐसी खबरें निराधार हैं. बॉलीवुड (Bollywood) में आने की आकांक्षा रखने वाले युवाओं को इस तरह की सनसनीखेज पत्रकारिता से गुमराह नहीं होना चाहिए ’

  • Share this:
मुंबई. ‘प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (Producers Guild of India)’ ने एक्टर सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस (Sushant Singh Rajput Suicide Case) को लेकर फिल्म उद्योग के बारे में की जा रही मीडिया कवरेज की शुक्रवार को निन्दा की. बॉलीवुड फिल्म निर्माताओं के संगठन ने इसे ‘क्लिकबैट पत्रकारिता’ करार दिया. निर्माता सिद्धार्थ रॉय कपूर के नेतृत्व वाले संगठन ने सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कहा कि विज्ञापन राजस्व और रेटिंग से बढ़कर ‘सामान्य मानव शालीनता’ है.

गिल्ड ने कहा, ‘बॉलीवुड को एक ऐसे स्थान के रूप में पेश किया जा रहा है जहां अपराध है और ड्रग्स का सेवन किया जाता है. यह कहानी मीडिया इंडस्ट्री के लिए अपनी रेटिंग (टीआरपी) और रीडरशिप बढ़ाने के लिए पर्याप्त है. परन्तु यह सत्य नहीं है. विज्ञापन राजस्व और रेटिंग की तुलना में कुछ और चीजें महत्वपूर्ण हैं -जैसे कि सामान्य मानव शालीनता. आइए हम भी अपनी मानवता दिखाते हैं.’

यह पहली बार है जब 136 सदस्यों वाले संगठन ने फिल्म उद्योग के बारे में मीडिया कवरेज को लेकर औपचारिक रूप से बयान जारी किया है. गिल्ड में आदित्य चोपड़ा, आमिर खान, करण जौहर, शाहरुख खान और विशाल भारद्वाज जैसे फिल्ममेकर शामिल हैं.



सुशांत केस की जांच कर रही हैं तीन एजेंसियां
संगठन ने बयान में इस निन्दा को लेकर फिल्म इंडस्ट्री का बचाव किया कि ‘यह बॉलीवुड में आने की आकांक्षा रखने वाले बाहरी लोगों के लिए एक भयावह जगह है.’ सुशांत की मौत के बाद फिल्म उद्योग को लेकर मीडिया में तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं. सुशांत गत 14 जून को अपने घर में मृत मिले थे. मामले में अब सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय और नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो जैसी तीन-तीन एजेंसियां विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही हैं.

गिल्ड ने कहा, ‘फिल्म उद्योग में आने की आकांक्षा रखने वाले लोगों को ‘क्लिकबैट’ (सनसनीखेज) पत्रकारिता से गुमराह नहीं होना चाहिए जो इस समय यह बात फैलाने की कोशिश कर रही है कि फिल्म उद्योग इसमें काम करने की आकांक्षा रखने वालों के लिए एक भयावह जगह है.’

बयान में कहा गया, ‘पिछले कुछ महीनों से मीडिया द्वारा भारतीय फिल्म उद्योग की प्रतिष्ठा पर लगातार हमला किया जा रहा है. एक होनहार युवा कलाकार की दुखद मृत्यु को कुछ लोग फिल्म उद्योग और उसके सदस्यों का नाम बदनाम करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. बाहरी लोगों के लिए इस उद्योग को भयावह रूप में चित्रित किया गया है.’
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज