जब राजेश खन्ना ने कहा था- नंबर तो घोड़ों के होते हैं, स्टार्स के नहीं; स्टार तो स्टार होते हैं

राजेश खन्ना बॉलीवुड के पहले ऐसे सुपरस्टार थे, जिन्होंने एक के बाद एक लगातार 15 हिट फिल्में दीं थीं. (File Photo)

राजेश खन्ना बॉलीवुड के पहले ऐसे सुपरस्टार थे, जिन्होंने एक के बाद एक लगातार 15 हिट फिल्में दीं थीं. (File Photo)

राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) भले ही बॉलीवुड में नंबर 1 थे, लेकिन उन्हें यह नंबर गेम पसंद नहीं था. एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि स्टार्स को नंबर 1, नंबर 2 की पदवी दिए जाने पर उनकी क्या राय है तो उन्होंने शानदार जवाब दिया. उन्होंने कहा कि नंबर्स घोड़ों के होते हैं, स्टार्स के नहीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 25, 2021, 6:19 AM IST
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मुंबई. इंडियन फिल्म इंडस्ट्री के पहले सुपरस्टार कहे जाने वाले राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) की लोकप्रियता एक समय में चरम पर थी. फिल्म आराधना के बाद राजेश खन्ना बॉलीवुड में रोमांटिक ​एक्टर के रूप में फेमस हो गए थे. इसके बाद राजेश खन्ना ऐसे पहले सुपरस्टार बने जिन्होंने एक के बाद एक लगातार 15 हिट फिल्में दीं, जो अब भी एक रिकॉर्ड है. ऐसा उनकी दीवानगी के कारण था.

कहा जाता है कि लड़कियां उनके लुक्स की इस तरह दीवानी थीं कि उनकी गाड़ी के जाने के बाद जो धूल उड़ती थी, उससे अपनी मांग भरती थीं. आज भी लोग राजेश खन्ना के स्टारडम से जुड़े किस्से उनके फैंस दिल से कहना और सुनना पसंद करते हैं. बॉलीवुड में 'काका' के नाम से मशहूर राजेश खन्ना अपने दौर के नंबर 1 सुपरस्टार थे लेकिन उन्हें नंबर गेम की यह बात पसंद नहीं थी.

राजेश खन्ना भले ही फिल्म इंडस्ट्री में नंबर 1 माने जाते थे, लेकिन उन्हें यह नंबर गेम बिल्कुल पसंद नहीं था. एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि स्टार्स को नंबर 1, नंबर 2 की पदवी दिए जाने पर उनकी क्या राय है तो उन्होंने इसका शानदार जवाब दिया. उन्होंने कहा कि नंबर्स घोड़ों के होते हैं, स्टार्स के नहीं. आईटीएमबी शोज़ के कार्यक्रम में राजेश खन्ना से पूछा गया था, ‘भारत में मीडिया की ओर से जो नंबर 1 स्टार, नंबर 1 हीरो आदि की जो की पदवी दी जाती है, उसके बारे में आपकी क्या राय है?’ राजेश खन्ना ने कहा था कि मेरा यही मानना है कि घोड़ों के नंबर होते हैं. मुझे नहीं लगता कि स्टार्स के नंबर होने चाहिए. स्टार तो स्टार होते हैं.’

उस दौर में राजेश खन्ना हिंदी बेल्ट के बाहर भी लोकप्रिय थे. उनकी फिल्में दक्षिण भारत में भी देखी जाती थीं. यासिर उस्मान की किताब, ‘राजेश खन्ना: कुछ तो लोग कहेंगे’ में स्क्रिप्ट राइटर सलीम खान ने बताया है कि, ‘मैं ‘हाथी मेरे साथी’ फिल्म की शूटिंग के समय उनके साथ मद्रास और तमिलनाडु के लोकेशंस पर गया था. उन क्षेत्रों में भी राजेश खन्ना के नाम पर भारी भीड़ जुट जाती थी. यह आश्चर्य की बात थी क्योंकि उस दौर में दक्षिण भारत में हिंदी फिल्में ज्यादा नहीं देखी जाती थीं. यह राजेश खन्ना का करिश्मा ही था कि उनकी फिल्मों ने भाषा की सरहदों को भी पार कर लिया था.’
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