काश! मैं अपने डैड ऋषि कपूर के साथ कुछ और वक्त बिता पाता: रणबीर कपूर

ऋषि कपूर के निधन के एक साल. (फोटो साभार : neetu54/Instagram)

ऋषि कपूर के निधन के एक साल. (फोटो साभार : neetu54/Instagram)

ऋषि कपूर (Rishi Kapoor) की बायोग्राफी ‘खुल्लम खुल्ला: ऋषि कपूर अनसेंसर्ड’ (Khullam Khulla : Rishi Kapoor Uncensored) में पिता-पुत्र के बीच के रिश्तों की जानकारी दी गई है. ऋषि कपूर ने अपनी किताब में स्वीकार किया था कि रणबीर उनके साथ कम ही खुले हुए थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 30, 2021, 6:17 AM IST
  • Share this:
मुंबई : बॉलीवुड के सदाबहार एक्टर रहे ऋषि कपूर (Rishi Kapoor)  करीब दो साल तक कैंसर से जंग लड़ने के बाद 30 अप्रैल 2020 को दुनिया को अलविदा कह गए थे. आज उनको दुनिया से अलविदा कहे पूरा एक साल हो गया है. ऋषि के चाहने वाले आज भी उन्हें याद कर भावुक हो उठते हैं. ऋषि के बेटे रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor ) को मलाल है कि उनका पिता के साथ दोस्ताना रिश्ता नहीं रहा. जब रणबीर कपूर बड़े हो रहे थे तो अपनी मम्मी नीतू कपूर (Neetu Kapoor) के ज्यादा करीब थे.

अपने पिता ऋषि कपूर (Rishi Kapoor) की बायोग्राफी ‘खुल्लम खुल्ला’ के बारे में रणबीर ने  लिखा ' मैं अपनी मां के ज्यादा करीब हूं. मुझे लगता है कि पापा के जिस तरह के रिश्ते अपने पापा के साथ थे, वैसा ही उन्होंने मेरे साथ रखा. यह भी सच है कि मैंने कभी उसके साथ एक तय लाइन को क्रॉस नहीं किया. लेकिन यहां किसी तरह के नुकसान या शून्य जैसी भावना नहीं है. मैं कभी-कभी सोचता हूं कि काश मेरे साथ उनका दोस्ताना रवैया होता या मैं उनके साथ थोड़ा और वक्त बिता पाता’.

सबसे अच्छी बात मेरे लिए ये है कि पापा ने मेरी मां नीतू को बेहद प्यार दिया. वह हमे एहसास करवाते थे कि मां हमारे घर और जिंदगी की धुरी हैं. रणबीर ने ऋषि कपूर से ही सीखा कि अपने काम को कैसे प्यार किया जाता है. 2007 में जब वह संजय लीला भंसाली की सांवरिया से बॉलीवुड डेब्यू कर रहे थे तो उनसे ज्यादा ऋषि उत्साहित थे. उनके कॉस्ट्यूम की शॉपिंग करना, हर छोटी-छोटी बातों को ध्यान रखना. उनकी इन बातों का मुझ पर बहुत असर पड़ा’.

दूसरे लोगों की तरह ही रणबीर भी अपने पापा ऋषि की एक्टिंग के फैन थे. उनके अंदर एक नेचुरल एक्टर था. अपने पिता की तारीफ करते हुए रणबीर ने लिखा ‘मैं ऋषि कपूर के लेवल का किसी को नहीं पाता हूं. उनके समय में अधिकतर एक्टर्स की अपनी खास स्टाइल थी, लेकिन मेरे पापा के अंदर सबकुछ नेचुरल था. उन्होंने अपनी फिजिक को लेकर कभी बहुत परवाह नहीं की. ‘चांदनी’, ‘दीवाना’ और ‘बोल राधा बोल’  90 के दशक की फिल्मों में देखिए ,वेट होने के बावजूद उनका चार्म बरकरार था. इसके बाद उनकी दूसरी पारी की फिल्में ‘अग्निपथ’, ‘दो दूनी चार’, ‘कपूर एंड सन्स’ जैसी फिल्मों से भी दर्शकों का दिल जीतने में सफल रही.


ऋषि कपूर के कैंसर के ट्रीटमेंट के समय रणबीर को साथ समय बिताने का मौका मिला था. 'पापा को साथ लेकर कीमोथेरेपी के लिए होटल से हॉस्पिटल तक जाते. इस दौरान भी इनके बीच कम ही बात होती थी'. रणबीर ने अपने पिता के निधन के कुछ महीनों बाद अपने जज्बात शेयर किए थे.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज