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मैं टिपिकल हीरो वाली इमेज में शायद फिट नहीं बैठता: रणदीप हुड्डा

मैं टिपिकल हीरो वाली इमेज में शायद फिट नहीं बैठता: रणदीप हुड्डा

रणदीप हुड्डा की बॉलीवुड में अलग पहचान है। वो रफ एंड टफ रोल्स में फिट बैठते हैं। अबतक कोई ढंग की रोमांटिक मूवी उन्होंने की नहीं है। पर 'दो लफ्जों की कहानी' से उनकी ये हसरत भी पूरी हो गई।

रणदीप हुड्डा की बॉलीवुड में अलग पहचान है। वो रफ एंड टफ रोल्स में फिट बैठते हैं। अबतक कोई ढंग की रोमांटिक मूवी उन्होंने की नहीं है। पर 'दो लफ्जों की कहानी' से उनकी ये हसरत भी पूरी हो गई।

रणदीप हुड्डा की बॉलीवुड में अलग पहचान है। वो रफ एंड टफ रोल्स में फिट बैठते हैं। अबतक कोई ढंग की रोमांटिक मूवी उन्होंने की नहीं है। पर 'दो लफ्जों की कहानी' से उनकी ये हसरत भी पूरी हो गई।

    नई दिल्ली। रणदीप हुड्डा की बॉलीवुड में अलग पहचान है। वो रफ एंड टफ रोल्स में फिट बैठते हैं। अबतक कोई ढंग की रोमांटिक मूवी उन्होंने की नहीं है। पर 'दो लफ्जों की कहानी' से उनकी ये हसरत भी पूरी हो गई। रणदीप कहते हैं कि ये फिल्म अलग तरह की है, और मुझे इसमें लव इंटरेस्ट से अलग भी कुछ दिखा। जिसकी वजह से उन्होंने 'दो लफ्जों की कहानी' को हाथों हाथ लिया। खैर, रणदीप अपनी फिल्म 'दो लफ्जों की कहानी' की कहानी के लिए हाल ही में दिल्ली पहुंचे थे, जहां उनसे बात की आईबीएनखबर.कॉम के विशेष संवाददाता श्रवण शुक्ल ने।

    सवाल: रणदीप, लगातार तीन माह और 3 फिल्में। देखा जाए तो 2 माह और 3 फिल्में। लाल रंग, सरबजीत और अब दो लफ्जों की कहानी। तीनों अलग फिल्में... किस तरह से खुद को ढाल पाए आप?

    जवाब: अब एक्टर्स का काम ही है अपने किरदार में ढलना, पर सच कहूं तो तीनों ही फिल्में मेरे बेहद करीब है। तीनों ही फिल्मों में मेरे अलग अलग किरदार हैं। लाल रंग में मैं ब्लड का कारोबार करने वाला बना हूं, तो सरबजीत की भूमिका आप सभी जानते हैं। और 'दो लफ्जों की कहानी' में मैं पहली बार लवर ब्वॉय बना हूं। हालांकि रोल तो इसमें भी 'रफ एंड टफ' ही है।

    सवाल: 'रफ एंड टफ'... लगातार 'रफ एंड टफ' शब्द बोल रहे हैं। क्या लगता है कि आप सिर्फ 'रफ एंड टफ' किरदार ही निभा सकते हैं? या कोई खास वजह?

    जवाब: देखिए, यूं तो एक्टर्स को जो किरदार दिए जाएं, उसे वही करना होता है। पर रोल्स के मामले में मैं बड़ा चूजी रहा हूं। कभी अपने रोल के दोहराव को पसंद नहीं करता। आप मेरी शुरू से लेकर अबतक की फिल्में देखिए, अलग अलग तरह के किरदार किए हैं। पर सभी में जो बात कॉमन रही, वो है 'रफ एंड टफ' इमेज वाले किरदार। शायद अब भी मैं बॉलीवुड की तराजू में 'रफ एंड टफ' वाले रोल्स के लिए ही फिट हूं। पर 39 साल की उम्र में रोमांस करने का भी अपना ही मजा है। 'दो लफ्जों की कहानी' मेरे लिए अलग एक्सपीरियंस लेकर आई। शायद ये पूरी तरह से मेरी पहली रोमांटिक फिल्म है।

    सवाल: 'दो लफ्जों की कहानी' के बारे में बताइए। कैसी फिल्म है, लोग इस फिल्म को क्यों देखें?

    जवाब: लोग ही फिल्म को देखकर औरों से बताएं कि फिल्म क्यों देखी जाए तो ज्यादा बेहतर है। हां, मैं इतना जरूर कहूंगा कि ये फिल्म अबतक सबसे अलग है। कोरियन फिल्म 'ऑलवेज' की रीमेक है, जिसमें भारतीय दर्शकों के हिसाब से थोड़ा बदलाव हुआ है। मैं एक किक बॉक्सर की भूमिका में हूं, जो प्यार में पड़ जाता है। और अपने प्यार को नई जिंदगी देने के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा देता है। यहां तक कि जिंदगी भी। काजल अग्रवाल के रोल से मुझे वाकई प्यार हो गया।

    सवाल: आप फिटनेस के शुरू से शौकीन रहे हैं। और आपके कहे मुताबिक 'रफ एंड टफ' बने रहने के लिए वैसे भी खासी मेहनत की जरूरत होती है। लाल रंग में टपोरी माफिया बने हैं, जिसमें खास बॉडी की जरूरत नहीं, पर सरबजीत के लिए आपने अपना वजन बिल्कुल कम कर लिया। लोग हैरान रह गए और अब 'दो लफ्जों की कहानी' की कहानी में बॉक्सर का रोल? कितना न्याय कर पाए खुद की फिटनेस से?

    जवाब: फिटनेस सबसे अहम बात होती है किसी भी एक्टर के लिए। और मैं अपने हर रोल में पूरी तरह से समाने के लिए ये सब करता हूं। सरबजीत के लिए मैंने अपना वजन बेहद कम कर लिया। मैं सिर्फ 65 किलो का बचा था। लग रहा था कि अब शायद सांसे थमने वाली हैं। मैं सेट पर भी अच्छे से चल तक नहीं पा रहा था। पर 'दो लफ्जों की कहानी' की कहानी के लिए मैंने अपना वजन बढ़ाकर 95 किलो किया। पूरी बॉडी बनाई एक किक बॉक्सर की तरह। और फिल्म के लास्ट में देखेंगे तो बेहद दुबला पतला और बीमार नजर आया। सच कहूं तो मुश्किल रहा, पर मजा आया।

    सवाल: ऐसी फिटनेस और शरीर के उतार के लिए क्या खास किया। 'दो लफ्जों की कहानी' की कहानी में किक बॉक्सर बने हैं, उसकी तैयारी कैसे की?

    जवाब: ये सवाल तो मुझे खुद से पूछना चाहिए कि मैंने कैसे कर लिया। वैसे मैंने पूरे 6 माह तक किक बॉक्सिंग की ट्रेनिंग ली। सुबह दो घंटे मैं किक बॉक्सिंग करता था और समय मिलते ही फिर से प्रैक्टिस। बॉडी-बिल्डिंग के लिए तो खैर हांड-तोड़ मेहनत करनी ही पड़ती है। पर जो कुछ भी किया, लोगों को पसंद आता है तो इससे बढ़िया बात कुछ और हो ही नहीं सकती। उम्मीद है, 'दो लफ्जों की कहानी' की कहानी लोगों को पंसद आई।

    बता दें कि रणदीप हुड्डा की फिल्म 'दो लफ्जों की कहानी' आज यानि शुक्रवार को सिनेमाघरों में आ रही है। इस फिल्म में रणदीप ने किक बॉक्सर की भूमिका निभाई है, जिनके साथ काजल अग्रवाल लीड रोल में हैं। फिल्म के निर्देशक हैं दीपक तिजोरी। ये फिल्म सॉउथ कोरियन फिल्म 'ऑलवेज' की रीमेक है।

    Tags: Bollywood, Do Lafzon Ki Kahani, Randeep hooda

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