यह स्टार किसी फिल्म में झांककर ही चला जाता है तो भी याद रह जाता है

रवि किशन बचपन में रामलीला में सीता बनने के चलते मार खाया करते थे. यूं मिला था अनुराग कश्यप की फिल्म मुक्काबाज में रोल.

रवि किशन बचपन में रामलीला में सीता बनने के चलते मार खाया करते थे. यूं मिला था अनुराग कश्यप की फिल्म मुक्काबाज में रोल.

रवि किशन बचपन में रामलीला में सीता बनने के चलते मार खाया करते थे. यूं मिला था अनुराग कश्यप की फिल्म 'मुक्काबाज' में रोल.

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रवि किशन का स्क्रीन अपियरेंस इतना रोचक होता है कि जिस फिल्म में वे होते हैं दर्शक उनका सीन आने का इंतजार करते हैं. कई-कई बार लीड कैरेक्टर के सीन्स से ज्यादा हिंदी फिल्मों में उनके साइड रोल्स पसंद किये जाते हैं. लेकिन रवि किशन के लिये अपनी पहचान बनाना इतना भी आसान नहीं था करीब 15 साल की मेहनत के बाद रवि किशन कोई मुकाम बना पाने में सफल हुये. रवि किशन खुद ही बताते हैं कि 1989 में वे मुंबई आये थे. शाहरुख खान स्टारर 'आर्मी' फिल्म में भी उन्होंने काम किया है. रवि किशन कहते हैं कि इंडस्ट्री में 10-12 सालों तक वे काम करते रहे लेकिन पैसे नहीं मिले. वे बताते हैं कि काम देने वाले लोग कहते थे या आप काम ले लीजिये या पैसे. रवि किशन कहते हैं, "असली स्ट्रगल जिसे कहते हैं वह मिथुन और गोविंदा के बाद मैंने ही किया है माने इंडस्ट्री का आखिरी असली स्ट्रगलर मैं ही रहा हूं."

शुक्ला जी का लड़का नचनिया बनेगा?
रवि किशन जौनपुर के एक खेतिहर परिवार से हैं. बचपन में वे रामलीला में सीता का रोल किया करते थे. जिसे उनके पिता पसंद नहीं करते थे. उनके पिता पुजारी हैं और रामलीला में अभिनय करने को अपमानजनक मानते थे इसलिये इसमें अभिनय करने पर रवि किशन को पीटते थे. उनका रवि किशन के भविष्य और करियर के लिये आदेश था कि या तो खेती करो, दूध बेचो, नौकरी करो या पूजा करो. रवि बताते हैं कि ऐसी रोज-रोज की मार से तंग आकर उनकी मां ने उनसे एक रोज कहा था कि तुम भाग जाओ वरना तुम्हारे पापा तुम्हें मार डालेंगे. इसके बाद रवि मुंबई आ गये थे.

अपनी मां के ही चलते की पहली भोजपुरी फिल्म
माना जाता है कि एक बार बॉलीवुड आने के बाद अगर कलाकार क्षेत्रीय सिनेमा में वापस जा रहा है तो इसका मतलब उसके पास काम नहीं है और वह खत्म हो चुका है. रवि किशन को छोटा-मोटा काम मिलने के बावजूद भी मुंबई में पैसे नहीं मिल रहे थे ऐसे में वे बहुत परेशान थे. इसी वक्त रवि किशन को एक भोजपुरी फिल्म ऑफर हुई और वे उसे करने चले गये. लेकिन न सिर्फ रविकिशन इसके बाद वापस बॉलीवुड लौटे बल्कि भोजपुरी फिल्मों से 'सुपरस्टार' का तमगा भी साथ लेकर आये.



जब रवि किशन को एक भोजपुरी की फिल्म का ऑफर आया तो उन्होंने अपनी मां को फोन किया और बोले, "मां मुझे एक भोजपुरी फिल्म ऑफर हुई है क्या करूं? लेकिन भोजपुरी फिल्मों को कोई देखता नहीं है और न ही उनके पास मुझे देने के लिये पैसे हैं, क्या करूं?" तब मेरी मां ने कहा था, "यह फिल्म अपने गांव के लिये कर लो.' रवि किशन कहते हैं कि वह फिल्म थी 'सैंया हमार'. यह फिल्म आई थी 2003 में. हालांकि अब रवि किशन को पहचान मिलने के दिन दूर नहीं थे और अपनी अगली ही हिंदी फिल्म 'तेरे नाम' में पंडित के रोल से वे पहचाने जाने लगे. 'तेरे नाम' के लिये वे सतीश कौशिक का आभार मानते हैं. देखिये 'तेरे नाम' का यह सीन -

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जब गिरवी रखा खेत छुड़ाया तब पिता जी ने स्वीकारा
रवि किशन बताते हैं कि वैसे तो आज उनके गांव-देहात में उनके माता-पिता की बहुत इज्जत है और उन्हें अपने बेटे और उसके काम पर गर्व भी है. लेकिन एक दौर था जब उनके पिता मानते थे कि मेरा बेटा मर गया है. ऐसे वक्त में उनके पिता ने उन्हें तब अपनाया था उनके काम के प्रति थोड़ी सी इज्जत दिखाई थी जब रवि किशन ने उनका गिरवी रखा खेत छुड़ा लिया था. रवि कहते हैं कि तब पहली बार उनके पिता को लगा कि एक्टिंग करके भी मेरा लड़का कमा सकता है.

अमिताभ बच्चन ने लगाई सुपरस्टार के तमगे पर मुहर
रवि किशन को सुपरस्टार का तमगा अमिताभ बच्चन ने गंगा (2006) फिल्म की ऑडियो रिलीज में दिया था. इस भोजपुरी फिल्म में रवि किशन के साथ अमिताभ बच्चन भी थे. रवि किशन बॉलीवुड छोड़कर भोजपुरी फिल्मों में गये थे पर भोजपुरी जनता ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया. रवि किशन की फिल्मों भोजपुरी में करोड़ों का बिजनेस कर रही थीं. भोजपुरी जनता ने उन्हें सिर-आंखों पर बिठाया और उन्हें जनता का सुपरस्टार कहा जाने लगा. अमिताभ बच्चन ने उनके इस तमगे पर अपनी भी मुहर लगा दी. देखिये भोजपुरी फिल्म गंगा का यह गीत -

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भोजपुरी सिनेमा के यही सुपर स्टार रवि किशन बताते हैं, "स्ट्रगल के दिनों में एक-आध मौकों पर मुझे चेक देने के बाद खर्चे का हवाला देते हुये प्रोड्यूसर ने चेक वापस ले लिया था. लोग चलकर ऊपर आते हैं, मैं रेंगकर आया हूं."

एक साल में कर डालते हैं 13-13 फिल्में
2006 में वे फिर हेरा-फेरी में भी दिखे. लेकिन उन्हें असली पहचान मिली 2009 में आई फिल्म 'लक' से जिसमें वे विलेन बने थे और इसके बाद से उन्हें लगातार फिल्में मिलने लगीं. फिलहाल वे इंडस्ट्री के सबसे अनुभवी और बेहतरीन डायरेक्टर्स, चाहे वे श्याम बेनेगल हों, मणिरत्नम, अनुराग कश्यप, तिग्मांशु धूलिया या चंद्रप्रकाश द्विवेदी के साथ काम कर चुके हैं. जो रवि किशन का नाम नहीं भी जानते वे रवि किशन के लिये कहते हैं कि वो एक्टर जो किसी फिल्म में झांककर भी चला जाता है तो याद रह जाता है. वैसे रवि किशन को 2017 में आई अनुराग कश्यप की 'मुक्काबाज' और फरहान अख्तर को-स्टारर 'लखनऊ सेंट्रल' के बाद अब कौन नहीं पहचानता?

फिर भी रवि बताते हैं कि 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' के वक्त किसी ने अनुराग कश्यप को बता दिया था कि रवि वैनिटी वैन से सेट पर आते हैं और पहले लड़कियां उन्हें मसाज देती हैं. और वे जूस में नहाते हैं. जिससे उन्हें अनुराग कश्यप ने उस वक्त कास्ट नहीं किया था. जबकि जब अनुराग कश्यप के कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने 'मुक्काबाज' के लिये रवि किशन का नाम लिया तो रवि किशन ने प्रॉपर एक वीडियो मैसेज रिकॉर्ड कर अनुराग कश्यप को भेजा और उसमें बताया कि अनुराग ने जो कुछ उनके बारे में सुन रखा है सब गलत है. उन्होंने बताया कि वे अपने काम को लेकर बहुत ईमानदार, डाउन टू अर्थ और वक्त से सेट पर पहुंचने वाले हैं. जो सच भी है. इस वीडियो के बाद अनुराग कश्यप ने उन्हें कास्ट कर लिया था. सुनिये 'पैंतरा' गाने से पहले रवि किशन की शानदार आवाज़ -

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