• Home
  • »
  • News
  • »
  • entertainment
  • »
  • रहस्यमयी था ये नेत्रहीन संगीतकार, धुनों से ऐसे देखता रहा दुनिया, बॉलीवुड में कभी नहीं आई काम की कमी

रहस्यमयी था ये नेत्रहीन संगीतकार, धुनों से ऐसे देखता रहा दुनिया, बॉलीवुड में कभी नहीं आई काम की कमी

Indian music composer and lyricist, Ravindra Jain performs at the Indian legendary Hindi and Marathi film music director and composer, the late N. Dutta Naiks musical gurney show in Mumbai on June 4, 2015.  AFP PHOTO        (Photo credit should read STR/AFP/Getty Images)

Indian music composer and lyricist, Ravindra Jain performs at the Indian legendary Hindi and Marathi film music director and composer, the late N. Dutta Naiks musical gurney show in Mumbai on June 4, 2015. AFP PHOTO (Photo credit should read STR/AFP/Getty Images)

दुनिया को सुरीले नगमों की सौगात उस दौर में दी जब फिल्मों में बढ़ती हिंसा ने संगीत के लिए गुंजाइशें कम कर दी थीं।

  • Share this:
नई दिल्ली। मधुर धुनों का लंबा सिलसिला उनके नाम से जुड़ा है, उन्होंने फिल्मी दुनिया को सुरीले नगमों की सौगात उस दौर में दी जब फिल्मों में बढ़ती हिंसा ने संगीत के लिए गुंजाइशें कम कर दी थीं। ऐसे ही दौर में उभरे ते रवींद्र जैन। रवींद्र जैन एक ऐसी शख्सियत का नाम था जिसने संगीतकार, गीतकार और गायक के रूप में हिंदी सिनेमा को बेशुमार सदाबहार गाने दिये।

रवींद्र जैन का जन्म 28 फरवरी, 1944 को अलीगढ़ में संस्कृत के पंडित और आयुर्वेद विज्ञानी इंद्रमणि जैन की संतान के रूप में हुआ था। वे सात भाई-बहन थे। उन्होंने अलीगढ़ विश्वविद्यालय के ब्लाइंड स्कूल से पढ़ाई की। चार साल की उम्र से ही उनके पिता ने उनके लिए घर पर ही संगीत की शिक्षा की व्यवस्था की। बाद में रवींद्र जैन संगीत के शिक्षकों के तौर पर कोलकाता चले गए।

इस बीच उन्होंने गायक के रूप में भी स्थापित होना चाहा, लेकिन रवींद्र जैन को देश के पांच रेडियो स्टेशनों में ऑडिशन के दौरान नकार दिया गया। कोलकाता में रहने वाले रवींद्र जैन के गुरू राधे श्याम झुनझुनवाला एक फिल्म बनाना चाह रहे थे। फिल्म में संगीत देने के लिए वो रवींद्र जैन को अपने साथ मुंबई ले गए, वो साल था 1969।

ravindrajain3

राधेश्याम झुनझुनवाला ने फिल्म बनायी लोरी, 14 जनवरी 1971 को रवींद्र जैन ने अपने संगीत निर्देशन में पहला गीत रिकॉर्ड कराया। मोहम्मद रफी द्वारा गाए इस गीत के बोल थे ‘ये सिलसिला है प्यार का चलता ही रहेगा’। इसके बाद लोरी के लिेए रवींद्र जैन ने लता मंगेशकर से चार गीत और एक गीत लता और आशा से गवाया। लेकिन राधे श्याम फिल्म पूरी नहीं कर सके। फिर भी रवींद्र जैन की खुशी का ठिकाना नहीं था उन्हें पहली ही फिल्म में रफी ,लता और आशा जैसे दिग्गज गायकों से गवाने का मौका मिला था।

रवींद जैन के संगीत निर्देशन में जो पहली फिल्म रिलीज हुई वो थी 'कांच और हीरा' (1972) इस फिल्म में रवींद्र जैन ने फिर रफी साहब से एक गीत गवाया जिसके बोल थे ‘नजर आती नहीं मंजिल ’। ये फिल्म तो बक्स आफिस पर फेल हो गयी, लेकिन रवींद्र जैन फेल नहीं हुए।

ravindrajain2

1973 में आई राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म 'सौदागर' ने रवींद्र जैन की किस्मत के दरवाजे खोल दिये। इस फिल्म के गीत ‘तेरा मेरा साथ रहे और सजना है मुझे सजना के लिए आज भी गुनगुनाए जाते हैं। इसके बाद 'चोर मचाए शोर' (1974) में रवींद्र को मौका मिला तो उन्हें किशोर कुमार से कालजयी गीत गवाया ‘घुंघरू की तरह बजता ही रहा हूं मैं‘ इसके बाद रवींद्र जैन के संगीत से सजी चितचोर और अंखियों के झरोखे ने तो पूरे देश को झूमने पर मजबूर कर दिया..इन फिल्मों के बाद ही हेमलता को लता मंगेशकर के विकल्प के रूप में देखा जाने लगा। तपस्या (1975) का गीत दो पंछी दो तिनके देखो ले कर चले हैं कहां।

चितचोर (1976) का गीत, श्याम तेरे कितने नाम (1977) में जसपाल सिंह का गाया गाना जब जब तू मेरे सामने आए , मन का संयम टूटा जाए, अंखियों के झरोखे से ( 1978), गीता गाता चल (1975) और दुल्हन वही जो पिया मन भाए ( 1977) के सभी गाने से लेकर नदिया के पार (1982) तक के सफर में रवींद्र जैन ने हिंदी सिनेमा के संगीत को बेहद रसपूर्ण गीत दिये। उनके संगीत के दम पर फिल्म सिर्फ हिट नहीं बल्की सुपर हिट हुईं।

ravindrajain4

'चितचोर' (1976) के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था। इसके बाद 1978 में फिल्म 'अखियों के झरोखों से' के लिए भी सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन और फिल्म के शीर्षक गीत 'अखियों के झरोखों से' के लिए सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। साल 1985 में फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' में संगीत देने के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक और 1991 में फिल्म 'हिना' के गीत 'मैं हूं खुशरंग हिना' के लिए सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।

ये उनकी लोकप्रियता का आलम था कि बीआर चोपड़ा ने रवि को छोड़ रवींद्र जैन को पति पत्नी और वो (1978) और इंसाफ का तराजू (1980) के संगीत जिम्मेदारी दी। यही नहीं राजकपूर जैसा महान फिल्मकार जिनकी फिल्में अपने संगीत के लिए अलग महत्व रखती है। , उनको जब लक्ष्मी कांत प्यारे लाल से किनारा करना पड़ा तो उन्हें भी रवींद्र जैन ही नजर आए। राम तेरी गंगा मैली, प्रेम रोग और हिना में रवींद्र जैन ने राजकपूर के फैसले को गलत साबित नहीं होने दिया।

हांलाकि सिनेमा में अपना वुजूद बनाए रखने के लिए रवींद्र जैन ने बहुत से ऐसी फिल्में कीं जिनमें वो अपने खास हुनर की छाप नहीं छोड़ सके। मिसाल के लिए हम नहीं सुधरेंगे (1980), खून खराबा (1980), प्रतिशोध (1980), ये कैसा इंसाफ (1980) कहानी फूलवती की( 1985), मुझे कसम है (1985) माटी बलिदान की( 1986), गुलामी की जंजीर(1987) जैसी और भी कई फिल्में हैं। लेकिन जब जब उन्हें अपनी पसंदीदा सिचुएशन मिली कानो में रस घोलने वाली धुन उन्होंने जरूर दी।

फिल्मी दुनिया में उगता सूरज डूबता जरूर है रवींद्र जैन को इसका एहसास था इसलिये अस्सी के दशक के मध्य में जब रवींद्र जैन ही नहीं, खय्याम, नौशाद और रवि जैसे की बड़े संगीतकार हाशिये पर पहुंच गए तब रवींद्र जैन ने धारावाहिकों में संगीत देने और गीत लिखने का सिलसिला शुरू किया। जहां तक काम की बात है तो रवींद्र जैन अपने सुनहरे दौर में जितने व्यस्त थे तीस साल बाद भी उनके पास काम की कमी नहीं थी। एक गीतकार के रूप में उन्हेंने फिल्मों में भले ही कम लिखा हो, लेकिन अपने शौक के लिए जमकर लिखा।

उनकी गजलों का संग्रह ‘दिल की नजर से’ प्रकाशित हुआ.. इसके अलावा उन्होंने कुरान का अरबी भाषा से सहल उर्दू जबान में अनुवाद किया साथ ही उन्होंने श्रीमद्भगवत गीता का सरल हिंदी पद्यानुवाद भी किया।  हाल ही में उनकी पुस्तक रवींद्र रामायण प्रकाशित हुई इतना ही नहीं उनकी आत्मकथा ‘सुनहरे पल’ भी प्रकाशित हो चुकी है। पिछले कुछ सालों से रवींद्र जैन श्रीमद्भ भागवतम, सामवेद और उपनिषदों का सरल हिंदी में अनुवाद कर रहे थे, लेकिन वक्त ने साथ नहीं दिया..पिछले दो सालों से किडनी की बीमारी ने उनके सृजन पर गहरा असर डाला और इसी बीमारी की वजह से 9 अक्टूबर 2015 को उनका निधन हो गया।

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज