अनुराग कश्यप की फिल्में बार-बार देखने वालों के लिये 'सेक्रेड गेम्स' वरदान है

इस पहली भारतीय नेटफ्लिक्स ओरिजिनल सीरीज में छठवीं बार अनुराग कश्यप और नवाजुद्दीन सिद्दीकी साथ आये हैं.

इस पहली भारतीय नेटफ्लिक्स ओरिजिनल सीरीज में छठवीं बार अनुराग कश्यप और नवाजुद्दीन सिद्दीकी साथ आये हैं.

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    नेटफ्लिक्स ओरिजिनल की नई वेब सीरीज 'सेक्रेड गेम्स' आ चुकी है. यह लेखक विक्रम चंद्रा के करीब 950 पन्नों के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है. विक्रम चंद्रा का यह नॉवेल 2006 में आया था और इस थ्रिलर नॉवेल में उन्होंने मुंबई और उसके निवासियों की जिंदगी के इर्द-गिर्द रहस्यमयी किस्से गढ़े हैं. हालांकि सीरीज में नॉवेल की कहानी सीधे-सादे तरीके से दिखाई गई है. नॉवेल बांध लेने वाला था और उसके किरदार टुटपुंजिया शायरी भी करते थे. पर सीरीज में पहला ही एपिसोड ऐसे खुलता है कि दर्शकों को आभास हो जाता है कि प्रलय आने वाला है. क्योंकि लंबे वक्त से गायब चल रहा खतरनाक गैंगस्टर गणेश एकनाथ गायतोंडे (नवाजुद्दीन सिद्दीकी), इंस्पेक्टर सरताज सिंह (सैफ अली खान) को अपने पास बुलाकर आत्महत्या कर लेता है. पर खुदकुशी करने से पहले वह उसे बताता है कि इंस्पेक्टर के पास खुद को और मुंबई को बचाने के लिये 25 दिन का वक्त है.

    विक्रम चंद्रा का यह मशहूर नॉवेल और नेटफ्लिक्स ओरिजनल की यह नई सीरीज इसी गैंगस्टर गणेश एकनाथ गायतोंडे की सुसाइड मिस्ट्री को सुलझाने की कहानी है. जिसे ऑफिसर सरताज सिंह सुलझा रहा है. बल्कि कहें कि इसे सुलझाने के फेर में गायतोंडे ने उसे उलझा दिया है. उधर इसी मसले पर भिड़ी हुई है रॉ की ऑफिसर अंजली माथुर यानि राधिका आप्टे. छानबीन करते हुये सरताज और अंजली के सामने जो बातें आती हैं, उनके बाद धीरे-धीरे यह साधारण दिखने वाला सुसाइड बड़ा मसला होने लगता है.

    सरताज और अंजली माथुर की जांच के तार धीरे-धीरे गृहमंत्री (गिरीश कुलकर्णी), हत्यारे मैलकम (ल्यूक केनी), गायतोंडे का पिछलग्गू बंटी (जतिन सरना), और एक्ट्रेस ज़ोया (एलनाज़ नौरोजी) और रहस्यमयी इंसान त्रिवेदी (चितरंजन त्रिपाठी) से जुड़ने लगते हैं. गायतोंडे पूरी सीरीज में एक एक आवाज के तौर पर साथ बना रहता है और सरताज के सिर में कुछ बोलता रहता है. वह सरताज को उसके बचपन से लेकर अभी तक कई आदमियों-औरतों के बारे में बताता है.



     

    सेक्रेड गेम्स में बेहतरीन तरीके से प्लॉट को रखा गया है और जहां ट्विस्ट आना होता है, उसका अंदाजा पहले ही दे दिया गया है. फिर भी दर्शकों पर उस ट्विस्ट का प्रभाव कम नहीं होने पाता. फिल्म को विक्रमादित्य मोटवानी और अनुराग कश्यप ने मिलकर डायरेक्ट किया है. इसे लिखा है वरुण ग्रोवर, स्वाति सिंह और वसंत नाथ ने. यह मानना पड़ेगा कि अनुराग कश्यप और विक्रमादित्य मोटवानी दोनों के ही पिछले कामों की अपेक्षा इस बार उनका स्टेज बहुत बड़ा है. सामान्य दर्शकों को शायद इतने किरदारों और इतनी रहस्य भरी कहानी को देखकर शुरु-शुरू में अनुराग कश्यप की 'ब्लैक फ्राइडे' याद आ जाये.

    फिल्म में कई किरदारों के एक-दूसरे से गुंथे जीवन, उनके कैरेक्टर और घटनाओं को बुनना साधारण काम नहीं रहा होगा. पर मानना होगा कि इस सीरीज को खूबसूरती से लिखा, निभाया और फिल्माया गया है. दुनिया भर के दर्शकों जो भारत में रुचि रखते हैं उन्हें नेटफ्लिक्स की यह सीरीज पसंद आने की पूरी संभावना है.



    हर एपिसोड, अगले एपिसोड के लिये रहस्य छोड़कर खत्म होता है. बैकड्रॉप स्कोर एक थ्रिलर के हिसाब से बिल्कुल मुफीद है और आरती बज़ाज की एडिटिंग भी देखते ही बनती है. सेट खुद में ही रोमांच और कई बार डर भर देने वाला है. नवाजुद्दीन के मेकअप की खासतौर पर तारीफ की जानी चाहिये क्योंकि मेकअप के चलते ही उनका अधेड़ावस्था का लुक और वहशीपन आपको लंबे वक्त के लिये याद रह जाता है.



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