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लोक-कलाओं का महत्व समझाएगा 'रिवायत लोक उत्सव', यादगार होगी शाम

रिवायत लोक उत्सव की शुरुआत
रिवायत लोक उत्सव की शुरुआत

दिल्ली में 28 जुलाई को आयोजित किया जाएगा 'रिवायत लोक उत्सव'

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लोक-कलाओं का अपना रस है और अपना आनंद. लोक कलाओं ने अपना शास्त्र भले ही ना गढ़ा हो लेकिन अपने अनगढ़पन में भी लोक कलाओं ने भारतीय संस्कृति को अपने आप में समेटा है और समाज को प्रतिबिंबित किया है. आपा-धापी भरे शहरी जीवन में इन लोक कलाओं के मायने बदल दिए हैं. लेकिन तकनीक के विकास के साथ भी संचार के माध्यम के तौर पर इन लोक कलाओं के वजूद को लेकर मंथन का दौर जारी है. सवाल ये भी है कि क्या लोक कलाएं हमारी जिंदगी का हिस्सा उस तरह रह गई हैं जैसे पहले हुआ करती थीं? क्या पूंजी के तंत्र ने लोक कलाओं के शास्त्र को भी अपनी तरह से प्रभावित किया है?

हमारी जिंदगी का हिस्सा रहीं इन लोककलाओं पर कभी तो बात हो, कभी तो हम समझें कि इनकी अहमियत क्या है? कभी तो हम लोक-कलाओं के रस से सराबोर हों, समझें कि दुनिया इससे इतर भी है, जिसे हमने भौतिकतावाद के दायरे में बांध दिया है.

लोक गीतों के सुरों से सजेगी शाम




कुछ ऐसी ही सोच के साथ राजधानी दिल्ली में एक बड़ी पहल हो रही है. 28 जुलाई को दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (15 जनपथ रोड, ववंडसर प्लेस) में रिवायत की ओर से लोक-कलाओं का पहला उत्सव आयोजित किया जा रहा है. लोक कलाकारों, चिंतकों और संस्कृतिकर्मियों से सजी ये शाम कई मायनों में बेहद खास साबित होने वाली है.
लोककलाओं का प्रदर्शन


शाम 4.30 बजे उद्घाटन के साथ औपचारिक सत्रों की शुरुआत होगी. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जाने माने संगीतकार और किल्मकार मुजफ्फर अली हैं. इस मौके पर क्लेरनेट प्लेयर ओम प्रकाश नागर को सम्मानित किया जा रहा है. शाम 5 बजे से 6 बजे के बीच आप महमूद फारूकी और डी शाहिदी की ‘दास्तानगोई’ का आनंद उठा सकते हैं. शाम 6 बजे से सवा घंटे का वक्त आयोजकों ने परिचर्चा के लिए रखा है. इस सत्र में स्वानंद किरकिरे और मनोज मुंतशिर के साथ नग़मा सहर का संवाद लोककलाओं को लेकर हमारी समझ की कई परतों को खोलने में मददगार हो सकता है.

लोककलाओं की इस यादगार शाम में सबसे ज्यादा जिनका इंतजार रहेगा वो हैं राजस्थानी लोक कलाकार मामे खान और उनकी टीम. मांगनयार समुदाय के मामे खान ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राजस्थानी लोकगीतों की धमक कायम की है. रिवायत में भी वो लोक गायकी के रस से आपको जरूर सराबोर कर जाएंगे.

खास होंगे सभी मेहमान


आपको उस संस्था का छोटा सा परिचय भी देते चलें, जिसके साथी इसे मुमकिन करने में जुटे हैं. लाइफफैक्ट्री मैनेजमेंट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड की सांस्कृतिक पहल है रिवायत. रिवायत की स्थापना भारतीय लोक कलाओं की अलग-अलग शैलियों को समझने और इस सांस्कृतिक विविधता का उत्सव मनाने के मकसद से की गई है. संस्था का मकसद लोककलाओं की धरोहर का संयोजन करना और उन लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करना है, जो इस परंपरा को आगे ले जाने का हुनर और दमखम रखते हैं.

रिवायत अपनी तरह का अकेला और नवोन्मेषी प्रयास है, जो लोक कलाओं के अलग-अलग रूपों- संगीत, नृत्य, कथा-वाचन, गायकी, चित्र शैली, खान-पान के समागम के लिए प्रतिबद्ध है. लोक कला के संरक्षण के लिए काम करने वाले फिल्मकार, डॉक्यूमेंट्री मेकर और शोधकर्ताओं के लिए ये एक बेहतर मंच साबित हो, ऐसी कोशिश है.

पहला आयोजन भले ही दिल्ली में हो रहा है लेकिन आने वाले दिनों में देश के अलग-अलग शहरों में लोक-कलाओं की उत्सवधर्मिता पर केंद्रित कार्यक्रमों का आयोजन संस्था की ओर से किया जाएगा. कोई अचरज नहीं कि ऐसे बड़े आयोजन दुनिया के चुनिंदा शहरों में भी संस्था की ओर से जल्द की मुमकिन किए जा सकें.

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