तो क्या जेल से वापस आने के बाद अब बदल चुके हैं संजय दत्त?

बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त (फाइल फोटो)
बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त (फाइल फोटो)

जो उन्होंने इस प्रेस कांफ्रेंस में कहा, उनपर बनी फिल्म 'संजू' में दिखाई गई बातों से बिल्कुल अलग लगता है. संजय दत्त ने यह भी कहा कि उनकी एक खास तरह की इमेज बना दी गई है, जो उनकी असली इमेज से बिल्कुल अलग है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 26, 2018, 12:35 PM IST
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हाल ही में संजय दत्त की बायोपिक आई थी, 'संजू'. इस फिल्म में संजय दत्त का किरदार निभाया था रणबीर कपूर ने. फिल्म में संजय दत्त की जिंदगी के तमाम पहलुओं को दिखाया गया था. लेकिन एक खास पहलू भी दिखाया गया था. उनका एक्टिंग और फिल्मों की च्वाइस से जुड़ा पहलू. जिन्होंने 'संजू' देखी है उन्हें याद होगा कि फिल्म में दिखाया गया है कि जब संजय 1993 के मुंबई बम धमाकों के बाद गैरकानूनी हथियार रखने के मामले में जब छूटकर वापस आते हैं तो वे बड़े ही अनमने ढंग से फिल्मों का चयन कर रहे होते हैं. और ऐसे में उनके पिता सुनील दत्त उन्हें मुन्नाभाई एमबीबीएस जैसी फिल्म चुनने में मदद करते हैं. लेकिन इस सीन से निकलकर यही आता है कि संजय दत्त, खुद के रोल के लिये आई स्क्रिप्ट नहीं पढ़ा करते थे. लेकिन अब संजय बदल चुके हैं. कल संजू ने अपनी आने वाली फिल्म साहब, बीवी और गैंगस्टर 3 की प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि वे अब खुद को डायरेक्टर के हाथों में सौंप देते हैं.

तिग्मांशु धूलिया के साथ काम करने को उन्होंने मजेदार बताते हुये कहा कि जो तिशु कहता है मैं करता हूं. और अगर तिग्मांशु धूलिया कहते हैं कि बाबा यह सीन सही नहीं आया है तो संजय दोबारा उस सीन को करता हूं.

बदल गये हैं संजय दत्त
वैसे संजू कितना बदले हैं और वे डायरेक्टर्स के हाथों में कितने हैं, इसका फैसला तो फिल्म देखने के बाद हो सकेगा. लेकिन संजय दत्त की यह बात उनकी पिछली फिल्मों के चयन और रोल से बिल्कुल अलग नज़र आती है. संजय दत्त ने पहली बार जेल से आने से बाद (1995 के बाद) और जाने के पहले (2017 से पहले) जो फिल्में की हैं, वह इसकी गवाह हैं. इस बीच उनकी 'मुन्नाभाई एमबीबीएस', 'लगे रहो मुन्नाभाई', 'वास्तव', 'कांटे', 'शूटआउट एट लोखंडवाला', 'अग्निपथ' और 'पीके' ही हैं, जिनमें उनके रोल पर ध्यान जाये. यानि इस बीच की गई उनकी 80 से भी ज्यादा फिल्मों में से केवल 7-8 में उनपर ध्यान जाता है. बताते चलें कि पुणे की यरवदा जेल से अपनी सजा काटने के बाद संजय दत्त 2016 में बाहर आ गये हैं. जिसके बाद से उन्होंने 'भूमि' (2017) की थी.
तिग्मांशु बोले कि फिल्म में दर्शकों को आयेगा पूरा मज़ा


तिग्मांशु धूलिया से जब न्यूज 18 ने पूछा कि आज भी उनकी फिल्मों में लोग 'हासिल' और 'पान सिंह तोमर' वाला अंदाज ही खोजते हैं क्योंकि उनमें क्षेत्रीय सच्चाई के साथ ही एक अलग तरह का मनोरंजन देखने को मिला था, क्या वे उस जादू को 'साहब, बीवी और गैंगस्टर' फ्रेंचाइजी की इस तीसरी कड़ी में दर्शकों को देने का वादा करते हैं. तो तिग्मांशु धूलिया का कहना था कि दूसरी कड़ी के बाद इस तीसरी को बनाने में उन्होंने पांच साल का वक्त इसीलिये लिया है ताकि वह ऐसा कर सकें. फिल्म किस क्षेत्र की कहानी है यह बात तो 'साहब बीवी और गैंगस्टर 3' से ज्यादा साफ नहीं होती लेकिन भाषा और दूसरे पक्षों में क्षेत्रीयता का पूरा टच बनाये रखा गया है. फिल्म पिछली बार से और भव्य हो गई है और इसे देखने में दर्शकों को पूरा मज़ा आयेगा.

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