महज दिखावा नहीं है सेंसर बोर्ड को चुस्त दुरूस्त करने की कवायद: बेनेगल

सेंसर बोर्ड को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए गठित समिति के अध्यक्ष और मशहूर फिल्मकार श्याम बेनेगल ने कहा कि यह समिति महज दिखावे के लिए नहीं बल्कि पूरे गहराई से काम करने के लिए है।

सेंसर बोर्ड को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए गठित समिति के अध्यक्ष और मशहूर फिल्मकार श्याम बेनेगल ने कहा कि यह समिति महज दिखावे के लिए नहीं बल्कि पूरे गहराई से काम करने के लिए है।

सेंसर बोर्ड को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए गठित समिति के अध्यक्ष और मशहूर फिल्मकार श्याम बेनेगल ने कहा कि यह समिति महज दिखावे के लिए नहीं बल्कि पूरे गहराई से काम करने के लिए है।

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मुंबई। सेंसर बोर्ड को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए गठित समिति के अध्यक्ष और मशहूर फिल्मकार श्याम बेनेगल ने कहा कि यह समिति महज दिखावे के लिए नहीं बल्कि पूरे गहराई से काम करने के लिए है और यदि दो महीने की समय सीमा में रिपोर्ट तैयार नहीं हो पाई तो वह सरकार से समय बढ़ाने की मांग करेंगे।

उन्होंने यहां कहा कि हां, यदि यह रिपोर्ट दो महीने में तैयार नहीं होती है तो हम सरकार से समयसीमा बढ़ाने का आग्रह करेंगे क्योंकि पूरे गहराई से काम करना हमारे लिए महत्वपूर्ण है। हम यहां बस दिखावे के लिए नहीं हैं। वह यहां 6ठे राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म उत्सव एवं प्रतिस्पर्धा संवाददाता सम्मेलन में बोल रहे थे।

हाल ही में विवादों के घेरे में आए सेंसर बोर्ड के कामकाज को चुस्त-दुरूस्त करने के लिए गठित समिति को दो महीने में अपनी रिपोर्ट देना है। पैनल में राकेश ओमप्रकाश मेहरा, विज्ञापन गुरू पीयूष पांडे, फिल्म आलोचक भावना सोमैया शामिल भी हैं। बेनेगल ने कहा कि समिति इस बात को देखेगी कि दर्शक फिल्मों का प्रमाणित किए जाने के बारे में क्या सोचता है। उन्होंने देश में विज्ञान पर चलने वाले 24 घंटे के चैनल की जरूरत पर बल दिया।



बेनेगल ने कहा कि इस कार्यक्रम के लक्ष्यों में एक यह है कि एक विज्ञान चैनल होना चाहिए जो ऐसी फिल्मों के लिए मंच होगा। यदि 24 घंटे का चैनल होगा तो बड़ा अच्छा होगा क्योंकि मैं समझता हूं कि पर्याप्त सामग्री प्रसारित होगी और यह सर्वश्रेष्ठ शिक्षण चैनलों में निश्चित ही एक होगा जो हमारे देश में हो सकता है।
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