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पुण्यतिथिः सुनिए शंकर जयकिशन की जोड़ी के संगीतबद्ध किए हुए 101 सुपरहिट गाने

पुण्यतिथिः सुनिए शंकर जयकिशन की जोड़ी के संगीतबद्ध किए हुए 101 सुपरहिट गाने

शंकर जयकिशन की जोड़ी.

शंकर जयकिशन की जोड़ी.

बॉलीवुड गानों के चाहने वालों के कानों में आज भी शंकर-जयकिशन (Shankar Jaikishan) का संगीत पड़ जाए तो वो पूरा गाना सुने बगैर चैनल नहीं बदलते.

    मुंबई. बॉलीवुड की सबसे मशहूर और सफल संगीतकार जोड़ी शंकर-जयकिशन के शंकर की आज पुण्यति‌थ‌ि है. 26 अप्रैल 1987 को उनका मुंबई में निधन हुआ था. बताया जाता है कि आखिरी के दिनों में वो बेहद अकेले हो गए थे. जब उनका निधन हुआ था तब छिटफुट मीडिया में ही इसकी खबरें आई थीं. यहां तक उनके अंत्येष्टि में कोई स्टार नहीं पहुंचा था. असल में शंकर जयकिशन की जोड़ी साल 1971 में टूट गई थी जब जोड़ीदार जयकिशन ने महज 41 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया था. उसके बाद से शंकर बेहद अकेले हो गए थे. शंकर के अंतिम दिनों को देखने वाले किसी शख्स को भरोसा नहीं होता होगा वे कभी बॉलीवुड संगीत के बादशाह हुआ करते थे. वे अपने जमाने में सबसे नामचीन और रसूख वाले संगीताकर हुआ करते थे.

    एक दफा की बात है, शंकर जयकिशन (Shankar Jaikishan) ने आधी रात को मशहूर गीताकार शैलेंद्र को फोन करके बोला देव आनंद और विजय आनंद आपसे मिलना चाहते हैं. शैलेंद्र ने कहा, 'तुम जानते हो मैं रात में किसी से मिलने नहीं जाता.' लेकिन शंकर जयकिशन की बात वो काट नहीं पाए. मजेदार बात ये है कि शंकर जयकिशन इस फिल्म का म्यूजिक नहीं दे रहे थे. लेकिन फिर से एक गाने में विजय और देव दोनों अटक गए थे. तब उन्होंने शंकर-जयकिशन से मदद ली.

    शंकर-जयकिशन ने शैलेंद्र को बताया कि देव आनंद और विजय आनंद की फिल्म के लिए एक गीत लिखना है. शैलेंद्र इस फिल्म में गीत लिखने से बचना चाहते थे. टालने के मन से उन्होंने इस एक गाने के लिए इतने पैसे मांगे कि उस वक्त के गीतकार ऐसी डिमांड करने की हिम्मत भी नहीं जुटा सकते थे. उन्हें लगा था कि इतने पैसे देगा नहीं और वो इसके बहाने गीत लिखने से मना कर देंगे. लेकिन देव आनंद और विजय आनंद शंकर जयकिशन की ओर से बुलाए गए किसी गीतकार को पैसे के कारण वापस नहीं कर सकते थे.

    शैलेंद्र की बात सुनने के बाद देव आनंद और विजय आनंद ने आपस में कुछ मशविरा किया फिर हां कर दिया. जब गीत लिखा गया और रिकॉर्ड होने लगा तो देव आनंद को पसंद ही नहीं आया. उन्होंने कहा, 'ये कैसे बोल हैं...आज फिर जीने की तमन्ना है, आज फिर मरने का इरादा है. एक ही लाइन में एक दूसरे से एकदम उलट.' तब विजय आनंद ने कहा, देखो एक बार गाना शूट कर लेते हैं, उसके बाद भी पसंद नहीं आया तो हटा देंगे. गाना शूट हुआ. शंकर-जयकिशन की सलाह और शैलेंद्र का गीत कमाल कर चुका था. शुटिंग के वक्त ही यह सबके जुबान पर चढ़ गया था.

    यह कहानी शंकर-जयकिशन की संगीत को लेकर उनकी अद्भुत क्षमताओं और किससे काम कराना है इस बात कर अहसास कराती है. बाकी जिन फिल्मों में शंकर और जयकिशन ने संगीत दिए, वो फिल्में और उनके गाने अमर हो गए.

    यहां सुनिए शंकर जयकिशन की जोड़ी के संगीतबद्ध किए हुए 101 सुपरहिट गाने


    इस गाने को आज भी अगर कोई सुनना शुरू करता है तो पूरा सुनकर ही उठता है. शंकर जयकिशन के संगीत की यही खास बात थी. इस जोड़ी के गाने "संगम, जिस देश में गंगा बहती है, श्री 420, चोरी-चोरी (1957), अनाड़ी (1960), दिल अपना और प्रीत पराई (1961), प्रोफेसर (1963), सूरज (1967), जंगली, ब्रह्मचारी (1969), पहचान (1971), अंदाज" और आखिरी दिनों में रिकॉर्ड किए हुए गाने 'मेरा नाम जोकर', 'बे-ईमान' में सुनने को मिलते हैं. राज कपूर इस जोड़ी के खासे प्रशंसक थे. अपनी ज्यादातर फिल्मों के गाने उन्होंने इसी जोड़ी से बनवाए.

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    Tags: Music

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