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V. Shantaram B'day Spl: अनुशासन के पाबंद वी शांताराम ने अपनी बेटी को फिल्म से कर दिया था बाहर

V. Shantaram B'day Spl: अनुशासन के पाबंद वी शांताराम ने अपनी बेटी को फिल्म से कर दिया था बाहर

वी. शांताराम का जन्म 18 नवंबर 1901 में हुआ था.

वी. शांताराम का जन्म 18 नवंबर 1901 में हुआ था.

वी. शांताराम (V. Shantaram) ने अपने करियर में करीब 90 से अधिक फिल्मों का निर्माण किया. करीब 55 फिल्मों में बतौर निर्देशक काम किया. इन्हें एक ऐसे फिल्मकार के रुप में याद किया जाता है जो अर्थपूर्ण मनोरंजक फिल्में बनाते थे. शुरुआती दौर में ही खुद को अनुशासन में ऐसा बांधा कि उसूलों पर आंच ना आए इसलिए अपनी बेटी को भी नहीं बख्शा. आज के समय में फिल्मी दुनिया में अपनों को जिस तरह से प्रमोट किया जाता है उनके लिए शांताराम जैसे दिग्गज फिल्मकारों का जीवन सबक है. सामाजिक समस्याओं को सिनेमा के माध्यम से पर्दे पर उतारने वाले शांताराम की फिल्में आज सिनेमा का सिलेबस हैं.

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    सिनेमा जगत के पितामह माने जाने वाले शांताराम राजाराम वनकुद्रे (Shantaram Rajaram Vankudre) को लोग वी. शांताराम (V. Shantaram) के नाम से बुलाते हैं. हिंदी और मराठी फिल्मों में एक्टर, प्रोड्यूसर और फिल्म मेकर रहे शांताराम का जन्म 18 नवंबर 1901 में महाराष्ट्र के कोल्हापुर में हुआ था. शांताराम ने जब फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था तब मूक फिल्में बनती थीं. बोलती फिल्मों का चलन इनके दौर में ही शुरू हुआ. पहली बोलती फिल्म तो इन्होंने नहीं बनाई लेकिन फिल्मों में टेक्नीक का इस्तेमाल करने का श्रेय इन्हे ही जाता है. अपने उसूलों के बेहद पक्के शांताराम सिनेमा जगत के सबसे बड़े पुरस्कार दादासाहेब फाल्के से सम्मानित किए गए थे. नियम कानून के पाबंद इस दिग्गज फिल्मकार के जन्मदिन के मौके पर इनकी लाइफ से जुड़ी रोचक कहानी बताते हैं.

    वी. शांताराम ने अपने करियर में करीब 90 से अधिक फिल्मों का निर्माण किया. करीब 55 फिल्मों में बतौर निर्देशक काम किया. इन्हें एक ऐसे फिल्मकार के रुप में याद किया जाता है जो अर्थपूर्ण मनोरंजक फिल्में बनाते थे. शुरुआती दौर में ही खुद को अनुशासन में ऐसा बांधा कि उसूलों पर आंच ना आए इसलिए अपनी बेटी को भी नहीं बख्शा. आज के समय में फिल्मी दुनिया में अपनों को जिस तरह से प्रमोट किया जाता है उनके लिए शांताराम जैसे दिग्गज फिल्मकारों का जीवन सबक है. सामाजिक समस्याओं को सिनेमा के माध्यम से पर्दे पर उतारने वाले शांताराम की फिल्में आज सिनेमा का सिलेबस हैं.

    वी. शांताराम की फिल्मों के बारे में भी बात करेंगे लेकिन पहले एक ऐसी बात बताते हैं जिसके जिक्र मात्र से ही आप उनके व्यक्तित्व के बारे में अंदाजा लगा पाएंगे. शांताराम ने 1967 में एक फिल्म बनाई थी ‘बूंद जो बन गई मोती’. इस फिल्म में जितेंद्र को लीड रोल में लिया था,लेकिन कम लोगों को पता होगा कि इस फिल्म में पहले लीड एक्ट्रेस मुमताज नहीं बल्कि शांताराम की बेटी राजश्री थीं.

    खबरों के मुताबिक ‘बूंद जो बन गई मोती’ की शूटिंग सेट पर पहले ही दिन राजश्री देर से पहुंची. अनुशासन के पाबंद शांताराम को बेटी का देर से पहुंचना नागवार गुजरा. गुस्साए फिल्ममेकर ने अपनी बेटी को ही फिल्म से बाहर कर दिया और उनकी जगह मुमताज को कास्ट कर लिया. उस समय मुमताज छोटे-मोटे रोल करने वाली बी ग्रेड की एक्ट्रेस मानी जाती थीं. जितेंद्र उनके साथ काम नहीं करना चाहते थे लेकिन शांताराम के सामने किसकी चलती. बाद में यही मुमताज हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की पॉपुलर एक्ट्रेस बन गईं.

    वी. शांताराम ने यूं तो कई शानदार फिल्में बनाई थी लेकिन 1937 में फिल्म ‘दुनिया न माने’ हिंदी में और ‘कुंकू’ नाम से मराठी में फिल्म बनाई. इस फिल्म में बाल विवाह, महिलाओं के साथ होने वाला अत्याचार दिखाने की हिम्मत दिखाई थी. इस फिल्म को उस दौर में वेनिस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई थी.

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    इसके अलावा अगर हम वी शांताराम की ‘दो आंखे बारह हाथ’ जैसी कालजयी फिल्म की बात न करे तो कहानी पूरी नहीं होती है. 1957 में बनी इस कॉमेडी ड्रामा फिल्म को सिनेमा के स्टूडेंट्स को पढ़ाया जाता है. इस फिल्म को भी बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया था जहां सिल्वर बेयर और गोल्डन ग्लोब के लिए नॉमिनेट किया गया था. इस फिल्म का एक गाना जिसे शांताराम ने लता मंगेशकर से गवाया था वह आज भी पॉपुलर है. वह गाना है ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’. शांताराम का निधन 30 अक्टूबर 1990 में हुआ था.

    Tags: Actor, Birth anniversary, Jeetendra

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