शिखा धारीवाल का कॉलमः बॉलीवुड में सरदारों से होता है ऐसा बर्ताव, क्यों आवाज नहीं उठाते सितारे

एक्टर ने बताया, 'कई बार तो रोल मेरे हाथ से सिर्फ़ इसलिए निकल गया क्योंकि मैं सरदार था. डायरेक्टर ने कहा अगर पगड़ी नहीं उतारी तो सरदार लुक में यह रोल नहीं मिलेगा.'

शिखा धारीवाल | News18Hindi
Updated: August 6, 2019, 7:19 AM IST
शिखा धारीवाल का कॉलमः बॉलीवुड में सरदारों से होता है ऐसा बर्ताव, क्यों आवाज नहीं उठाते सितारे
इन स्टार को पगड़ी की वजह से नहीं मिलती फिल्में.
शिखा धारीवाल | News18Hindi
Updated: August 6, 2019, 7:19 AM IST
फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग असहिष्णुता के नाम पर ट्विटर से लेकर तमाम सोशल मीडिया पर बड़ी-बड़ी बात करते हैं. हालांकि इस तरह की बातें काफ़ी सोच समझकर की जानी चाहिए. मुझे याद है एक बार शाहरुख़ और आमिर खान ने असहिष्णुता पर बयान दिया और देश में हंगामा मच गया. लेकिन मुझे यह बात काफ़ी हैरान करती है कि फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग असहिष्णुता की इतनी बात करते हैं, लेकिन जब फ़िल्म इंडस्ट्री में ही असहिष्णुता पनपने लगे तो इसे रोकने की ज़िम्मेदारी उठाने में उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं होती.

चलिए आज की कहानी में फ़िल्म इंडस्ट्री की असहिष्णुता का एक क़िस्सा बताती हूं हिंदी फ़िल्मों में आपने अपने फ़ेवरेट सितारों को सरदार लुक में देख उनके अंदाज़ में थिएटर में सीटी बजायी होगी. बालीवुड के लगभग सभी बड़े स्टार्स पर्दे पर सरदार बन दर्शकों को एंटरटेन कर चुके हैं.

सारे बड़े एक्टर्स बन चुके हैं सरदार
बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन फिल्म 'अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो में' मेजर जनरल अमरजीत सिंह के किरदार में सरदार की पगड़ी पहने नज़र आये थे. अमिताभ बच्चन के अलावा सैफ अली खान भी 'लव आजकल' में सरदार बन चुके हैं तो वहीं सनी देओल का सिख सरदार वाला अवतार तो दर्शकों में आज भी रोमांच भर देता है.

वैसे पर्दे पर कहानी के लिए सरदार बनने की लिस्ट में अक्षय कुमार, रणबीर कपूर, अजय देवगन, अभिषेक बच्चन, ऋषि कपूर, परेश रावल, अर्जुन कपूर, इरफ़ान खान, बोमेन ईरानी, आयुष्मान खुराना, फरहान अख्तर समेत कई सितारे हैं. जब इन सितारों ने सरदार बनकर दर्शकों को एंटरटेन किया है. वैसे तो आमिर खान और रणवीर सिंह भी एड में पगड़ी पहन सरदार बने हैं, लेकिन कमाल की बात यह है कि पर्दे पर स्टार्स को फ़िल्ममेकर्स पगड़ी पहनाते हैं तो वही रियल लाइफ में ऐसे भी स्टार हैं जिन्हें फिल्मों में रोल देने के लिए पगड़ी उतारने और बाल काटने की बात की जाती है.

सारे बड़े स्टार पर्दे पर सरदार बन चुके हैं.
सारे बड़े स्टार पर्दे पर सरदार बन चुके हैं.


पगड़ी पहनने के चलते केवल कॉमिक रोल देते हैं निर्माता-निर्देशक
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असल में कई बार पर्दे पर दिलकश दिखने वाले इन सितारों को असल जिंदगी में कई तरह की परेशनियां भी झेलनी पड़ती हैं. अभी तक ऐसी कहानियां तो कई दफ़ा सुनी होंगी जब फ़िल्म निर्माता ने एक्टर को फ़िल्म देने के एवज़ में उसकी बाड़ी और हुलिया बदलने की बात कही. लेकिन आज हम आपको इस ख़ास कॉलम में ऐसी कहानी बताएंगे जिसे सुनकर आप भी चौक जाएंगे.

आपको फ़िल्म 'ओए लकी, लकी ओए' में एक्टर मनजोत सिंह का छोटे लकी सरदार का किरदार याद है. इस फ़िल्म में इनका काम दर्शकों ने ख़ूब पसंद किया. फिर यह सरदार एक्टर फ़िल्म 'उड़ान', 'स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर', 'फुकरे' में भी नज़र आए. लेकिन अच्छा काम करने के बावजूद यह कलाकार पर्दे पर बहुत ज़्यादा नज़र नहीं आते. हाल ही में मेरी मनजोत सिंह से मुलाक़ात हुई तो हमने चर्चा की कि आप फ़िल्मों से लगभग ग़ायब हैं क्या हुआ सब ख़ैरियत है ना, रोल ऑफ़र नही हो रहे क्या?

मेरे इस सवाल पर मनजोत ने हंसते हुए कहा कि मेरे रोल सिमटकर रह गए हैं. फ़िल्म इंडस्ट्री से सिर्फ़ मुझे कॉमिक रोल ही ऑफ़र होते है. क्योंकि उन्हें ऐसा लगता है कि मैं एक सरदार के रोल में महज़ कॉमेडी कर लोगों को हंसा सकता हूं. मेरे सरदार के गेटअप में एक्शन और सीरयस रोल फ़िट नहीं ही सकते. बस इसी लिए पर्दे पर कम दिखता हूं.

मनजोत को कई बार पगड़ी उतारने की सलाह मिल चुकी है.
मनजोत को कई बार पगड़ी उतारने की सलाह मिल चुकी है.


'नहीं उतारूंगा पगड़ी, कुछ भी हो जाए'
मनजोत बातचीत को बढ़ाते हुए चर्चा करते हुए कहते है कि फ़िल्म इंडस्ट्री के लोग कई बार बाल काटने और पगड़ी ना पहनने की सलाह देते हैं. कई बार तो रोल मेरे हाथ से सिर्फ़ इसलिए निकल गया क्योंकि मैं सरदार था. डायरेक्टर ने कहा अगर पगड़ी नहीं उतारी तो सरदार लुक में यह रोल नहीं मिलेगा. मेरा रिजेक्शन हुआ बहुत बुरा लगा लेकिन यह मेरा फ़ैसला है कि चाहे रोल मुझे मिले या ना मिले.
वाहे गुरु दी शान अपनी पग नहीं खोलूंगा और ना ही अपने बाल कटाऊंगा. मैं सरदार हूं और जैसा हूं वैसा ही रहूंगा, भले ही इस बात के लिए मुझे इंडस्ट्री मुझे ख़ारिज ही क्यू ना कर दे. वैसे मनजोत ने भले ही यह बात आसानी से कह दी हो लेकिन उनके शब्दों में भरा दर्द मैं महसूस कर सकी, एक अभिनेता को जब उसके टेलेंट के बजाय रोल के ऑफ़र्स के लिए इस तरह की शर्तें रखी जाए और काम के नाम पर उसकी इच्छा और धर्म के विरुद्ध बदलने को कहा जाए तो ज़ाहिर है ठेस तो लगेगी ही.- मनजोत सिंह

लेकिन कमाल की बात यह है कि फ़िल्म इंडस्ट्री में चुनिंदा सरदार एक्टर है और अगर बड़े चेहरों की बात की जाए तो सिर्फ़ दो ही बालीवुड में सरदार एक्टर है दिलजीत दोसांझ और मनजोत सिंह.

मनजोत ने तय किया हे कि वो किसी स्थिति में नहीं उतारेंगे पगड़ी.
मनजोत ने तय किया हे कि वो किसी स्थिति में नहीं उतारेंगे पगड़ी.


दिलजीत दोसांझ से भी होती है ऐसी हैं मांग
ऐसा सिर्फ़ मनजोत के साथ ही नहीं बल्कि दिलजीत दोसांझ के साथ भी हो चुका है. दिलजीत दोसांझ से जुड़ी कई ऐसी कहानियां है जब उन्हें ऐसी फ़िल्मों के रोल ऑफ़र हुए जिनमें उनका लुक सरदार का नहीं था लेकिन दिलजीत दोसांझ ने शुरुआत से ही बालीवुड में यह बात साफ़ कर दी थी कि वह अपनी पगड़ी के साथ कोई समझौता नही करेंगे. यहां तक कि जब उनसे कोई इस तरह की बात करता तो दिलजीत नाराज़ हो जाते थे.

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इतना ही नही दिलजीत दोसांझ का यह बात भी काफ़ी दिल दुखाती है. जब लोग सरदारों का मज़ाक़ बनाते हैं. कई दफ़ा उनसे मुलाक़ात के दौरान इस बारे में बात हुई तो वह अक्सर यही कहते है अगर किसी फिल्म, टीवी शो या कहीं भी कोई ऐसी लाइन, जिससे किसी भी सरदार की गरिमा कम होती हो, मैं उस काम को नही करता तुरंत छोड़ देता हूं. मुझे लगता है कि किसी की पहचान पर कोई मजाक या चुटकुला नहीं बनना चाहिए. सरदारों की जो पहचान है उस पहचान को बनाने में सदियां लगी हैं, बहुत से महान लोगों ने इसी पहचान को बनाए रखने के लिए अपना बलिदान तक दिया है. किसी को भी किसी की पहचान पर किसी भी तरह का कोई भी हमला और जोक्स नहीं बनाना चाहिए.

दिलजीत ने कई फिल्में सरदारों के मजाक बनाए जाने के चलते छोड़ीं.
दिलजीत ने कई फिल्में सरदारों के मजाक बनाए जाने के चलते छोड़ीं.


दिलजीत को छोड़नी पड़ी कई फिल्में और टीवी शोज
दिलजीत को इस बात से कभी गुरेज़ नही है कि लोग उनका दिलजीत के तौर पर मज़ाक़ बनाए लेकिन दिलजीत का सरदार के तौर पर मज़ाक़ बनाने को अगर फ़िल्म और टीवी शो में कहा तो दिलजीत ने ऐसे कई शो और फ़िल्में तक छोड़ दी. दिलजीत अक्सर बातचीत में कहते हैं कि मैं सरदारों पर बनने वाले जोक्स के सख़्त ख़िलाफ़ हूं और ख़ुद कभी ऐसा काम नही करूंगा जो सरदार पर मज़ाक़ उड़ाने वालों को बढ़ावा दे.

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इस बदलते ट्रेंड और नए दौर के सिनेमा में यह सोचने वाली बात है कि क्या ऐसे दौर की सम्भावना की जाए जहां इन इन सरदार एक्टर्स को इनके मन मुताबिक़ रोल इनके टेलेंट के आधार पर ऑफ़र किए जाए और इनकी पगड़ी और धर्म के साथ समझौते की बात दोहरायी ही ना जाए. क्योंकि अगर फ़िल्म इंडस्ट्री फ़िल्मों के किरदार के लिए किसी अभिनेता से उसके धार्मिक परिवर्तन की बात करे तो इससे बड़ी असहिष्णुता और क्या होगी. ख़ैर उम्मीद करती हूं कि सोशल मीडिया पर असहिष्णुता बताने वाले फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का ध्यान इस असहिष्णुता पर भी जाए और सोशल मीडिया पर ज्ञान देने के बजाय असहिष्णुता कम करने की शुरुआत फ़िल्म इंडस्ट्री से की जाए.

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First published: August 6, 2019, 7:19 AM IST
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