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बॉलीवुड इंसाइडः 'इंडस्ट्री में फिट होने के लिए A लिस्टर्स के तलवे चाटने' पड़ते हैं'

News18Hindi
Updated: October 26, 2019, 7:38 AM IST
बॉलीवुड इंसाइडः 'इंडस्ट्री में फिट होने के लिए A लिस्टर्स के तलवे चाटने' पड़ते हैं'
मनोज बाजपेयी ने खुलकर अपनी बात रखी है.

शिखा धारीवाल के वीकली कॉलम बॉलीवुड इंसाइड में आज आप फिल्म इंडस्ट्री के भीतर खास 'A लिस्टर्स' के बारे में जानिए, जिनके बगैर किसी एक्टर को इंडस्ट्री में अपनाया नहीं जाता.

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  • Last Updated: October 26, 2019, 7:38 AM IST
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मैं हमेशा कहती हूं कि फ़िल्म इंडस्ट्री बाहर से काफ़ी सुहावनी लगती है, लेकिन हक़ीक़त में फ़िल्म इंडस्ट्री उतनी भी ख़ूबसूरत नहीं है. सपनों की दुनिया से काफ़ी अलग है ये फ़िल्मी दुनिया. यहां ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ नए-नवेले एक्टर्स को दिक्कत होती है. यहां बड़े एक्टर्स भी राजनीति का शिकार होते हैं, एक्टर्स से जुड़ी कई ऐसी कहानियां हैं जिन्हें अगर आप सुनेंगे तो शायद यक़ीन ना कर पाएं.

बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) को शानदार अभिनय के लिए पद्मश्री अवार्ड से नवाजा गया है. मनोज के फैंस से लेकर बॉलीवुड के रोमांस के बादशाह शाहरुख़ खान (Shahrukh Khan) भी उनके अभिनय के कायल हैं. बॉलीवुड में 25 साल पूरे कर चुके मनोज बाजपेयी कहते हैं कि भले ही फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें 25 साल हो गए हैं लेकिन इसके बावजूद आज भी उन्हें इंडस्ट्री में आउटसाइडर जैसा ही महसूस होता है. यहां आपको आउटसाइडर का टैग छोड़ इनसाइडर फील करने के लिए सो कोल्ड 'A' लिस्टर्स के तलवे चाटने पड़ते हैं. तब कही जाकर उनसे इनसाइडर जैसा महसूस करने का अप्रूवल मिलता है.



मनोज बेबाकी से बात करते हुए कहते हैं कि भले ही आप बॉलीवुड में कोई मुकाम हासिल कर लें, लेकिन हकीकत यह है कि फिल्म इंडस्ट्री में 'A' लिस्टर जिन्हें माना जाता है, उन्हीं सो कोल्ड 'A' स्टार्स से जब तक आपको इशारा नहीं मिलेगा तब तक आप उनकी लॉबी में जाकर उनके तलवे न चाटने शुरू कर दें और उनकी हर बात में हामी भरें, तभी जाकर आप उनकी लिस्ट में शामिल होते हैं. यह एक तरह का मानसिक फ्रस्ट्रेशन है और मैं इस समस्या से पिछले 25 साल से जूझ रहा हूं.

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मनोज बातचीत कहते हैं कि हालांकि दर्शकों के लिए अब स्टार्स नहीं बल्कि कंटेंट ज्यादा अहमियत रखता है और अब उन सो कोल्ड 'A' लिस्टर्स को भी यह बात समझनी पड़ेगी और यह लोग जितनी जल्दी यह बात समझ जाएंगे उतना अच्छा है नहीं तो नुकसान उठाएंगे. क्योंकि अब जो नए आउटसाइडर्स एक्टर्स आ रहे हैं वे बेहद आक्रामक हैं और उनका अग्रेशन काम में नज़र आता है. नए एक्टर्स को काम के बदले सम्मान चाहिए.


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मनोज बाजपेयी को इंडस्ट्री में 'A' लिस्टर्स का अप्रूवल मिला क्या, इस सवाल का जबाब देते हुए मनोज कहते हैं कि मैं बिना उनके अप्रूवल के इस मुकाम पर पहुंच गया और मुझे कभी उनके अप्रूवल की जरूरत नहीं पड़ी और आखिर होनी भी क्यों चाहिए.

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नेपोटिज्‍म के सवाल पर मनोज कहते हैं कि जब स्टार्स के बच्चों की लॉन्‍चिंग होती है तो मुझे गुस्सा नहीं आता, क्योंकि मैं यह मानता हूं कि उनके माता-पिता ने इंडस्ट्री में एक मुकाम बनाया है और वह उस मुकाम में बच्चो को लॉन्‍च कर रहे हैं. यह ठीक है लेकिन मुझे मीडिया की डीलिंग पर काफी गुस्सा आता है. मीडिया स्टार किड एक्टर्स न्यू एक्टर्स को जितनी कवरेज और भाव देता है वैसा बर्ताव मीडिया का आउटसाइडर न्यू एक्टर्स के लिए कतई नहीं होता.

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मनोज वाजपेयी की बात में दम है. इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि स्टार किड्स की अपेक्षा आउटसाइडर न्यू एक्टर्स को उतनी तवज्जो नहीं मिलती और ‘A’ लिस्टर्स की लॉबी के भी कई क़िस्से बाहर आते हैं. उम्मीद है यंग जनरेशन अपने टैलेंट और कटेंट के बल पर आने वाले वक़्त में ‘A’ लिस्टर्स का ट्रेंड और लॉबी दोनों ही तोड़ने में कामयाब होगी.

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First published: October 26, 2019, 5:11 AM IST
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