शिखा धारीवाल का कॉलमः नहीं बदला सनी देओल का मिज़ाज, फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़े नेताओं को कभी ऐसी बातें करते नहीं देखा

फ़िल्म इंडस्ट्री (Film Industry) से जुड़े नेताओं को कभी इस तरह बात करते नहीं देखा. जब भी बातचीत होती है बॉलीवुड स्टार से नेता बने लोग कई मुद्दों पर बातचीत करते ज़रूर हैं, लेकिन काम करने की बात कभी नहीं करते.

शिखा धारीवाल | News18Hindi
Updated: September 7, 2019, 1:36 PM IST
शिखा धारीवाल का कॉलमः नहीं बदला सनी देओल का मिज़ाज, फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़े नेताओं को कभी ऐसी बातें करते नहीं देखा
सनी देओल से शिखा धारीवाल की बातचीत पर आधारित.
शिखा धारीवाल | News18Hindi
Updated: September 7, 2019, 1:36 PM IST
अक्सर जब भी मैं किसी राजनीति से जुड़ी शख़्सियत से मिलती हूं तो मैं अक्सर नेताओं को देश और सामाजिक मुद्दों पर बड़ी-बड़ी बात करते हुए देखती और सुनती हूं. नेता चुनाव से पहले ऐसी बातें करते हैं, जैसे चुनाव जीतते ही देश की कायाकल्प कर देंगे. हालांकि अब जनता भी समझती है कि नेता वोट बैंक के लिए इस तरह के बड़े-बड़े वादे करते हैं. बॉलीवुड में भी नेताओं की बायोपिक और कहानियां अक्सर मुनाफ़े की फ़िराक़ में बनाई जाती हैं. आज राजनेताओं और बॉलीवुड से जुड़ी एक कहानी आपको बताती हूं.

अक्सर इंटरव्यू के दौरान जब भी मैं धर्मेंद्र (Dharmendra), सनी देओल (Sunny Deol) और बॉबी देओल (Bobby Deol) को ख़ुश मिज़ाज अन्दाज़ में पत्रकारों से बेहद शालीन तरीक़े से स्नेह और सम्मान के साथ बातचीत करते हुए देखती हूं. इससे मन में सवाल खड़ा होता है क्या वाक़ई देओल परिवार केवल कैमरे पर अच्छा है या वाक़ई रीयल लाइफ़ में भी ऐसा है? इसका जवाब देओल परिवार के साथ काम करने वाले लोग देते हैं. वे बताते हैं कि देओल परिवार आज भी परंपरा पर चलने वाला, प्यार, स्नेह और सम्मान देने वाले परिवारों में से एक है. सनी देओल और बॉबी देओल की परवरिश में उनके माता-पिता ने स्टारडम को कभी उन पर हावी नहीं होने दिया.

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सनी देओल ने न्यूज 18 की वरिष्ठ संवाददाता शिखा धारीवाल से पंजाब को लेकर अपने विचारों को खुलकर शेयर किया.


मुझे नेताओं की तरह डिप्लोमेसी कहां आती हैः सनी देओल

कल मेरी मुलाक़ात मुंबई में सनी देओल से हुई. उनके बेटे की पहली फिल्म आ रही है. इसका डायरेक्शन खुद सनी देओल कर रहे हैं. लेकिन इससे भी बड़ी बात है कि पंजाब के गुरुदासपुर से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद यह पहली बार था जब सनी देओल से मुखातिब होने मौका मिला. मैं सोच रही थी कि शायद राजनीति ज्वाइन करने और जीतने के बाद अब सनी देओल का मिज़ाज बदल गया होगा. इंटरव्यू के बाद ऑफ़ कैमरा सनी देओल से चर्चा हुई तो मैंने मज़ाक़ में पूछ लिया कि पाजी नेताओं की तरह बातचीत करना सीख गए क्या? जबाब में सनी ने कहा, 'मैं पहले से ऐसा ही हूं तो अब क्या बदलूंगा. आप तो जानती ही हैं मैं तो हमेशा से ही सरल और सपाट हूं. मुझे नेताओं की तरह डिप्लोमेसी कहां आती है.

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पंजाब में महिलाओं और बच्चों के लिए काम करना चाहते हैं सनी देओल.


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पीएम मोदी बहुत काम कर रहे हैं, हमें सहयोग करना चाहिएः सनी देओल
फिर बातों ही बातों में सनी ने गम्भीरता से कहा, 'सच कहूं तो पंजाब की जनता मुझसे बहुत प्यार करती है. मैं कभी उनका दिल नहीं तोड़ सकता. हमारी ख़ानदानी परम्परा है कि हम लोगों का ख़याल रखें. उनकी भावनाओं को समझे. मैं सिर्फ़ बातें नहीं करना चाहता. मुझे पंजाब की जनता के लिए काम करना है. पंजाब का भविष्य वहां की अगली पीढ़ी पर टिका है. दुर्भाग्य से अगली पीढ़ी रास्ता भटक रही है. इसलिए ज़रूरी है कि भटकी पीढ़ी को सही रास्ता दिखाऊं. उन बच्चों के लिए वहां की महिलाओं के लिए काम करूं. अब पुरानी पीढ़ी तो सुनने और सुधरने से रही, लेकिन आने वाली पीढ़ी ही पंजाब का भविष्य है. मुझे नहीं पता कि मैं कितना कर पाऊंगा. लेकिन काम करना है और मैं यह काम अकेले बिना सरकार के सहयोग के नहीं कर सकता. मोदी जी बहुत काम कर रहे हैं लेकिन हम सबको सहयोग करना चाहिए. हम हर बात पर अकेले सरकार की राह देखते हैं.

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सनी देओल ने पंजाब के गुरुदासपुर सीट पर लोकसभा चुनाव 2019 में जीत दर्ज की थी.


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सनी की बात सुन मैंने कहा पाजी इरादा पक्का है तो सुधार ज़रूर आएगा. ख़ासतौर पर फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़े नेताओं को कभी इस तरह बात करते नहीं देखा. जब भी बातचीत होती है बॉलीवुड स्टार से नेता बने लोग कई मुद्दों पर बातचीत करते ज़रूर हैं, लेकिन काम करने की बात कभी नहीं करते. जबकि सनी देओल ने बिना पंजाब सरकार और तमाम लोगों को कोसे, बड़े ही शालीनता से अपनी बात कही. वे बच्चों और महिलाओं के लिए काम करना चाहते हैं.

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सनी देओल फिलहाल अपने बेटे करण देओल की पहली फिल्म 'पल पल दिल के पास' का प्रमोशन कर रहे हैं.


फ़िल्म इंडस्ट्री में आज भी देओल परिवार अलग क्यों है
सनी देओल से काफ़ी देर तक बातचीत हुई और इस बातचीत के बाद वाक़ई मैं महसूस कर पायी कि फ़िल्म इंडस्ट्री में आज भी देओल परिवार अलग क्यों है. अगर सनी देओल की जगह कोई भी नेता होता तो इस बात की चर्चा कैमरे के पीछे नहीं बल्कि कैमरे पर करता और बड़ी-बड़ी बात करता. बताता कि पंजाब की युवा पीढ़ी ड्रग्स और कोकीन की तरफ़ अट्रेक्ट होकर ग़लत रास्ते पर बढ़ रही है. लगे हाथ पंजाब सरकार को भी कोसने और नकारा बताने में कसर नहीं छोड़ता. लेकिन मुझे सनी से बातचीत में अहसास हुआ कि डिजिटल भारत और बदलते दौर के साथ-साथ अब हमें सनी जैसे नेताओ की ज़रूरत है. ये सोशल मीडिया पर ज़ोर-शोर से हल्ला करने की बजाय गंभीरता से लोगों से जुड़े मुद्दे समझ उन कार्यों की तरफ़ ध्यान दें.



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ख़ासतौर पर बॉलीवुड इंडस्ट्री से राजनीति ज्वॉइन करने वाले सितारों को मेरी एक मुफ़्त की नसीहत है कि सिर्फ़ राजनीति की पावर और चकाचौंध से प्रभावित होकर अपने फ़ायदे के लिए राजनीति ज्वॉइन कर युवा पीढ़ी के साथ खिलवाड़ ना करें. अगर वाक़ई बॉलीवुड स्टार्स काम करने में दिलचस्पी लेने की सोच रहे हों तभी राजनीति ज्वॉइन करें क्योंकि वैसे ही नकारा लोगों की राजनीति और सोशल मीडिया पर हल्ला करने वालों की कमी नहीं है.

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First published: August 31, 2019, 3:45 PM IST
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