शिखा धारीवाल का कॉलमः फिल्म इंडस्ट्री में हर महीने बंटने वाले अवॉर्ड की सच्चाई

शिखा धारीवाल | News18Hindi
Updated: August 24, 2019, 12:16 PM IST
शिखा धारीवाल का कॉलमः फिल्म इंडस्ट्री में हर महीने बंटने वाले अवॉर्ड की सच्चाई
जानिए आजकल कैसे मिलते हैं अवार्ड्स.

एक वक़्त था जब फ़िल्म इंडस्ट्री में नेशनल अवार्ड (National Film Award) के अलावा गिने चुने अवॉर्ड फ़ंक्‍शन होते थे. यहां फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को उनकी कला के लिए सम्मान दिया जाता था. लेकिन बॉलीवुड में इन दिनों अवार्ड्स की काफ़ी कैटेगरी चल पड़ी है.

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बॉलीवुड (Bollywood) की मायानगरी बाहर से काफी ग्लैमरस लगती है, लेकिन अंदर से बॉलीवुड का रूप कई मायनों में अलग है. कई ऐसे मसले और कहानियां हैं, जो ख़बरों में नहीं आती. दर्शक इन किस्सों से अनजान रह जाते हैं. इसीलिए मैं अपने इस कॉलम में कोशिश करती हूं कि आपके साथ बॉलीवुड से जुड़ी कुछ अंदर की बातें साझा करूं. इस हफ़्ते भी ऐसी ही कहानी साझा कर रही हूं जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगी. फिल्म इंडस्ट्री (Film Industry) में आर्टिस्ट की कला का सम्मान आजकल आखिर किस तराज़ू में होने लगा है?

एक वक़्त था जब फिल्म इंडस्ट्री में नेशनल अवॉर्ड (National Film Award) के अलावा गिने चुने अवॉर्ड फंक्‍शन होते थे. यहां फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को उनकी कला के लिए सम्मान दिया जाता था. लेकिन बॉलीवुड में इन दिनों अवॉर्ड्स की काफी कैटेगरी चल पड़ी है. ढेर सारे अवॉर्ड फंक्‍शन और ढेर सारी कैटेगरी, जिसमें साल में लगभग हर फिल्म को किसी ना किसी कैटेगरी में अवॉर्ड मिल ही जाता है.

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एक दिन इंटरव्यू के दौरान एक अभिनेत्री से मुलाकात हुई, अभिनेत्री ने बातों ही बातों में हंसते हुए कहा कि मेरे पास पैसे नहीं है लेकिन कुछ जुगाड़ कराकर मुझे भी अवॉर्ड दिलवा दो. इसी बहाने मेरा भी प्रोफाइल बन जाएगा. मैंने चौंकते हुए पूछा कि अवॉर्ड थोड़ी जुगाड़ से मिलता है. जवाब में अभिनेत्री ने कहा नहीं मैडम, अवॉर्ड या तो पैसे से मिल जाता है या फिर अगर आपकी जान पहचान ऊंची हो तो भी काम बन जाता है. हम नए एक्टर्स को शुरुआत में थोड़ी सेटिंग लगानी पड़ती है. जबकि बड़े एक्टर्स को तो सिर्फ़ फंक्‍शन में शिरकत करने के बदले ही सम्मान दिया जाता है.

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नसीरुद्दीन शाह ने अवॉर्ड को लेकर अपनी राय रखी.


उस समय मैंने इस बात को थोड़ा अनसुना कर दिया. लेकिन अंदर से जिज्ञासा उठी कि क्या वाकई अवॉर्ड के तमगे एक्टर्स को कई बार महज़ अवॉर्ड फ़ंक्‍शन में बुलाने और अवॉर्ड फ़ंक्‍शन को हाई लाइट करने के लिहाज से दे दिए जाते है. इसी मामले का सच खंगालने के लिए मैंने एक अवार्ड फ़ंक्‍शन ऑर्गनाइज करने वाले चैनल से जुड़े ऑर्गनाइजर से बात की. उन्होंने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि असल में फ़ंक्‍शन में ज़्यादातर फ़िल्म इंडस्ट्री के गेस्ट आते ही वही हैं जिन्हें अवॉर्ड देने का वायदा किया जाता है या फिर उनका नाम नॉमिनेशन में शामिल हो.

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उन्होंने यह भी बताया कि कई बार तो स्टार्स की टीम यह सिफ़ारिश करती है कि हम उन्हें अवॉर्ड किस कैटेगिरी में दे. स्टार्स और फ़िल्म इंडस्ट्री के लोग फ़ंक्‍शन में आने के लिए हामी ही तभी भरते हैं, जब पता होता है कि उन्हें कौन सी कैटेगिरी में नवाज़ा जाएगा. बाक़ी कई ऐसे भी स्टार्स आते हैं जिनकी फ़िल्में या तो फ़्लॉप हो गईं या फिर कई साल से पर्दे से ग़ायब हैं. ऐसे स्टार्स के लिए हमारे पास बेहतरीन डील होती है. फ़्लॉप कैटेगिरी वाले एक्टर्स के हाथों हम अवॉर्ड दिलवाते हैं. जिन फ़िल्म स्टार्स की आप स्टेज पर अवार्ड फ़ंक्‍शन में परफ़ॉरमेंस देखते हैं, होस्टिंग़ से लेकर डांस परफ़ॉरमेंस के हिसाब से स्टार्स की अलग-अलग फ़ीस होती है. महज कुछ मिनट के डांस के लिए ये लाखों में फ़ीस लेते हैं.

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राजीव खंडेलवाल ने भी अवॉर्ड पर अपनी राय रखी है.


क्यों अवॉर्ड फ़ंक्‍शन में नहीं जाते ये स्टार्स
वैसे यह बालीवुड का कटु सत्य है कि अब हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री में अवॉर्ड का कोई वजूद नहीं बचा है. शायद यही वजह है कि बहुत से कलाकारों ने अवॉर्ड फ़ंक्‍शन में शिरकत करना और दिलचस्पी लेना बंद कर दिया है. इनमें आमिर खान, अजय देवगन, नसीरुद्दीन शाह, जावेद अख़्तर समेत ऐसे कई नाम हैं जिन्हें शायद ही आपने किसी अवॉर्ड फ़ंक्‍शन में इन दिनों शिरकत करते और अवॉर्ड लेते देखा हो. बॉलीवुड स्टार आखिर अवॉर्ड को लेकर क्या सोचते हैं, मैंने ये जानने की कोशिश की.

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हाल ही मेरी मुलाक़ात राजीव खंडेलवाल से हुई थी. जब मैंने उनसे पूछा कि अवॉर्ड को लेकर आपकी क्या राय है? आपको तो कभी अवार्ड भी नहीं मिला. जवाब में हंसते हुए राजीव खंडेलवाल कहते हैं कि यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि हमारे यहां किसी अवॉर्ड का वजूद नहीं बचा है. मैं अवार्ड को गम्भीरता से नहीं लेता. अवॉर्ड और ऐसे फंक्‍शन दोनों ही आजकल सिर्फ़ एंटरटेनमेंट के लिए होते हैं. मेरी ऐसी कोई ख़्वाहिश नहीं है कि मुझे ऐसा कोई अवॉर्ड मिले.

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शेखर सुमन ने भी अवॉर्ड पर अपनी राय रखी.


अभिनेता शेखर सुमन से इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए उनकी राय पूछी तो हंसते हुए शेखर सुमन कहते हैं कि पैसा दो, अवॉर्ड लो. तुम भी पैसा देकर अवॉर्ड ले सकती हो. कई अवॉर्ड तो होते ही सिर्फ़ पैसे के लिए हैं. शेखर सुमन बातचीत को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि अवॉर्ड शो अब सम्मान का स्टेज नहीं बल्कि लोगों ने इसका बिज़नेस बना दिया है.

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नसीरुद्दीन शाह स्टारर शॉर्ट फ़िल्म हाफ़-फ़ुल की एंट्री हाल ही में ऑस्कर में भेजी गई है. मैंने नसीर साहब से पूछा कि आपके लिए कितनी मायने रखते हैं अवॉर्ड? आपकी तो यह शॉर्ट फ़िल्म ऑस्कर में भेजी गई है. क्या पता ऑस्कर मिल जाए? जवाब में तपाक से नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि देखिए मैं किसी अवॉर्ड में अब दिलचस्पी नहीं लेता. फ़िल्म की मार्केटिंग के हिसाब से अच्छा है कि फ़िल्म ऑस्कर में गई है. क्योंकि लोगों को इससे आपकी फ़िल्म के बारे में पता चलता है. लेकिन हक़ीक़त में मुझे अवॉर्ड वैगरह से ऐसा फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मेरे लिए अवॉर्ड मायने ही नहीं रखते.

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वैसे सिर्फ़ नसीरुद्दीन शाह और राजीव खंडेलवाल ही नहीं बल्कि बालीवुड में ऐसी काफ़ी हस्तियां है, जिन्होंने फ़िल्म इंडस्ट्री में लगभग हर महीने होने वाले अवॉर्ड में दिलचस्पी लेना लगभग बंद कर दिया है. अब फ़िल्म इंडस्ट्री में कला के सम्मान की जगह नेटवर्किंग और सेटिंग के साथ-साथ, पैसे ने ले ली है. लेकिन जब आर्टिस्ट की कला के सम्मान को पैसे और जुगाड़ की तराज़ू में तोला जाने लगे तो समझ लीजिए कि आर्टिस्ट की कला को उस सम्मान की ज़रूरत ही नहीं है. हम उम्मीद करते हैं कि हर मुद्दे पर बोलने वाली फ़िल्म इंडस्ट्री इस मुद्दे पर भी ग़ौर फ़रमाएगी और अवॉर्ड के मामले में बढ़ते औद्योगिकरण को रोकने की कोशिश करेगी, ताकि आर्टिस्ट की कला और उन्हें मिलने वाले सम्मान को लोग बिकाऊ नहीं बल्कि सम्मानित नज़रिये से देखें.

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First published: August 24, 2019, 5:24 AM IST
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