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महिला जूनियर आर्टिस्ट्स को साफ़-सुथरा टॉयलेट तक नहीं मिलता

महिला जूनियर आर्टिस्ट्स को साफ़-सुथरा टॉयलेट तक नहीं मिलता

ज़्यादातर सेट पर एक कॉमन टॉयलेट होता है जो बहुत गंदा रहता है.

ज़्यादातर सेट पर एक कॉमन टॉयलेट होता है जो बहुत गंदा रहता है.

संजय सुरी (Sanjay Suri) के साथ हुई एक चर्चा से मुझे सीरयल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के सेट की याद दिला दी. उस सेट की भी यही कहानी थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated :
मुंबई. फ़िल्म इंडस्ट्री बाहर से दिखने में बेहद ग्लैमरस लगती है लेकिन ग्लैमर की इस दुनिया के कई सच बहुत चौंकाने वाले भी होते है फ़िल्म और टेलिविज़न इंडस्ट्री का आज ऐसा ही एक चौंकाने वाला क़िस्सा आपके साथ सांझा कर रही हूं.

अक्सर ख़बरें आती हैं कि उस एक्टर ने फ़िल्म के लिए इतने करोड़ रुपए फ़ीस ली और प्रोडक्शन हाउस ने फ़ीस के साथ वीवीआईपी फ़ैसिलिटी एक्टर को सेट पर दी. आमतौर पर बड़े एक्टर और एक्ट्रेस के साथ साथ उनकी टीम को शूटिंग के सेट पर बढ़िया फ़ैसिलिटी प्रोडक्शन हाउस मुहैया कराता है. अगर शूटिंग आउटडोर हुई तो बढ़िया वैनिटी वैन लगाता है, जिसमें फ़ाइव स्टार के कमरे जैसी सभी सुविधा रहती है. लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी कि एक तरफ़ बड़े एक्टर के लिए इतना ताम- झाम होता है तो वहीं जूनियर एक्टर्स को सेट पर सही टॉयलेट तक नसीब नहीं होता. ख़ास तौर से महिला आर्टिस्ट को सेट पर काफ़ी दिक्कत होती है.

अभिनेता ने मानी ये बात
हाल ही में अभिनेता संजय सूरी से उनकी आने वाली फ़िल्म झलकी को लेकर मेरी मुलाक़ात हुई. ऐसे ही बातों बातों में फ़िल्म इंडस्ट्री की चर्चा शुरू हुई तो संजय ने कहा कि हम बराबरी की बात करते हैं लेकिन हक़ीक़त तो यह है कि इंसान अब इंसानियत भूलता जा रहा है. उन्होंने बताया, "मैं अक्सर देखता हूं कि शूटिंग के सेट पर स्टार कास्ट के लिए बेहतरीन मेकअप रूम या वैनिटी का इंतज़ाम होता है. महिला जूनियर आर्टिस्ट के लिए एक कॉमन टॉयलेट होता है, जिसे सेट के सभी लोग इस्तेमाल करते हैं और इस टॉयलेट की हालत ऐसी होती है कि उसमें टॉयलेट जाना मुश्किल है. लेकिन अब बेचारी जूनियर कलाकारों की मजबूरी है क्या करें. इनके लिए सेट पर किसी वैनिटी या एक सही टॉयलेट तक का इन्तजाम नहीं होता. अगर हम एक इस मुद्दे और अपने साथ काम करने वाले कलाकारों की इस परेशानी को नहीं समझ सकते तो हम देश में बदलाव कैसे ले आएंगे."

महिला जूनियर आर्टिस्ट्स को साफ़-सुथरा टॉयलेट तक नहीं मिलता
महिला जूनियर आर्टिस्ट्स को साफ़-सुथरा टॉयलेट तक नहीं मिलता


‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के सेट की यही थी हालत
हालांकि संजय सुरी के साथ हुई इस चर्चा से मुझे सीरयल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के सेट की याद दिला दी. उस सेट की भी यही कहानी थी. क़रीब तीन साल पुरानी बात है मुझे याद है कि मैं भी सेट पर मौजूद थी जब एक जूनियर महिला आर्टिस्ट की शिकायत पर जूनियर आर्टिस्ट एसोसिएशन की यूनियन ने सेट पर पहुंचकर काफ़ी हंगामा किया था और प्रोडक्शन हाउस की साफ़ हिदायत दी थी. अगर जूनियर कलाकारों का टॉयलेट ठीक नहीं किया गया तो एसोसिएशन शूटिंग रोक देगी. ख़ैर इस हंगामे के बाद राजन शाही के प्रोडक्शन हाउस के टीवी सेट पर बदलाव किए गए.

लेकिन संजय सूरी की बात आज भी सौ फ़ीसदी हक़ीक़त है आज भी यह समस्या सुलझी नहीं है और सिर्फ़ फ़िल्म इंडस्ट्री में ही नहीं बल्कि टेलिविज़न इंडस्ट्री की भी यही हालत है. टेलिविज़न स्टार्स के जहां प्रोडक्शन हाउस टीआरपी के लिए तमाम नाजों-नख़रे उठाता है तो वही सीरियल के जूनियर कलाकारों की सेट पर इतनी भी हैसियत नहीं होती कि उन्हें सेट पर एक साफ़-सुथरा टॉयलेट तक नसीब हो.

काम करना है तो सहनी पड़ती हैं ये चीजें
हाल ही में कई जूनियर महिला आर्टिस्ट से मेरी इस बारे में बात हो रही थी उनका कहना था कि अगर किसी महिला आर्टिस्ट की शिकायत पर यूनियन हंगामा कर देती है तो कुछ महीने के लिए बदलाव आ जाता है. लेकिन फिर हालत वही होती है अगर हमें किसी सीन के लिए शूट पर बुलाया जाता है तो हम वक़्त से पहले पहुंचते हैं. पूरा दिन सेट पर रहते हैं, हालांकि प्रोडक्शन की तरफ़ से चाय-नाश्ता और खाना सब टाइम पर मिलता है. लेकिन टॉयलेट को लेकर दिक्कत होती है. ज़्यादातर सेट पर एक कॉमन टॉयलेट होता है जो बहुत गंदा रहता है. उस टॉयलेट में घुसने का भी मन नहीं करता. लेकिन मजबूरी होती है तो जाना पड़ता है. अब काम करना है तो बताइए क्या करें, सब चीज़ें सहनी पड़ती हैं.

Sanjay-Suri
संजय सुरी ने मानी बात.


बाहर हल्ला मचाने से नहीं अंदर काम करने से आएगा बदलाव
कितनी अजीब सी बात है फ़िल्म और टेलिविज़न इंडस्ट्री के लोग सोशल मीडिया पर हल्ला मचाते हुए टॉयलेट से जुड़ी पचास तरह की अपील करते हुए नज़र आते है. यहां तक कि अक्षय कुमार तो टॉयलेट पर फ़िल्म तक बना चुके हैं. लेकिन अजब बात यह है कि फ़िल्मों और टीवी के ज़रिए इन मुद्दों को पर्दे पर भुना कर करोड़ों की कमाई करने वाले इन स्टार्स को अपनी ही इंडस्ट्री में महिलाओं की टॉयलेट की दिक्कत दिखाई नहीं देती. ख़ैर अक्षय कुमार और तमाम टॉयलेट से जुड़े मुद्दे पर सोशल मीडिया पर हल्ला मचाने वाले स्टार्स को मेरी सलाह है कि देश में टॉयलेट की समस्या और हालात का जायज़ा लेने से पहले एक बार एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की महिला जूनियर कलाकारों की स्थिती का संज्ञान लें. पहले उनकी सेट पर टॉयलेट की समस्या को दूर करे. देश के विकास की शुरुआत पर्दे पर और सोशल मीडिया पर बड़ी -बड़ी बात करने से नहीं बल्कि मुहिम का हिस्सा बनकर काम मरने से होगी.

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