फिल्म और टीवी इंडस्ट्री काम पर आने को तैयार, प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ने की आशंका

फिल्म और टीवी इंडस्ट्री काम पर आने को तैयार, प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ने की आशंका
फिल्म 'लक्ष्मी बॉम्ब' 22 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी.

महाराष्ट्र सरकार (Government of Maharashtra) के निर्देशों का पालन करने से फिल्म (Film) और टीवी प्रोग्राम (TV Programme) (Production) की कॉस्ट में लगभग 15 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है. ये ऐसे खर्च हैं जिन्हें विशेषज्ञ 'आवश्यक खर्च' कहते हैं.

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मुंबई. जब महाराष्ट्र सरकार (Government of Maharashtra) ने फिल्मों की शूटिंग और पोस्ट प्रोडक्शन के काम को हरी झंडी दी तो फिल्म निर्माताओं (Film Producers) और टीवी निर्माताओं ने निश्चित रूप से राहत की सांस ली, लेकिन अनुमति एक विस्तृत दिशा-निर्देश के साथ दी गई है. फिल्म इंडस्ट्री के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि सभी सावधानियों और दिशानिर्देशों का पालन करने से उत्पादन कॉस्ट में 15 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होने की संभावना है.

निर्माता भूषण कुमार कहते हैं कि, ‘यह सच है कि फिल्मों की उत्पादन कॉस्ट बढ़ने वाली है, लेकिन हमारे पास और क्या विकल्प है?’ कुमार को उम्मीद है कि जिनके पास लगभग 3-4 फिल्में हैं, जिनके पास 5-6 दिनों का पैच वर्क [शूटिंग] बाकी है, वे पूरी सावधानी बरतते हुए जुलाई में अपनी फिल्मों में काम कर सकते हैं. फिल्म 'लक्ष्मी बॉम्ब' 22 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी. लॉकडाउन के कारण यह फिल्म अभी तक रिलीज नहीं हो पाई.

कॉस्ट लंबे होंगे शेड्यूल
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेक लेने, सफाई करने और सेट को डिसइन्फेक्टेड करने जैसे दिशा-निर्देश का पालन करने पर फिल्म की कॉस्ट बढ़ जाएगी. इसका रिजल्ट यह होगा कि काम करने के दिनों में कमी आएगी जिससे शूटिंग के शेड्यूल लंबे हो जाएंगे. साथ ही, सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखने, सेटरों पर मेडिकल फैसिलिटी की व्यवस्था करने के साथ शूटिंग के लिए ट्रांसपोर्टेशन की कॉस्ट बढ़ जाएगी. विशेषज्ञों का कहना है कि इसके अलावा एक चैलेंज है, वह है तकनीकी नौकरियों जैसे कि लाइट, आर्ट, मेकअप और कॉस्ट्यूम आदि का काम करने वाले लोगों को सेट तक लाना मुश्किल होगा क्योंकि इनमें से बहुत सारे अपने होम टाउन वापस जा चुके हैं.
क्या कॉस्ट किसी की जान से बढ़कर है?


टीवी निर्माता राजन शाही भी स्वीकार करते हैं कि ‘प्रोडक्शन कॉस्ट का बढ़ना तय है, इसे कोई कम नहीं कर सकता’. मैंने इसे 'एक्स्ट्रा' कॉस्ट नहीं बल्कि 'नेसेसरी' कॉस्ट कहा है और इस नेसेसरी कॉस्ट का जो भी प्रतिशत होगा वह कुल कॉस्ट का एक हिस्सा होगा. वे कहते हैं, आखिरकार, यह लोगों की सुरक्षा के लिए है. ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने कहा, 'हां, प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ जाएगी, लेकिन क्या यह किसी की जान से बढ़कर है? सेफ्टी और सरवाइवल सबसे महत्वपूर्ण है.

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