सिंबा
4/5
पर्दे पर : 28 दिसंबर 2018
डायरेक्टर : रोहित शेट्टी
संगीत : बादशाह, तनिष्क बागची
कलाकार : रणवीर सिंह, सारा अली खान, सोनू सूद, आशुतोष राणा, सिद्धार्थ जाधव
शैली : एक्शन-ड्रामा
यूजर रेटिंग :
0/5
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Simmba Movie Review : जीरो नहीं हीरो है 'सिंबा', देखना तो बनता है

'सिंबा' एक पूरा पैकेज है रणवीर सिंह के लिए जिसमें उन्होंने एक्शन किया है, रोमांस किया है, हंसाया है और कुछ हद तक आंखें नाम की है.

फर्स्टपोस्ट.कॉम
Updated: December 28, 2018, 2:21 PM IST
Simmba Movie Review : जीरो नहीं हीरो है 'सिंबा', देखना तो बनता है
फिल्म 'सिंबा' में रणवीर सिंह
फर्स्टपोस्ट.कॉम
Updated: December 28, 2018, 2:21 PM IST
ये महज संयोग है कि साल की पहली सुपरहिट फिल्म का सेहरा रणवीर सिंह के सर पर बंधा था और अब साल के आखिर में भी वो एक सुपरहिट देकर 2018 की विदाई शानदार तरीके से करने वाले है. गनीमत थी कि साल की आखिरी फिल्म का सेहरा शाहरुख खान की 'जीरो' के हाथ नहीं लगा. रोहित शेट्टी सबसे आखिर में बैटिंग करने आए और चौके छक्कों की बारिश कर डाली. जी हां सिम्बा से साल का अंत काफी सुखद ढंग से होगा. रोहित शेट्टी की सिम्बा बहुत ही सूझबूझ के साथ बनाई गयी एक बेहद ही मसालेदार और चतुर फिल्म है जिसको देखने में आपको काफी मजा आएगा.

इसी फिल्म से रणवीर सिंह ने अपने वरसेटाईल होने का भी सबूत दे दिया है. रणवीर सिंह ने अपने करियर में अब तक सिम्बा के पहले जो भी फिल्में की है उनमें मसालों की तड़क- भड़क नहीं थी यानी की 'गुंडे' और 'किल दिल' सरीखी फिल्मों को आउट एंड आउट मसाला नहीं कहा जा सकता है लेकिन सिम्बा से उन्होंने बता दिया है की अलाउद्दीन खिलजी, बाजीराव और कबीर मेहरा बनने के साथ साथ उनके अंदर एक भ्रष्ट पुलिस इंस्पेक्टर बनने की भी कूबत है. एक बात और, इस स्पेस को इसके पहले सलमान खान ने अपने दबंग सीरिज़ से इस पर कब्जा बनाये हुए था लेकिन रणवीर सिंह उनसे एक कदम आगे निकला गए है.

सिम्बा की कहानी एक भ्रष्ट पुलिस अफसर की है जिसकी दुनिया उसकी मुंह बोली बहन के बलात्कार के बाद हिल जाती है

फिल्म की कहानी पुलिस इंस्पेक्टर संग्राम भालेराव (रणवीर सिंह) की है जो एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी है. जब उसका तबादला गोवा के मीरामार पुलिस चौकी में हो जाता है तो उसको यही सलाह मिलती है की वो वहा सब कुछ कर सकता है सिवाए वहां के बाहुबली और अवैध कारोबार में लिप्त दूर्वा रानाडे (सोनू सूद) को छेड़ने के अलावा. पुलिस चौकी के सामने ही शगुन (सारा अली खान) अपना टिफिन सर्विस चलाती है और जब भालेराव की निगाहें उससे मिलती है तो उसे पहली ही नजर में प्यार हो जाता है. जब भालेराव की मुंह बोली बहन अदिति, दूर्वा रानाडे के दो भाइयों के ड्रग्स के धंधे के कारोबार को बेनकाब करने की कोशिश करती है तब उसका अंत उसके बलात्कार और आखिर में उसकी मौत से होता है. इसके बाद भालेराव का जमीर जाग उठता है और वो इंसाफ की डगर पर निकल जाता है. जब उससे लगता है कि शायद उसकी मुंह बोली बहन को इंसाफ नसीब नहीं हो पायेगा तब वो एक चाल चलकर दुर्वा के दोनों भाइयों को एक पुलिस एनकाउंटर में सफाया कर देता. एस आई टी का गठन होता है जिसकी जांच बाजीराव सिंघम (अजय देवगन) करता है और आगे चल कर वो भालेराव को अदालत के सामने क्लीन चिट दे देता है.

रोहित शेट्टी ने बड़े ही संजीदे मुद्दे को अपनी फिल्म का विषय वस्तु बनाया है
नुक्स निकालने के नाम पर आप कई चीजों की ओर आप अपनी उंगली दिखा सकते है. लेकिन ये भी सच है की आप सिनेमा हाल में बैठ कर रोहित शेट्टी की फिल्म देख रहे है ना की किसी और निर्देशक की फिल्म. गुंडों की फौज जब पुलिस चौकी में आकर एक मोबाईल फोन को हथियाने की कोशिश करती है तब अकेले भालेराव उनके होश ठिकाने ले आता है जो बेहद ही फिल्मी है. इसके अलावा जब अदिति अस्पताल में होती है और डॉक्टर यह कहती है की उसका डी एन ए सैंपल तक लेना मुश्किल है तब आपके चेहरे पर हंसी ही आती है. ऐसे और भी कई मौके है फिल्म मे लेकिन इस फिल्म को एन्जॉय करने के लिए आपको ये सारी चीजें दरकिनार करनी पड़ेगी. जब भालेराव शगुन के दोस्त को देख कर जलता है या फिर अपने असिस्टेंट मोहिले के साथ शराब पीता है और उटपटांग बातें करता है तब आपको हंसी आती है. इस फिल्म ने ये जता दिया है की रोहित शेट्टी का कद मसाला फिल्मों के बेताज बादशाह निर्देशक मनमोहन देसाई के बराबर ही है.

सिम्बा रणवीर सिंह के बहुमुखी प्रतिभा को शो केस करती है
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यह फिल्म रणवीर सिंह के बहुमुखी प्रतिभा को ही शो केस करती है. सिम्बा एक पूरा पैकेज है रणवीर सिंह के लिए जिसमें उन्होंने एक्शन किया है, रोमांस किया है, हंसाया है और कुछ हद तक आंखें नाम की है. भालेराव के रूप में वो पूरी तरह से जंचे हैं. मुमकिन है की आगे चलकर भविष्य मे और भी सिम्बा के वर्सन्स आएंगे और उसमें उनका निखार और भी दिखाई देगा. सारा अली खान के लिए कुछ ज्यादा नहीं है फिल्म में करने को लेकिन जब भी वो सीन्स में नजर आती है उनका आत्मविश्वास पूरी तरह से दिखाई देता है. सपोर्टिंग रोल्स में आशुतोष राणा और सोनू सूद ने अपनी अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है. रही बात रोहित शेट्टी के बारे में तो उनको देख कर यही लगता है की फिल्म बनाने से पहले वो पूरी फिल्म को अपने दिमाग में देख लेते है. मनोरंजन और एक कहानी के बीच किस तरह का सामंजस्य होना चाहिए यह कोई उनसे सीखें. रोहित शेट्टी के पकड़ पूरी फिल्म में कही से भी ढीली नहीं दिखाई देती है.

रोहित शेट्टी आज के जमाने के मनमोहन देसाई है
इस फिल्म का विषय वस्तु एक बेहद ही संजीदा विषय है और आयें दिन देश में हो रहे बलात्कार की घटनाओं को लेकर अब देश का एक आम नागरिक इससे पुरी तरह से घृणा करने लगा है खासकर के निर्भया काण्ड के बाद. सिम्बा जन-मानस के रेप के प्रति गुस्से को उजागर करती है. जिस तरह से बलात्कारियों को फिल्म में सजा मिलती है वो दरअसल लोगों की मानसिकता को दर्शाती है कि ऐसे लोगो की सजा तुरंत होनी चाहिए ना कि उनको कोर्ट के चक्कर लगाने का मौका मिलना चाहिए. रोहित शेट्टी ने एक बेहद ही संजीदे विषय को सिम्बा में सारे मनोरंजन के मसाले मार कर जनता के सामने परोसा है. खाना लजीज है इसमें कोई संदेह नहीं है. सिम्बा का एकमात्र उद्देश्य है लोगों का मनोरंजन करना और इसमें वो पूरी तरह से सफल रही है. इस फिल्म को किसी और लेंस से नहीं देखा जाना चाहिए. 'जीरो' से जो लोग निराश हुए थे, उसकी पूरी भरपाई साल की यह आखिरी फिल्म कर देगी. और हां रोहित शेट्टी की अगली पुलिस ड्रामा का नायक कौन होगा इसकी झलक आपको सिम्बा के आखिर में मिल जायेगी. अरे भाई अगला पुलिसवाला वाला भी एक सुपरस्टार ही है.

डिटेल्ड रेटिंग

कहानी :
3.5/5
स्क्रिनप्ल :
3.5/5
डायरेक्शन :
4/5
संगीत :
3.5/5
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