वो डायरेक्टर जिसकी हर फिल्म के हीरो का नाम 'प्रेम' था

बॉलीवुड एक्टर सलमान खान.
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान.

चाहे 1994 में आई 'हम आपने हैं कौन' हो, 1999 की 'हम साथ साथ हैं' हो, 2003 में आई 'मैं प्रेम की दीवानी' हो, या 2006 में आई 'विवाह' हो, प्रेम हर फिल्म में नजर आया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 24, 2019, 4:47 AM IST
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बॉलीवुड में राजश्री प्रोडक्शन यानी लंबी स्टारकास्ट, घरेलू माहौल, गाने, डांस, सेलिब्रेशन, रोमांस और सूरज बड़जात्या. 80 और 90 के दशक में पारिवारिक फिल्में और राजश्री प्रोडक्शन एक दूसरे के पर्याय थे. लेकिन ऐसा नहीं था कि पूरे परिवार के साथ बैठकर देखी जाने वाली ये फिल्में कमर्शियल रूप से पिट गई हों. बल्कि इसके उलट ये सभी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर कमाल का बिजनेस करने वाली फिल्में बनीं, साथ ही अभी भी टीवी पर इनके आने से दर्शकों का वीकेंड बन जाता है. और ऐसी फिल्मों का पूरा श्रेय जाता है डायरेक्टर सूरज बड़जात्या को.

ताराचंद बड़जात्या के पोते सूरज को फिल्में बनाने का कीड़ा कम उम्र में ही लग गया था. इसकी वजह थी घर का माहौल और परिवार के लोगों का मार्गदर्शन. दादाजी के कहने पर सूरज ने डायरेक्शन की दुनिया में कदम रखा और अपनी पहली ही फिल्म से तहलका मचा दिया. यह फिल्म थी 1989 में आई फिल्म 'मैंने प्यार किया'. इस फिल्म से बॉलीवुड को जहां सलमान खान के रूप में एक सितारा मिला, वहीं 24 साल की उम्र में ही मेगा ब्लाकबस्टर फेने वाला निर्देशक भी.

फिल्म 'मैंने प्यार किया' की कास्टिंग की खाने भी बहुत दिलचस्प है. सलमान खान अब तक बॉलीवुड में एक फिल्म पुराने थे. फाहरुख शेख और रेखा के साथ वो 'बीवी हो तो ऐसी' में एक साइड किरदार निभा चुके थे. लेकिन एक सोलो हीरो के रूप में उनकी शुरुआत नहीं हुई थी. वहीं सूरज बड़जात्या अपनी आने वाली फिल्म 'मैंने प्यार किया' में भाग्यश्री के लिए एक 'प्रेम' खोज रहे थे. सलमान खान इस फिल्म के ऑडिशन के लिए आए, लेकिन रिजेक्ट हो गए.



दरअसल सूरज इस फिल्म में विंदु दारासिंह या पियूष मिश्रा को 'प्रेम' बनाना चाहते थे. जी हां, बिग बॉस के विजेता रहे विंदु दारासिंह और 'एक बगल में चाँद होगा' फेम पियूष मिश्रा. लेकिन सलमान के पिता सलीम खान के रिक्वेस्ट करने पर सलमान को दूसरी बार ऑडिशन के लिए बुलाया गया. बस, इस ऑडिशन में सूरज को नजर आ गया कि उनका प्रेम यही है. इस तरह से सलमान ने एक सोलो एक्टर के रूप में और सूरज ने एक डायरेक्टर ने रूप में एक साथ डेब्यू किया था. यह फिल्म मेगा ब्लॉकबस्टर बनी और 80 के दशक में सबसे अधिक कमाई करने वाली टॉप 10 फिल्मों में गिनीं जाती है.
इसके बाद तो सलमान, सूरज और 'प्रेम' का रिश्ता अमर हो गया. अपने करियर में सूरज ने महज 7 फिल्में ही डायरेक्ट कीं. लेकिन ताज्जुब की बात तो यह है कि हर फिल्म में हीरो का नाम 'प्रेम' ही रहा. चाहे 1994 में आई 'हम आपने हैं कौन' हो, 1999 की 'हम साथ साथ हैं' हो, 2003 में आई 'मैं प्रेम की दीवानी' हो, या 2006 में आई 'विवाह' हो, प्रेम हर फिल्म में नजर आया.

साल 2015 में सलमान और सूरज की जोड़ी एक बार फिर पर्दे पर नजर आई, 'प्रेम रतन धन पायो' में. इस फिल्म में भी सलमान खान प्रेम नाम के किरदार में ही थे. इसमें उनके साथ सोनम कपूर थीं. यह फिल्म भी एक कमर्शियल हिट साबित हुई.

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