क्यों खामोश हो गए दुनिया भर को हंसाने वाले राजेंद्र नाथ

ढीली हाफ पैंट, सिर पर हैट और किसी बौड़म जैसे हाव भाव वाले पोपट लाल ने एक जमाने में फिल्मी दर्शकों को खूब हंसाया, लेकिन अब उन्हें शायद ही कोई याद करता हो।
ढीली हाफ पैंट, सिर पर हैट और किसी बौड़म जैसे हाव भाव वाले पोपट लाल ने एक जमाने में फिल्मी दर्शकों को खूब हंसाया, लेकिन अब उन्हें शायद ही कोई याद करता हो।

ढीली हाफ पैंट, सिर पर हैट और किसी बौड़म जैसे हाव भाव वाले पोपट लाल ने एक जमाने में फिल्मी दर्शकों को खूब हंसाया, लेकिन अब उन्हें शायद ही कोई याद करता हो।

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नई दिल्ली। ढीली हाफ पैंट, सिर पर हैट और किसी बौड़म जैसे हाव भाव वाले पोपट लाल ने एक जमाने में फिल्मी दर्शकों को खूब हंसाया, लेकिन अब उन्हें शायद ही कोई याद करता हो। दरअसल रूपहले पर्दे की यही सच्चाई है जब तक पर्दे पर नजर आते रहो बस तभी तक लोग याद रखते हैं।

पोपट लाल यानी राजेंद्र नाथ ने 1961 में बनी फिल्म 'जब जब फूल खिले' में पोपट लाल का किरदार निभाया था। वह किरदार इतना हिट हुआ कि लोग उन्हें राजेंद्र नाथ की जगह पोपट लाल के नाम से याद करने लगे।

राजेंद्र नाथ का परिवार पेशावर का रहने वाला था। आजादी से पहले उनके पिता मध्य प्रदेश की रीवा स्टेट में पुलिस आधिकारी होकर आए और आईजी के रूप में रिटायर हुए।



राजेंद्र नाथ के सात भाई और चार बहने थीं। पिता के रिटायर होने के बाद उनका परिवार जबलपुर आ गया। पृथ्वी राजकपूर से उनके परिवार के बेहद घनिष्ट संबंध थे यहां तक की राजकपूर से राजेंद्र नाथ की बहन कृष्णा की शादी भी हुई। इस शादी के बाद राजेंद्र नाथ के भाइयों ने फिल्मों में भविष्य तलाशना शुरू किया सबसे पहले राजेंद्र नाथ के बड़े भाई प्रेम नाथ मुंबई पहुंचे। उन्हें पृथ्वी थियेटर में काम मिल गया। जब उन्होंने फ़िल्मों में भी पैर जमा लिए तो उन्होंने राजेंद्र नाथ को अपने पास बुला लिया।
राजेंद्र भी पृथ्वी थियेटर से जुड़ गए, लेकिन वो अपने भविष्य को लेकर गंभीर नहीं थे क्योंकि रहने खाने का इंतजाम प्रेमनाथ के जिम्मे था। एक दिन प्रेम नाथ ने उन्हें सख़्त चेतावनी दी कि वे गंभीर हो जाएं और अपने खर्चे खुद उठाएं। प्रेमनाथ के इस रवैये ने राजेंद्र नाथ को अचानक गंभीर बना दिया। उन्होंने फ़िल्मों में काम खोजने के लिये भाग दौड़ शुरू की और तब उन्हें पता चला कि संघर्ष किसे कहते हैं।

पहली फ़िल्म मिली अशोक कुमार अभीनीत 'वचन, जिसमें उनकी बहुत छोटी सी भूमिका थी। इसके बाद 'बेगम और बादशाह', 'गुलाम' सहित कुछ फिल्मों में उन्हें छोटी छोटी भूमिकाएं मिलीं तो उनका हैसला बढ़ने लगा। प्रेम नाथ को यह देख कर बहुत सुकून हुआ और उन्होंने राजेंद्र नाथ को हीरो बनने के लिये प्रेरित करना शुरू किया, लेकिन राजेंद्र नाथ को कोई भी हीरो के रूप में काम देने पर तैयार नहीं था। कहीं से काम मिलता न देख प्रेमनाथ ने खुद राजेंद्र नाथ को अपनी फ़िल्म 'गोलकुंडा का क़ैदी' में साइड हीरो का रोल दिया।

1954 में रिलीज हुई यह फिल्म फ़्लॉप हो गयी। साथ ही राजेंद्र नाथ का हीरो बनने का जोश ठंडा पड़ गया। इसके बाद पांच साल तक राजेंद्र नाथ काम की तलाश में भटकते रहे और बीच बीच में छोटे मोट रोल करते रहे। यह इत्तेफाक था कि एक दिन आईएस जौहर से हुई मुलाकात ने उनकी गाड़ी को पटरी पर ला दिया। 1959 में जौहर एक फिल्म बना रहे थे 'हम सब चोर हैं'। इस फिल्म के लिए उन्होंने राजेंद्र नाथ को हास्य भूमिका दी।

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फिल्म रिलीज हुई तो राजेंद्र नाथ के काम की भरपूर तारीफ हुई। जौहर ने राजेंद्र नाथ को अपनी अलगी फ़िल्म नरगिस प्रदीप कुमार अभीनीत 'मिस इंडिया' में मौक़ा दिया। साथ ही एचएस रवैल ने अपनी फ़िल्म 'शरारत' में काम दिया दोनों फिल्में सफल रहीं। इन सफलताओं से राजेंद्र नाथ फिल्मी दुनिया में हास्य अभिनेता के रूप में स्थापित होने लगे।

लेकिन राजेंद्र नाथ को स्टार कॉमेडियन का झंडा उठाना था, इसका मौका मिला उन्हें फ़िल्म 'दिल देके देखो' में। इस फिल्म के बाद राजेंद्र नाथ की ज़िंदगी में एक बड़ा बदलाव यह आया कि पहले उन्हें काम मांगने जाना पड़ता था अब काम ख़ुद उनके पास आने लगा। फिर आयी 1961 में नासिर हुसैन निर्देशित फ़िल्म 'जब प्यार किसी से होता है'। इसमें राजेंद्र नाथ ने पोपट लाल के रूप में अभिनय किया।

अजीब कपड़े पहने बेहद बौड़म इंसान के रूप में राजेंद्र नाथ को बहुत प्रशंसा मिली। नासिर का हास्य बोध बहुत अच्छा था उन्होंने राजेंद्र नाथ से इतना ज़बर्दस्त काम लिया कि पोपट लाल, राजेंद्र नाथ के नाम से जुड़ गया। यही नहीं उनको ऑफर मिले कि वो पोपट लाल के रूप में स्टेज शो करें। ऐसे शोज़ को अपार लोकप्रियता मिलने लगी।

पोपट लाल शो में राजेंद्र नाथ खास अंदाज़ में स्टेज पर चुटकुले सुनाते और मिमिक्री करते। उनके शो यूरोप और अमेरिका में धूम मचाने लगे। फ़िल्म इंडस्ट्री में राजेंद्र नाथ का सिक्का जम गया। 1969 में उन्होंने गुलशन कृपलानी से शादी कर ली। फ़िल्मों में राजेंद्र नाथ की व्यस्तता बढ़ती गयी। लेकिन तभी एक कार दुर्घटना में वो बुरी तरह ज़ख्मी हो गए। लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े रहने की वजह से उन्हें फ़िल्मों में काम मिलना कम हो गया। फिर भी उन्होंने पंजाबी, भोजपुरी और दक्षिण भारतीय फ़िल्मों में भी काम किया।

महमूद, जानी वॉकर, मुकरी, केश्टो मुखर्जी जैसे दिग्गज हास्य अभिनेताओं के दौर में राजेंद्र नाथ ने अपनी मेहनत से अलग स्थान बना लिया। 1974 में उन्हें फ़िल्म बनाने की सूझी। बरसों से इंडस्ट्री में काम करने के बावजूद उन्हें लोगों को पहचानना नही आया था। इसके अलावा उन्होंने अभिनय के अलावा कभी फ़िल्म निर्माण की बरीकियों पर ध्यान ही नहीं दिया था। उन्हें तो अपनी साख और संबंधों पर भरोसा था। रणधीर कपूर और नीतू सिंह को लेकर उन्होंने फ़िल्म 'ग्रेट क्रैशर' शुरू की, लेकिन जल्द ही राजेंद्र नाथ भारी कर्ज़ें में डूब गए। उसी दौर में हास्य अभिनेताओं के लिये फ़िल्मों में स्थान कम होना शुरू हो गया था।

कर्ज निपटाने के लिये उन्हें जी तोड़ मेहनत करनी पड़ी फिर भी कर्ज़ नहीं निपट रहा था। ऐसे आड़े समय में बड़े भाई प्रेम नाथ ने फिर साथ दिया। निर्माता बनने के सपने ने राजेंद्र नाथ को बुरी तरह तोड़ दिया। कुछ दिनों बाद राजेंद्र नाथ ने फ़िल्मों में अमिनय की दूसरी पारी शुरू की। राजकपूर की 'प्रेम रोग' और 'बीवी ओ बीवी' में अहम भूमिकाएं निभाईं। इस दौरान उनके छोटे भाई खलनायक नरेंद्र नाथ की मौत हो गयी। नरेंद्र को वो बहुत प्यार करते थे।

उनकी मौत के बाद राजेंद्र नाथ की दुनिया से जी उचाट हो गया। उन्होंने फ़िल्मों में काम करना लगभग बंद कर दिया। तब तक फ़िल्मी दुनिया भी बहुत बदल चुकी थी। लेकिन पोपट लाल शो की लोकप्रियता कम नहीं हुई थी। उन पर ये शो करने का दबाव बना ही रहता था। इसलिये वो दुनिया भर में घूम घूम कर पोपट लाल शो करते रहे। नब्बे के दशक में काजोल की पहली फ़िल्म 'बेख़ुदी' और नीलम अभीनीत 'सौदा' राजेंद्र नाथ की अंतिम फ़िल्में थीं। अभिनय की अंतिम पारी उन्होंने 'हम पांच' धारावाहिक में पूरी की।

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राजेंद्र नाथ ने सबसे अधिक प्रभावशाली रोल अपने गहरे दोस्त शम्मी कपूर के साथ किये। जानवर,जवां मोहबब्त, तुम हसीं मैं जवां, जैसी कई फ़िल्में राजेंद्रनाथ के करियर में मील का पत्थर साबित हुईं। शम्मी से उनकी दोस्ती पृथ्वी थियेटर में काम करने के दौर में हुई और आखिर तक कायम रही। इसके अलावा दरबारा स्कूल रीवा के अपने सहपाठी कांग्रेस नेता अर्जुन सिंह से भी उनके रिश्ते बने रहे। कॉमेडियन के रोल का सारा श्रेय लेखकों के देने वाले राजेंद्र नाथ दुखी होकर बताते थे कि जबसे कॉमेडिन की जगह हीरो को दे दी गयी हास्य अभिनेताओं के पास काम ही नहीं बचा।

एक बेटी और एक बेटे के बाप राजेंद्र नाथ कई साल से अपना ज़्यादातर समय घर पर ही बिता रहे थे। कुछ समय से उन्हें सांस लेने में तकलीफ़ होने लगी थी। 175 से ज्यादा फ़िल्मों में काम करने वाले इस अभिनेता ने 13 फ़रवरी 2008 को जब मुंबई में अंतिम सांस ली तो उनकी मौत अहम खबर तक नहीं बन सकी।

 
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