OTT प्लेटफार्म्स नियंत्रित करने के लिए याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट.
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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने नेटफिलिक्स (Netflix) और एमेजॉन प्राइम (Amazon Prime) जैसे ओटीटी प्लेटफार्म्स (OTT Platforms) को नियंत्रित करने के लिए दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को केन्द्र सरकार (Central Government) को नोटिस जारी किया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 16, 2020, 10:46 AM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने नेटफिलिक्स (Netflix) और एमेजॉन प्राइम (Amazon Prime) जैसे ओटीटी प्लेटफार्म्स (OTT Platforms) को नियंत्रित करने के लिए दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया. इस याचिका में इन प्लेटफार्म को नियंत्रित करने के लिए एक स्वायत्त संस्था बनाने का अनुरोध किया गया है.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने याचिका पर केन्द्र सरकार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting) और इंटरनेट तथा मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किए.

नेटफिलिक्स और एमेजॉन प्राइम जैसे ओटीटी प्लेटफार्म्स को नियंत्रित करने के लिए अधिवक्ता शशांक शेखर झा और अपूर्व अर्हटिया ने जनहित याचिका दायर की है. याचिका में विभिन्न ओटीटी-स्ट्रीमिंग और डिजिटल मीडिया प्लेटफार्म्स की सामग्री की निगरानी और प्रबंधन के लिए सुव्यवस्थित बोर्ड या एसोसिएशन की आवश्यकता पर जोर दिया गया है.



बगैर मंजूरी के फिल्म को प्रदर्शित करने का मिल गया है रास्ता
याचिका में कहा गया है कि कोविड-19 की वजह से अभी देश में सिनेमाघर जल्दी खुलने की उम्मीद नहीं है और ओटीटी-स्ट्रीमिंग और विभिन्न डिजिटल मीडिया प्लेटफार्म्स ने फिल्म निर्माताओं और कलाकारों को किसी प्रकार की मंजूरी के बगैर ही इसे प्रदर्शित करने का रास्ता दे दिया है.



याचिका के अनुसार, इस समय डिजिटल सामग्री की निगरानी या प्रबंधन के लिये कोई कानून या स्वायत्त संस्था नहीं है और यह बगैर किसी जांच परख के जनता के लिए उपलब्ध है. ओटीटी-स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म (OTT-Streaming Platform) को नियंत्रित करने के लिए कोई कानून नहीं होने की वजह से हर दिन इसी आधार पर कोई न कोई मामला दायर हो रहा है. कानून में इस तरह की खामियों की वजह से सरकार को रोजाना जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है लेकिन इसके बावजूद संबंधित प्राधिकारियों ने इसे नियंत्रित करने के लिए कुछ खास नहीं किया है.
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