सुशांत केस: बिहार सरकार ने SC में बताया, महाराष्ट्र ने राजनीतिक दबाव के कारण FIR दर्ज नहीं की

सुशांत केस: बिहार सरकार ने SC में बताया, महाराष्ट्र ने राजनीतिक दबाव के कारण FIR दर्ज नहीं की
सुशांत सिंह राजपूत

सुशांत सिंह राजपूत केस (Sushant Singh Rajput Case) में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार और रिया चक्रवर्ती (Riya Chakraborty) की ओर से लिखित दलील दाखिल की गई.

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नई दिल्ली. बिहार सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में कहा कि महाराष्ट्र पुलिस ने राजनीतिक दबाव के कारण ही सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की आत्महत्या के मामले में न तो एफआईआर (FIR) दर्ज की और न ही बिहार पुलिस (Bihar Police) की जांच में सहयोग दिया. अदालत के निर्देशानुसार बिहार सरकार और रिया चक्रवर्ती ने इस मामले में अपने लिखित अभिवेदन (Written Submissions) दाखिल किए.

दरअसल, अदालत ने पटना में दर्ज मामला मुंबई स्थानांतरित करने के लिए एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती की याचिका पर सुनवाई पूरी करते हुए बिहार और महाराष्ट्र सरकार के साथ ही राजपूत के पिता और रिया को तीन दिन के भीतर अपने लिखित अभिवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया था.

रिया चक्रवर्ती ने अपने लिखित दलील में कहा है कि बिहार पुलिस के कहने पर पटना में दर्ज मामला सीबीआई को सौंपने की सिफारिश करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर था. बता दें कि पटना में दर्ज कराई गई एफआईआर में राजपूत के पिता ने रिया और उसके परिवार के सदस्यों सहित छह अन्य लोगों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं.



बिहार सरकार ने की रिया की याचिका खारिज करने की मांग
बिहार सरकार ने अपने वकील केशव मोहन के माध्यम से दाखिल अभिवेदन में कहा, ''यह साफ है कि महाराष्ट्र में राजनीतिक दबाव की वजह से ही मुंबई पुलिस ने न तो प्राथमिकी दर्ज की और न ही उन्होंने इस मामले की तेजी से जांच करने में बिहार पुलिस को किसी प्रकार का सहयोग दिया.'' इसमें कहा गया है कि ऐसी स्थिति में रिया की स्थानांतरण याचिका खारिज करने या उसका निस्तारण करने के अलावा कुछ और करने की आवश्यकता नहीं है. इसमें कहा गया है, ''पेश मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुये सीबीआई की जांच में किसी भी प्रकार के व्यवधान की अनुमति नहीं दी जाये और उसे अपनी जांच तेजी से पूरी करने दिया जाए.''

बिहार में की जा रही जांच पूरी तरह से गैरकानूनी: रिया
दूसरी ओर, रिया चक्रवर्ती ने कहा है कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने या इसे स्थानांतरित करने का बिहार को कोई अधिकार नहीं था. रिया के अनुसार, ''बिहार में की जा रही जांच पूरी तरह से गैरकानूनी है और ऐसी गैरकानूनी कार्यवाही गैरकानूनी शासकीय आदेशों से सीबीआई को स्थानांतरित नहीं की जा सकती. अगर शीर्ष अदालत संविधान के अनुच्छेद 142 में प्रदत्त अधिकार का इस्तेमाल करके इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपती हैं तो याचिकाकर्ता को कोई आपत्ति नहीं है.''

रिया ने कानूनी प्रावधानों पर जोर देते हुये कहा है कि उसकी स्थानांतरण याचिका विचार योग्य है. उसने कहा है कि प्राथमिकी को पढ़ने से पता चलता है कि अपराध का कोई भी हिस्सा बिहार में नहीं हुआ. प्राथमिकी में भी आरोप लगाया गया है कि सब कुछ मुंबई में हुआ और पटना का जिक्र सिर्फ इसलिए है क्योंकि शिकायतकर्ता का घर पटना में है. रिया का तर्क है कि ज्यादा से ज्यादा इस मामले में जीरो प्राथमिकी दर्ज करनी होगी और उसे मुंबई के उस थाने को भेजना होगा, जिसके अधिकार क्षेत्र की घटना है. चक्रवर्ती ने अपने लिखित अभिवेदन में कहा कि बिहार पुलिस के आदेश पर जांच का जिम्मा सीबीआई को स्थानांतरित किया जाना अधिकार क्षेत्र में नहीं आता.

हालांकि, बिहार सरकार ने कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा है कि उसे ऐसा करने का अधिकार था क्योंकि अपराध की कुछ परिणति उसके अधिकार क्षेत्र में हुई है. राज्य सरकार का कहना है, ''मुंबई पुलिस दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 174-175 के तहत तहकीकात की कार्यवाही ही कर रही है. इस कार्यवाही का मकसद सिर्फ मौत के कारण का पता लगाना है.''

सुप्रीम कोर्ट ने 5 अगस्त को सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी कि सुशांत सिंह राजपूत एक प्रतिभाशाली होनहार कलाकार थे और उनकी मृत्यु के कारणों की सच्चाई सामने आनी ही चाहिए.
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