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'तांडव' के निर्माताओं को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, गिरफ्तारी पर रोक लगाने से किया इनकार

तांडव' का एक सीन.
तांडव' का एक सीन.

वेब सीरीज 'तांडव (Tandav)' को लेकर बवाल खत्म ही नहीं हो रहा. सीरीज के निर्देशक अली अब्बास जफर और अन्य के खिलाफ विभिन्न राज्यों में कई आपराधिक शिकायतें दर्ज की गई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 27, 2021, 6:12 PM IST
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नई दिल्ली. अमेजन प्राइम की वेब सीरीज 'तांडव (Tandav)' को लेकर बवाल खत्म ही नहीं हो रहा. सीरीज के निर्देशक अली अब्बास जफर और अन्य के खिलाफ विभिन्न राज्यों में कई आपराधिक शिकायतें दर्ज की गई. इन्हें रद्द करने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट (SUPREME COURT) में आज यानी बुधवार को सुनवाई होनी थी.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सुनवाई में न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने प्राथमिकी के खिलाफ याचिकाओं पर कहा कि जिन राज्यों में एफआईआर हुई है, वहीं जांच होने दीजिए, इसमें परेशानी क्या है? इस पर सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने अमेजन प्राइम की ओर से कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता मुंबई का रहने वाला है, वो छह अलग-अलग राज्यों में कैसे मुकदमा लड़ेगा? ऐसे में अदालत सभी राज्यों में दर्ज एफआईआर क्लब कर दे और मुंबई ट्रांसफर कर दें. वकील ने एम एफ हुसैन समेत अन्य मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया.

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपको ऐसी एक्टिंग और स्क्रिप्ट नहीं बनानी चाहिए, जिससे लोगों की भावनाएं आहत हों. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपने अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर की है एफआईआर को लेकर, इस पर हम किस आधार पर सुनवाई करें. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम एफआईआर को क्लब करने कि मांग पर विचार करेंगे. साथ ही अंतरिम प्रोटेक्शन भी देने से मना कर दिया और गिरफ्तारी पर रोक का आदेश देने से भी इनकार कर दिया. बता दें, अब 4 हफ्ते बाद अगली सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा- इस राहत के लिए हाईकोर्ट जाएं.



गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने लखनऊ, ग्रेटर नोएडा और शाहजहांपुर में तीन प्राथिमकी दर्ज की थी. वहीं, इसी तरह की अन्य प्राथमिकी भी वेब सीरीज (WEB SERIES) से संबंधित लोगों के खिलाफ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में दर्ज की गई थी. याचिकाओं में विभिन्न राज्य सरकारों और पुलिस अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है. वेब सीरीज पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने को लेकर टीम के खिलाफ लखनऊ में भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं और सूचना प्रौद्योगिक अधिनियम की संबद्ध धाराओं के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी. हालांकि, इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने इन चारों को ट्रांजिट अग्रिम जमानत दे दी थी.
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