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फिल्में जो मीरा नायर को बनाती हैं खास

मीरा नायर
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मीरा नायर के जन्मदिन पर जानिए उनकी टॉप फिल्मों के बारे में.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 15, 2017, 7:23 AM IST
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मीरा नायर. इंडियन अमेरिकन फिल्म मेकर. आज कल न्यूयॉर्क में रहती हैं. फिल्मी दुनिया में ऐसा नाम जिससे शायद अनुराग कश्यप और राम गोपाल वर्मा जैसे डायरेक्टर्स भी प्रेरित होते हों. आज की जेनरेशन अनुराग कश्यप की कल्ट फिल्मों की फैन है. लेकिन इस जेनरेशन को मीरा नायर जैसी डायरेक्टर के काम के बारे में कम ही मालूम होगा. जब तक मुझे यह कहानी लिखने को नहीं दी गई तब तक मैं मीरा नायर को बहुत अच्छे से नहीं जानती थी.

आज जब ऑस्कर जीतने वाली फिल्मों का इतना क्रेज है, तो ऐसे में मीरा नायर के बारे में पढ़ा जाना चाहिए.

वो मीरा नायर जिन्होंने 'सलाम बॉम्बे' जैसी फिल्म बनाई. ना सिर्फ इस फिल्म को नेशनल अवार्ड मिला बल्कि यह भारत की पहली ऐसी फिल्म है जिसे अकादमी अवार्ड्स के लिए नॉमिनेट किया गया.



आज मीरा का जन्मदिन है. इसलिए आज उनकी अवॉर्ड विनिंग फिल्मों के बारे में जानेंगे जो कहीं ना कहीं भारतीय सिनेमा के लिए गर्व का विषय है.
दिल्ली विश्वविद्यालय से हार्वर्ड विश्विद्यालय तक :

ओडिशा में एक आईएएस के घर जन्मी मीरा की बेसिक पढ़ाई शिमला में हुई. उसके बाद उन्होंने दिल्ली युनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस कॉलेज से सोशियोलॉजी में ग्रेजुएशन की. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर हार्वर्ड पहुंची. पहले मीरा एक एक्ट्रेस बनना चाहती थीं. लेकिन बाद में एक्टिंग छोड़ कर डायरेक्शन में आ गईं. उन्होंने एक से बढ़कर एक बेहतरीन डॉक्युमेंट्री बनाईं.

2012 में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है.

सलाम बॉम्बे (1988 ):

मीरा नायर की पहली फीचर फिल्म 'सलाम बॉम्बे' थी. फिल्म 1988 में बॉम्बे शहर की सड़कों पर घूमने वाले बच्चों पर बनाई गई थी. मीरा की डेब्यू फिल्म को ही बेस्ट फीचर फिल्म के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला. कान्स फिल्म फेस्टिवल में ऑडियंस अवॉर्ड मिला. इस फिल्म को न्यूयॉर्क टाइम्स ने '1000 सबसे बेहतरीन फिल्मों' की लिस्ट में शामिल किया. कुल मिलाकर फिल्म ने नौ अवॉर्ड जीते.

सलाम बॉम्बे


फिल्म में रघुवीर यादव, नाना पाटेकर और इरफान खान भी थे. फिल्म में जो बच्चे दिखाए गए थे उनमें से ज्यादातर बच्चे असल जिंदगी में भी सड़कों पर ही रह रहे थे. फिल्म बनने के बाद मीरा ने 'सलाम बालक ट्रस्ट' नाम की एक संस्था बनाकर इन बच्चों की मदद भी की.

कामसूत्र (1996):

वाजिदा तब्बसुम द्वारा लिखी गई लघु कथा 'उतरन' पर आधारित यह फिल्म बहुत सारे विवादों की जड़ बनी. रेखा, इंदिरा वर्मा और नवीन एंड्रयुज़ इस फिल्म में मेन रोल में थे. फिल्म का टाइटल भारतीय काम शास्त्र की किताब 'कामसूत्र' से लिया गया है. मीरा इस फिल्म निर्माता निर्देशक और लेखिका रही हैं.

कामसूत्र


फिल्म को कान्स फिल्म फेस्टिवल में भी दिखाया गया. 1998 में फिल्म को बेस्ट सिनेमेटोग्राफी के लिए Declan Quinn अवार्ड भी मिला. हालांकि ये विवादित फ़िल्म भारत के कई हिस्सों में रिलीज़ नहीं हो पाई थी और इसे क्रिटिक्स ने भी नहीं सराहा था.

मानसून वेडिंग (2001):

सबरीना धवन द्वारा लिखी गई यह फिल्म दिल्ली में हुई एक पंजाबी शादी के रोमांटिक एलिमेंट्स दिखाती है. इस फिल्म को गोल्डन लायन प्राइज मिला. जो कि वेनिस फिल्म फेस्टिवल का हाईएस्ट प्राइज अवार्ड माना जाता है. मीरा नायर इस अवार्ड को जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. इससे पहले सत्यजीत रे को 'अपराजितो' के लिए यह अवार्ड मिल चुका था.

मानसून वेडिंग


फिल्म की कास्ट में नसीरुद्दीन शाह, रजत कपूर और रणदीप हुड्डा जैसे एक्टर्स थे.

वैनिटी फेयर (2004 ):

2004 में बनी यह ब्रिटिश अमेरिकन हिस्टोरिकल फिल्म मीरा नायर द्वारा ही डायरेक्ट की गई थी. इस फिल्म की कहानी विलियम मेकपीस ठाकरे के प्रसिद्ध नॉवेल 'नॉवेल ऑफ दि सेम नेम'' से ली गई है.
हालांकि इस नॉवेल पर कई टीवी सीरीज और फिल्में बनाई जा चुकी हैं. लेकिन मीरा नायर ने इसके मेन केरैक्टर बैकी शार्प को कुछ अलग तरह से दिखाने की कोशिश की. यह बात इसे बाकी फिल्मों से अलग बनाती है.

वैनिटी फेयर


यही वजह थी कि इस फिल्म को 2004 के वेनिस फिल्म फेस्टिवल के गोल्डन लायन अवार्ड के लिए नॉमिनेट किया गया.

दि नेमसेक (2006 ):

जुम्पा लहरी के नॉवेल 'दि नेमसेक' से इंस्पायर्ड इस फिल्म को अमेरिकन क्रिटिक्स तक ने सराहा था. इस फिल्म में तब्बू और इरफान खान लीड रोल में थे. ये रोल पहले रानी मुखर्जी और अभिषेक बच्चन के लिए सोचे गए थे. लेकिन किन्हीं वजहों से इरफान और तब्बू के पास चले गए.

दि नेमसेक


फिल्म की कहानी अशोक और आशिमा गांगुली की परेशानियों को पर्दे पर दिखाती है, जो वेस्ट बंगाल से यूएस शिफ्ट हुए हैं. फिल्म की शूटिंग कोलकाता और न्यूयॉर्क शहरों में हुई थी.

क्वीन ऑफ कातवे (2016) :

इस फिल्म की कहानी एक युगांडियन लड़की की है जिसकी जिंदगी चैस का गेम सीखने के बाद एक दम से बदल जाती है. जब मीरा को 'क्वीन ऑफ कातवे' को डायरेक्ट करने का ऑफर मिला था तो उन्होंने बिना सोचे समझे हां कह दी थी.

क्वीन ऑफ कातवे


उनका कहना है कि उन्हें असाधारण लोगों की कहानियां आकर्षित करती हैं. उन्होंने इस फिल्म को डायरेक्ट करने का कारण यह भी बताया कि इसकी कहानी उनके घर कंपाला से जुड़ी हुई है. साथ ही यह फिल्म अफ्रीकी महाद्वीप के दूसरे पहलू को भी दिखाती है.

फिल्म में शतरंज खिलाड़ी का रोल मदिना नलवंगा ने किया है. इस फिल्म में ऑस्कर पुरस्कार विजेता लुपिता न्यांग के साथ-साथ डेविड वायेलोवो भी अहम भूमिकाओं में हैं.

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