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एसडी बर्मन ने नीरज को फेल करना चाहा था पर खुद फेल हो गये थे!

गोपाल दास नीरज 93 की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए

गोपाल दास नीरज 93 की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए

बर्मन ने नीरज को बताया था कि वे एक गाना चाहते हैं जो रंगीला शब्द से शुरू हो. इस तरह से रंगीला रे तेरे रंग में का जन्म ह ...अधिक पढ़ें

    हिंदी की मशहूर कवि और गीतकार नीरज कुमार ने  93 की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया. उन्होंने दिल्ली के एम्स अस्पताल में गुरुवार शाम करीब साढ़े सात बजे आखिरी सांस ली. 'ऐ भाई जरा देख के चलो...', 'रंगीला रे...', 'लिखे जो खत तुझे...', 'दिल आज शायर है..' जैसे सदाबहार गीतों के जरिए नीरज संगीत प्रेमियों के दिलों में हमेशा रहेंगे... 

    हमारे दौर में हिंदी साहित्य को लोगों के बीच ले गये हैं कुमार विश्वास. राजनीति में आने के बाद से तो नहीं कह सकते पर उसके पहले तक उनके गीत लोगों की जबान पर हुआ करते थे. लेकिन उन्होंने जिनकी जगह ली थी वह थे गीतकार नीरज. एक दौर में नीरज  के गीत लोगों की जुबां पर हुआ करते थे. नीरज से पहले ऐसा कारनामा जिसने किया था, वे थे महानायक अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंशराय बच्चन. लेकिन न हरिवंशराय बच्चन ने फिल्मों के लिये गीत लिखे और न कुमार विश्वास ने. बल्कि कुमार विश्वास ने प्रयास भी किया पर वे सफल न हो सके. नीरज अब हमारे बीच नहीं हैं. हम उनके बेहतरीन काम को याद कर रहे हैं और आपको बताने जा रहे हैं नीरज का फिल्मी गीतों से जुड़े रहने का किस्सा. इसकी शुरुआत करवाई थी देवानंद ने. दरअसल, देवानंद ने नीरज को पहली बार मुंबई में एक कवि सम्मेलन में सुना था. उन्होंने नीरज से कहा, मुझे यह भाषा पसंद आई. किसी दिन हम साथ मे काम करेंगे. फिर कभी 60 के दशक के अंत में जब नीरज को पता चला कि देवानंद 'प्रेम पुजारी' नाम की एक फिल्म बनाने जा रहे हैं तो नीरज ने उन्हें एक खत लिखा. और उनके वादे की याद दिलाई. देवानंद ने उन्हें मुंबई बुलाया. उनके आने पर, देवानंद ने उन्हें 1000 रुपये दिए और उनसे कहा, "मैं कल आपको अपने म्यूजिक डायरेक्टर एसडी बर्मन के पास ले चलूंगा."

    अगले दिन जब वे एसडी बर्मन के पास पहुंचे, तो बर्मन ने नीरज को बताया कि वे एक गाना चाहते हैं जो 'रंगीला' शब्द से शुरू हो. इस तरह से 'रंगीला रे तेरे रंग में...' का जन्म हुआ. बर्मन, जिन्हें लोग प्यार से 'दादा' कहा करते थे, उन्हें नीरज के गीत की दिल छू लेने वाली पंक्तियां बहुत पसंद आई थीं. नीरज याद करते हैं कि एसडी बर्मन ने बाद में उन्हें खुद बताया था, "मैंने तुम्हें फेल करने के लिये एक कठिन धुन दी थी लेकिन तुमने मुझे ही यह बेहतरीन गीत देकर फेल कर दिया." सुनिये यह गाना -

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    70 का दशक बर्मन और नीरज की इस जोड़ी के दिये अनेक बेहतरीन गीतों का गवाह बना. जिसमें 'शर्मीली', 'गैम्बलर' और 'तेरे मेरे सपने के' गीत शामिल थे. नीरज बताते हैं कि रोज सवेरे 9 बजे वे बर्मन के ऑफिस पहुंच जाते थे. नीरज कहते हैं कि उनके साथ काम करते हुये वे वक्त को भूल ही जाते थे. नीरज एक किस्सा सुनाते हैं कि एक रोज वे देर से पहुंचे. बर्मन दा के हाथ तेजी से किसी धुन पर चल रहे थे और उनकी आंखें एक दीवार पर टिकी हुई थीं. मैंने उन्हें नमस्ते बोला लेकिन उन्होंने मुझे शांत रहने के लिये कहा. मैं समझ नहीं पाया कि वे क्या कह रहे हैं और मैंने उन्हें फिर से नमस्ते किया. दादा गाते रहे और मुझसे कहा, आ रही है, आ रही है, शांत रहो. बाद में मैं समझा कि वे एक धुन को सुधार कर सटीक बना रहे थे. वे अपने काम को लेकर बेहद डेडिकेटेड थे.

    एसडी बर्मन को नहीं चाहिये थे शमा, शराब, परवाना और इश्क
    नीरज बर्मन दा के काम करने के तरीके को आज भी याद करते हैं. नीरज बताते हैं कि एसडी बर्मन ने नीरज से शमा, परवाना, शराब, तमन्ना, जानेमन, जान और इश्क जैसे शब्दों का यूज बंद करने को कहा. ऐसे में नीरज ने उन्हें अपने गीतों में बगिया, मधुर, गीतांजलि, माला, धागा जैसे शब्दों का प्रयोग करना शुरू किया. नीरज बताते हैं कि कि बर्मन प्रयोग करने में बेहतरीन थे. जैसे वे अंतरा पहले कर देते थे और मुखड़ा बाद में. साथ ही कई सारे वाद्ययंत्रों का उन्होंने पहली बार हिंदी गानों में यूज किया. एक इंटरव्यू में नीरज यह भी कहते हैं कि सोचिये बिना उनके हमारा म्यूजिक कितना गरीब होता? बानगी देखिये -

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    जब नीरज ने ही बताई अपने गाने की धुन
    नीरज ने शंकर-जयकिशन के साथ भी काम किया है. और 'लिखे जो खत तुझे...' और 'आदमी हूं आदमी से प्यार करता हूं...' जैसे बेहतरीन गाने दिये. जब नीरज ने शंकर-जयकिशन के लिये फिल्म 'मेरा नाम जोकर' (1970) में 'ए भाई जरा देख के चलो...' गाना लिखा तो उन्होंने नीरज से कहा कि इसका म्यूजिक देना तो नामुमकिन है. क्योंकि इसमें कोई मुखड़ा नहीं है. ऐसे में नीरज ने खुद अपनी धुन म्यूजिक डायरेक्टर्स को सुझाई. शंकर-जयकिशन को नीरज की धुन क्लिक कर गई और इस तरह से यह गाना बना. सुनिये -

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    आखिरी तक देवानंद नीरज के टच में रहे
    नीरज 94 वसंत देख चुके हैं. लेकिन अभी भी उनमें काव्य और रस बाकी है. उनके आस-पास कई लोग रहते हैं और आज भी उनसे मिलने, उनके अनुभव जानने आते रहते हैं. पिछली उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें कैबिनेट मंत्री के दर्जा भी दिया था. नीरज बताते हैं कि देवानंद भी आखिरी वक्त तक उनके टच में थे. हालांकि नीरज ने एसडी बर्मन के गुजरने और शंकर-जयकिशन के दौर के खत्म होने के बाद फिल्मों के लिये गीत लिखने बंद कर दिये थे. कारण था कि नये संगीतकार नीरज के साथ वैसा सामंजस्य नहीं बिठा पा रहे थे. बहरहाल तब तक हिंदी सिनेमा को नीरज ने कई अनमोल नगीने दे दिये थे. सुनिये उनमें से एक -

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    Tags: Bollywood, Dev anand, Gopaldas Neeraj, S.D. Burman, Trivia, Trivia Cinema

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