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Trivia : जब गाने के लिए पंचम दा ने उतरवा दी गिटारिस्ट की शर्ट

गिलास-चम्मच हो या फिर चाबियां सबसे पंचम दा ने म्यूजिक बनाया है. पढ़िये किन-किन गानों में यूज हुआ है उनका ऐसा म्यूजिक?

    देव आनंद और जीनत अमान स्टारर फिल्म 'डार्लिंग डार्लिंग' (1977) में आरडी बर्मन का एक गाना था 'रात गई बात गई.' इस गाने के बीच में जो म्यूजिक आता है, कतई पारंपरिक नहीं है. उस वक्त गाने में स्क्रीन पर जीनत अमान अपने शरीर पर थपकी देकर म्यूजिक देती दिख रही हैं. और वाकई पंचम दा ने इस गाने का म्यूजिक ऐसे ही दिया था. वाकई उन्होंने अपने एक म्यूजिशियन अमृतराव काटकर की पीठ पर यह धुन बजाई थी. अमृतराव पंचम दा की टीम में 'रेसो' (एक तरह का गिटार) बजाया करते थे.

    गाने की रिकॉर्डिंग के वक्त जब पंचम दा ने अमृतराव को शर्ट उतारने को कहा था. इसे सुनकर अमृतराव काटकर चौंक गये. उन्हें शर्म भी आ रही थी. पर उन्होंने शर्ट उतारी जिसके बाद पंचम दा ने एक लैटिन अमेरिकी धुन उनकी पीठ पर बजा दी. एक माइक्रोफोन के जरिये उन्होंने इस धुन को रिकॉर्ड कर लिया. एक ही टेक में गाना रिकॉर्ड हो गया और इसे फिल्म में यूज कर लिया गया. सुनिये इस गाने के 2:22 मिनट पर-

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    इन गानों में भी दिखा है पंचम दा के फोले म्यूजिक का जलवा
    आरडी बर्मेनिया (पंचमेमॉयर्स) नाम की किताब लिखने वाले चैतन्य पादुकोण बताते हैं कि पंचम दा नेचुरल म्यूजिक के मुरीद थे. उन्हें रोजमर्रा की चीजों के जरिये म्यूजिक क्रिएट करने का चस्का था. वैसे बताते चलें कि इस रोजमर्रा की चीजों से म्यूजिक क्रिएट करने के तरीके को 'फोले' कहा जाता है. पंचम दा इसी तरीके से मजेदार साउंड और धुनें अपनी फिल्मों में बनाया करते थे. जिन्हें स्क्रीन पर भी वैसे ही दिखाया जाता था.

    'यादों की बारात' (1973) फिल्म में 'चुरा लिया है तुमने...' गाने की शुरुआत में गिलास और चम्मच की जो धुन सुनाई देती है, उसे सच में भी गिलास को चम्मच से बजाकर ही रिकॉर्ड किया गया था. सुनिये-

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    'अगर तुम न होते' (1983) फिल्म में 'धीरे धीरे ज़रा ज़रा...' गाने में जो धुन रेखा ने स्क्रीन पर कमर में बंधे कमरबंद से निकाली है यह धुन पंचम दा ने चाबियों के जरिये रिकॉर्ड की थी. शुरुआती तीस सेकेंड के बाद वीडियो देखें-

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    आरडी विदेशी गानों से भी इंस्पायर हुये लेकिन ईमानदार रहे
    पंचम दा विदेशी गानों से अपने कुछ गानों की धुनें मिलने पर कहा करते थे कि मेरी तालीम इंडियन क्लासिकल की हुई है, न कि वेस्टर्न या जैज़ की. वे इसको चोरी नहीं मानते थे, वे मानते थे कि वे उन गानों से इंस्पायर हैं.

    'महबूबा महबूबा' की धुन 'से यू लव मी' से मिलती है. उनके तीन मशहूर गानों की बात करते हैं, जिनकी धुनें विदेशी गानों से मिलती हैं. ऐसे ही 'मिल गया हमको साथी मिल गया...' गाने का मुखड़ा ABBA के 'माम्मा मिया' गाने के गिटार इंट्रो से मिलता है. हालांकि चैतन्य के मुताबिक इस धुन को लेने का प्रोड्यूसर की ओर से दबाव था. इसका कारण ये भी था कि तब बॉलीवुड खुद तक ही सीमित एक इंडस्ट्री थी और प्रोड्यूसर को ऐसे किसी काम से कानूनी एक्शन का ख़तरा नहीं रहता था. सुनिये गीत 'से यू लव मी...'-

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    पर पादुकोण मानते हैं कि पंचम दा इसी बात में खास थे कि वे इंस्पायर होने के बाद गाने को अपना बना लिया करते थे. मसलन 'चुरा लिया है तुमने जो दिल को' गाने को लिया जाये तो वो 'इफ इट्स ट्यूसडे, दिस मस्ट बी बेल्जियम' गाने से मिलता था. शुरुआत तो लगभग एक सी ही है पर फिर पंचम दा गाने को अपना लेते हैं और इतने उतार-चढ़ाव और परतें उसमें जुड़ जाती हैं कि गाना उनका अपना हो जाता है. यही कारण है कि पंचम जीनियस थे. वैसे उनके जीनियस होने पर इससे भी विश्वास किया जा सकता है कि एक बार पंचम दा ने चैतन्य पादुकोण से यह भी कहा था कि 'हरे रामा हरे कृष्णा' (1971) का गाना 'कांचा रे कांचा रे...' उन्होंने सपने में ही पूरा कंपोज कर लिया था. सुनिये 'इफ इट्स ट्यूसडे, दिस मस्ट बी बेल्जियम...'

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    यह भी पढ़ें : वो समय जब 'पंचम दा' के पास भी नहीं था काम !

    Tags: Amitabh bachchan, Bollywood, Parveen babi, R d burman

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