अशोक कुमार की वो 20 बातें, जो आपको मालूम नहीं होंगी

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: October 13, 2017, 4:50 PM IST
अशोक कुमार की वो 20 बातें, जो आपको मालूम नहीं होंगी
अशोक कुमार
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: October 13, 2017, 4:50 PM IST
अशोक कुमार एक्टर बनना नहीं चाहते थे और बन गए बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार. उनकी बहुत सी बातें ऐसी हैं, जो उन्हें तमाम अभिनेताओं से अलग करती हैं. वह एक्टर थे. एस्ट्रोलॉजर थे. पेंटर थे. अच्छे शतरंज खिलाड़ी थे. होम्योपैथी के जबरदस्त जानकार. बाद के बरसों में उन्होंने क्लिनिक खोलकर तमाम लोगों का इलाज भी किया.

1. नहीं बनना चाहते थे एक्टर

किस्मत भी अजीब चीज होती है. अशोक कुमार एक्टर नहीं बनना चाहते थे, किसी भी हालत में नहीं. एक्टिंग और एक्टर्स से उन्हें नफरत थी. लेकिन किस्मत देखिए, जिसने उन्हें न केवल एक्टर बनाया बल्कि उन्हें भारतीय सिनेमा का पहला सुपरस्टार भी बना दिया.

2. जर्मनी जाकर इंजीनियरिंग पढ़ना चाहते थे

अशोक कुमार जर्मनी जाकर एक टेक्नॉलाजी में उच्च शिक्षा लेना चाहते थे. इलाहाबाद विश्व विद्यालय से बीएससी करने के बाद उन्होंने कोलकाता से कानून की पढ़ाई जरूर की लेकिन वह टेक्नॉलॉजी में ही नाम ऊंचा करना चाहते थे. उन दिनों बड़ी मशीनें और टेक्नॉलाजी की दुनिया में जर्मनी का दबदबा था. लिहाजा मुंबई आए ताकि फिल्म लाइन में काम कर रहे अपने बहनोई शशधर मुखर्जी की मदद से जर्मनी जा सकें. शशधर उन दिनों साउंड इंजीनियरिंग के महारथी माने जाते थे.

अशोक कुमार


3. स्क्रीन टेस्ट में फेल हो गए थे

अशोक कुमार को हिमांशु राय द्वारा लाए गए जर्मन निर्देशक फ्रांस आस्टिन ने स्क्रीन टेस्ट में फेल कर दिया था. उसका मानना था कहा- वह कहीं से एक्टर बनने लायक नहीं हैं. आस्टिन के हिसाब से उनका जबड़ा चौकोर था. पर्सनालिटी में भी वो बात नहीं थी. खुद अशोक भी हीरो बनना नहीं चाहते थे लेकिन हिमांशु उन्हें हीरो बनाने पर अड़ गए.

4. राजेंद्र प्रसाद थे रूममेट

कोलकाता विश्व विद्यालय में जब अशोक कुमार कानून की पढ़ाई कर रहे थे तो राजेंद्र प्रसाद और रविशंकर शुक्ल कॉलेज हास्टल में उनके रूम पार्टनर थे. राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति बने तो रविशंकर शुक्ल मध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री.

अशोक कुमार


5. पहले सुपर स्टार

अशोक कुमार की एक्टिंग धीरे धीरे निखरी. शुरुआती 16 फिल्में साधारण थीं लेकिन फिल्म किस्मत ने सबकुछ बदल दिया. उसमें वह एंटी हीरो की इमेज में थे. इसमें वह जेबकतरे बने थे. इसमें उनका डबल रोल था. ये फिल्म सुपर-डुपर हिट साबित हुई. विशुद्ध कमाई थी एक करोड़ रुपए, जो आजकल के लिहाज से 650 करोड़ के बराबर थी. हिन्दी सिनेमा में इस फिल्म के साथ ही पहले सुपर स्टार का जन्म हुआ.

6. नहीं हो रही थी शादी

फिल्मी दुनिया में होने के कारण बहुत से परिवारों ने अशोक कुमार के साथ शादी का प्रस्ताव ठुकरा दिया. जब एक अच्छे परिवार से शादी का रिश्ता टूटा तो उनकी मां रोने लगी. उन्होंने जिद पकड़ ली कि अशोक को फिल्म से निकालकर वापस खंडवा लाया जाए. अशोक कुमार के पिता मशहूर वकील थे. उनका अपना रूतबा था. वह सीधे नागपुर पहुंचे. मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ला से मिले. उनसे अपने बेटे को नौकरी देने का अनुरोध किया. मुख्यमंत्री ने उन्हें दो पोस्ट ऑफर कीं - चैयरमैन (इनकम टैक्स डिपार्टमेंट) और दूसरी पोस्ट थी पोस्टल इंस्पेक्टर. हालांकि बाद में अवसर ऐसे बने कि नौकरी करने की नौबत ही नहीं आई.

7. पिता ने पसंद की थी लड़की

मां ने जो लडक़ी पसंद कर रखी थी, वह ज्य़ादा पढ़ी-लिखी नहीं थी. शादी से पहले अशोक कुमार ने लडक़ी देखी भी नहीं थी. पिता ने घर बुलाकर कहा -लड़की पसंद कर ली गई है. अब उन्हें शादी करनी है. पिता से अशोक कुमार वाकई बहुत डरते थे. इसलिए ना करने का सवाल ही नहीं था. छह महीने तक शादी का मुहुर्त नहीं था. लिहाजा उन्हें लड़की दिखाने के अगले ही दिन तुरंत मुहुर्त निकाल कर उनकी शादी कर दी गई. शादी में महज पांच बराती गए.

8. पत्नी से डरते थे

शोभा गांगुली पूरी तरह से हाउस वाइफ थीं. घर के सारे काम वह खुद करती थीं. परंपरागत बंगाली साड़ी पहनती थीं. साड़ी के एक ओर कई चाबियों का छल्ला खोंसकर लगा होता था. घर में उनका अनुशासन गजब का था. शोभा साधारण चेहरे-मोहरे की गंभीर महिला थीं. अशोक कुमार काफ़ी हद तक उनके रोब में भी रहे.

अशोक कुमार और मधुबाला


9. अशोक कुमार और रोमांस

मशहूर कहानीकार सादत हसन मंटो ने अपने संस्मरण में देविका और अशोक के संबंधों के बारे में लिखा. देविका रानी उनके साथ रोमांटिक रिश्ते बढ़ाना चाहती थीं, लेकिन अशोक कुमार प्रोफेशनल रिश्तों से कतई आगे नहीं बढ़ना चाहते थे. एक बार देविका ने अशोक कुमार के सामने साफ-साफ प्रेम प्रस्ताव रख दिया. अशोक ने साफ कहा-वह तो उन्हें उस नजर से देखतेे ही नहीं, उनका रिश्ता तो विशुद्ध काम का है. ये सुनकर देविका का चेहरा फक पड़ गया, वह सकपका गईं. तुरंत बाद संभाली कि वह तो मजाक कर रही थीं. बाद में नलिनी जयवंत सिंह के साथ अशोक कुमार के रोमांस के चर्चे जरूर उड़े लेकिन समय के साथ खत्म हो गए.

10. तब किशोर ने गाना सुनाकर संभाला

जब शोभा गांगुली का निधन हुआ तो अशोक कुमार काफी डिस्टर्ब थे. ऐसे में छोटे भाई किशोर कुमार ने उन्हें संभाला. वह दो घंटे तक गाना गाकर उन्हें संभालते रहे, तब जाकर अशोक कुमार की व्याकुलता कम हो पाई.

11. पहला रैप सॉन्ग गाया

बहुत से लोगों को लगता होगा कि भारत में रैप म्युजिक को लाने वाले बाबा सहगल हैं. नहीं, ये श्रेय भी अशोक कुमार को दिया जाना चाहिए. उनका गाया ये रैप सांग था-रेल गाड़ी रुक रुक रुक. शुरू में अशोक कुमार ने इसको गाने से मना कर दिया. तो डायरेक्टर ने उनसे कहा कि नहीं आप इसे गाइए तो सही. अशोक कुमार की नजर में ये मूर्खता थी, लेकिन क्या करते. गाना शुरू किया. जो मन में आया गाने में जोड़ते चले. बाद में जब ये गाना रिकार्ड हो गया तो डायरेक्टर ने दावा किया कि ये बहुत हिट होगा और वाकई ऐसा ही हुआ.

12. लता को चॉकलेट खिलाकर गवाया

अशोक कुमार को पता लगा कि मंगेशकर बहनें काफी अच्छा गाती हैं. लता की उम्र 13-14 साल की थी. आशा उनसे भी छोटी थीं. रिकार्डिंग शुरू हुई. रिकार्डिंग के दौरान कई बार रिटेक करना पड़ा. दोनों बहनों का उत्साह बना रहे, इसलिए अशोक कुमार ने उन्हें चॉकलेट खिला-खिलाकर गवाया. फिर इन दोनों बहनों का गाया गाना ..दीप बगैर कैसे परवाने जल रहे हैं...इतना हिट हुआ कि मंगेशकर बहनें भी हिट हो गईं.

मीणा कुमारी और शशिकला के साथ अशोक कुमार


13. देव आनंद को दिया सहारा

सदाबहार देव आनंद के करियर को सफल मोड़ देने वाले अशोक कुमार ही थे. देवआनंद की पहली फिल्म फ्लॉप हो चुकी थी. कोई उन्हें दोबारा फिल्म में लेने को तैयार नहीं था. 'जिद्दी' फिल्म की शुरुआत होने वाली थी. सबकुछ तय हो चुका था. जब वह बॉम्बे टॉकीज के ऑफिस से निकले तो बाहर देव आनंद को बैठा पाया. देव उन्हें देखते ही उठ खड़े हुए. उनसे 'जिद्दी' फिल्म में एक मौका देने का अनुरोध करने लगे. अशोक ने तब फिल्म के डायरेक्टर से कहा-तुम जो रोल मुझको दे रहे थे, वह रोल बाहर बैठे नौजवान को दे दो, वह ज्यादा बेहतर तरीके से कर लेगा. डायरेक्टर अवाक, एेसा एक्टर वह पहली बार देख रहा था, जो अपना शानदार रोल किसी और को देने की बात कर रहा था. उन्होंने इसी फिल्म में अपने लिए दूसरा रोल ले लिया. ये फिल्म हिट रही. इसके जरिए ही देवआनंद को नया जीवन मिला.

14. बाद में चलाने लगे होम्योपैथी क्लिनिक

बाद के बरसों में जब अशोक कुमार ने फिल्मों में काम करना लगभग बंद कर दिया था, तब वह नियमित रूप से होम्योपैथी की प्रैक्टिस में रम गए. उनकी क्लिनिक में खासी भीड़ लगती थी. वह खुशी-खुशी सबका इलाज करते थे. उनके पास कैंसर जैसे रोगी भी आते थे. उन्होंने कई को ठीक भी किया.

15. लड़की का पैर कटने से बचाया

अशोक कुमार के पास एक १४ साल की ऐसी लडक़ी का केस आया, जिसे पोलियो और गैंग्रीन था. सर्जन ने पैर का हिस्सा काटने के लिए कह दिया था. लडक़ी का पिता अशोक कुमार के पास आया. अशोक कुमार ने उसे चार दवाइयां दीं. तीन दिन के अंदर उस लडक़ी के पैर का कालापन दूर होना शुरू हो गया. अशोक ने फिर रिस्क लेते हुए आपरेशन से एक दिन पहले उसे अस्पताल से रिलीज करा लिया. डॉक्टर ने चेतावनी लेकिन उन्होंने उसकी परवाह नहीं की, अगले छह महीनों में उन्होंने उस लडक़ी का पोलियो और गैग्रीन दोनों ठीक कर दिया.

16. कई फिल्मी सितारों का भी इलाज किया

उन्होंने मीना कुमारी का इलाज किया था लेकिन मीना कुमारी ने जब परहेज करना छोड़ दिया तो दादामुनि ने उनका इलाज करना भी छोड़ दिया. इसी तरह मनोज कुमार पेट के रोग से त्रस्त थे. आपरेशन की नौबत आ गई थी. लंदन जाने की तैयारी कर रहे थे. किसी ने सलाह दी कि अशोक कुमार को दिखा लो जरूर ठीक हो जाओगे. दादामुनि ने कुछ दवाआें और पथ्य द्वारा उनका इलाज़ किया, वह बग़ैर ऑपरेशन के ठीक हो गए.

अशोक कुमार


17. गजब के पेंटर

अशोक कुमार पेंटर भी थे. ये शौक उन्हें 1966 में पहले हार्ट अटैक के बाद पड़ा. काफी समय बिस्तर पर पड़े पड़े वह बोर हो गए. उनके अभिनेता दोस्त इफ्तिखार ने उनसे कहा कि आप पेंटिंग क्यों नहीं करते. अशोक कुमार ने कहा-मैने तो कभी चित्र बनाए ही नहीं. इफ्तिखार पर कोई असर नहीं पड़ा. वह बाजार गए. चित्रकारी का सारा सामान खरीद लाए. बोले - अब आपके जो मन में आए बनाते जाइए. अशोक कुमार चित्र बनाने लगे. बाद में इतने रमे कि ये उनके जुनून में शामिल हो गया. इसमें भी वह पूरी तल्लीनता से लग गए. उन्होंने कई चित्र बनाए. सुबह सात से दस बजे तक वह खुद को बाथरूम में बंद कर लेते थे. ये समय उनकी चित्रकारी का होता था. कोई इस समय उनको डिस्टर्ब नहीं कर सकता था.

18. एस्ट्रोलॉजी में पारंगत

एस्ट्रोलॉजी में भी दादामुनि की गजब की रुचि थी. दस साल तक उन्होंने जिज्ञासु छात्र की तरह इसका अध्ययन किया था. इसके लिए खूब संस्कृत पढ़नी पड़ी. इसके बाद उन्होंने पुराने दुर्लभ ग्रंथ बांचे. ज्योतिष के प्रकांड विद्वानों से मिले. उन्होंने यही कहा- मैं मानता हूं कि ज्योतिष एक विज्ञान है. उनका तर्क था कि पूरा संसार क्योंकि चुंबकीय है, इसलिए नक्षत्रों का असर शरीर और मन पर पड़ता है. खाली समय में वह अपने दोस्तों की कुंडलियां देख लिया करते थे. हार्स रेसिंग वह एस्ट्रोलॉजी की मदद से दांव लगाते थे और जीतते थे. रेस से थोड़ी पहले वह पत्नी से खास घोड़े के लिए टिकट खरीदने के लिए कहते. रेस खत्म होने के बाद उनकी पत्नी दोबारा विंडो पर जा रही होतीं जीत का पैसा लेने के लिए.

19. मैंने नया क्या किया है?

एक बार अशोक कुमार ये जानने के पीछे पड़ गये कि अब तक उन्होंने जितने संवाद फिल्मों में बोले हैं, उनमें कॉमन शब्द कितने हैं. अपनी मेमोरी के आधार पर एक लिस्ट भी बना डाली. पता लगा कि कुल सात सौ शब्द कॉमन हैं. कहने लगे-बताओ मैने नया क्या किया है. ले-देकर वही एक जैसे रोल और घुमा-फिराकर वही सात सौ शब्द.

20. ये भी वही कर सकते हैं

उनके निधन के बाद उनकी बिल्डिंग के वॉचमैन ने उन्हें याद करते हुए कहा- बाद के सालों में वह अपनी कोई पुरानी फिल्म लगा देते थे. सबको साथ लेकर देखने बैठ जाते. अगर उनके किसी सीन ताली बजाई जाती या वो सीन उन्हें पसंद नहीं आता, तो वह तुरंत कहते कि अगर मुझको इस सीन को दोबारा करने का मौका मिलता तो मैं उसको यूं करता..और सबके सामने फिर से एक्टिंग करके भी दिखाते.

ये भी पढ़ें :

देविका रानी की एक गलती और बन गए हीरो
First published: October 13, 2017
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर