विकास बहल पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली पीड़िता ने सीलबंद लिफाफे में हाईकोर्ट को भेजा जवाब

विकास बहल

विकास बहल पर साल 2015 में बनी फिल्म 'बॉम्बे वेलवेट' के प्रमोशन के दौरान एक महिला क्रू मेंबर के साथ बदतमीजी और छेड़-छाड़ करने का आरोप लगा है.

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    डायरेक्टर विकास बहल द्वारा दायर किए गए मानहानि मामले में एक नया मोड़ सामने आया है. मीटू अभियान के तहत डायरेक्टर विकास बहल पर आरोप लगाने वाली पीड़िता ने बॉम्बे हाई कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में अपना जवाब दायर किया है.  पीड़िता ने कोर्ट से कहा है कि मैं अपने आरोपो पर कायम हूं, पर मुझे इस केस से बाहर रखें. मुझे इस से आगे कोई करवाई करने की इच्छा नहीं है.


    इस पर हाई कोर्ट ने पीड़िता को ताकीद दी है कि इस विषय में अगर भविष्य में कोई केस दायर हुआ, तो क़ानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार रहें. साथ ही कोर्ट ने कहा कि मामले में जब फैसला सुनाया जाएगा, तो सभी पार्टियों को कोर्ट में मौजूद रहना होगा. 


    बता दें कि विकास बहल पर साल 2015 में बनी फिल्म 'बॉम्बे वेलवेट' के प्रमोशन के दौरान एक महिला क्रू मेंबर के साथ बदतमीजी और छेड़-छाड़ करने का आरोप लगा है.  फैंटम फिल्म्स में विकास के पार्टनर रहे अनुराग कश्यप और विक्रमादित्य मोटवानी ने भी इस बात को सच बताया था. इसके बाद विकास बहल ने अपने पूर्व पार्टनर्स अनुराग कश्यप, विक्रमादित्य मोटवानी औऱ मधु मंटेना पर छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए इसकी एवज में 10 करोड़ रुपये की मांग की थी.


    इस मामले में बीते शुक्रवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी. इस सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने पीड़ित महिला को पेश होने के लिए बुलाया था, तो उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि वह कोर्ट में नहीं पहुंची हैं. वह इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं चाहती हैं. पूरी सुनवाई के बाद कोर्ट ने महिला को 23 अक्टूबर तक दस्तावेज सौंपने को कहा था, जिसमें उनके हस्ताक्षर सहित यह लिखा हो कि वह ये मामला आगे नहीं बढ़ाना चाहती हैं.


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