विवेक ओबेरॉय को फिल्म ‘साथिया’ में काम करने से किया गया था मना, RGV ने कहा था- करियर खत्म हो जाएगा!

विवेक ओबेरॉय की फिल्मी जर्नी.(फोटो साभार : vivekoberoi/Instagram)

विवेक ओबेरॉय की फिल्मी जर्नी.(फोटो साभार : vivekoberoi/Instagram)

विवेक ओबेरॉय (Vivek Oberoi) की फिल्मर 'साथिया' (Saathiya) को काफी पसंद किया गया था. सबको पता है कि इस फिल्म से विवेक को न सिर्फ पहचान मिली बल्कि यह उनके करियर में मील का पत्थर साबित हुई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 18, 2021, 2:26 PM IST
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मुंबई: बॉलीवुड एक्टर विवेक ओबेरॉय (Vivek Oberoi) के पापा सुरेश ओबेरॉय (Suresh Oberoi)  Oberoi) खुद इंडस्ट्री के जाने माने एक्टर हैं. विवेक के पिता सुरेश अपने बेटे को एक बड़ी फिल्म से लॉन्च करने की योजना बना रहे थे लेकिन विवेक अपने कंफर्ट जोन से बाहर आना चाहते थे. विवेक ने ऑडिशन टेस्ट दिया और रामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘कंपनी’ से बॉलीवुड में कदम रखा. इस फिल्म की अपार सफलता के बाद कई फिल्मों में काम किया. अब तक करीब दो दशक विवेक ने फिल्म इंडस्ट्री में बिता चुके हैं. कंपनी’  के ‘चंदू’ की टपोरी वाली भूमिका से लेकर ‘साथिया’ के आदित्य तक की जर्नी के बारे में खुलकर बात की.

नेपोटिज्म के सवाल पर विवेक ओबेरॉय ने टाइम्स से अपना एक्सपीरिएंस शेयर करते हुए बताया कि ‘नेपोटिज्म आज एक बड़ा शब्द बन गया है लेकिन पहले बहुत कॉमन था. खुद मेरे साथ भी यही होने वाला था. बेटा जब न्यूयॉर्क से पढ़ाई पूरी कर आया तो सुरेश ओबेरॉय ने डायरेक्टर अब्बास-मस्तान के साथ मिलकर बेटे को लॉन्च करने की पूरी तैयारी कर ली थी. सब कुछ तय हो गया था लेकिन अचानक मैंने सोचा की यह ठीक नहीं है. मेरे पिता मेरे आइडियल हैं, उन्होंने बॉलीवुड में अपनी जगह खुद ही बनाई है, और मैं भी उनकी तरह ही खुद के दम पर कुछ करना चाहता हूं. मैंने सोचा अगर फिल्म नहीं चली तो मेरे पिता की जिंदगी भर की कमाई डूब जाएगी, मैं पूरी रात जागता और सोचता रहा. अगले दिन अपने पिता के पास गया और कहा कि ‘मैं यह फिल्म नहीं कर सकता, मैं आपकी तरह ही स्ट्रगल करना चाहता हूं’. इस पर उन्होंने कहा कि मैंने सारी तैयारी कर ली है, इसलिए तुम्हे स्ट्रगल करने की जरूरत नहीं है. कुछ हफ्ते बाद मैं अब्बास मस्तान के पास गया और मांफी मांगते हुए बोले कि मैं यह फिल्म नहीं करूंगा’.

विवेक ओबेरॉय ने बताया कि इसके बाद उन्होंने कई स्टूडियो के चक्कर लगाए, कई ऑडिशन दिए. इसी बीच पता चला कि रामगोपाल वर्मा को अपनी फिल्म के लिए कास्टिंग कर रहे हैं. मैं उनसे मिला, काफी मशक्कत के बाद इस फिल्म में काम मिल गया, और मेरे किरदार ‘चंदू’  को बेहद पसंद किया गया.  इसके बाद जब मैंने ‘साथिया’ करने का फैसला किया तो सबने मना किया. यहां तक कि मेरे मेंटर रामगोपाल वर्मा ने भी इसे खतरनाक फैसला बताया. हर कोई मुझे एक्शन मूवी में ही देखना चाहता था. लेकिन एक एक्टर होने के नाते मैं अलग-अलग तरह के रोल प्ले करना चाहता था. ‘साथिया’ करना मेरे लिए बेहद चुनौती भरा फैसला था. लेकिन मैंने किया और इस फिल्म की सफलता के बाद तो सबकी सोच ही मुझे लेकर बदल गई. अब सब कहने लगे कि केवल लव स्टोरी बेस्ड फिल्में ही करो'.

इस फिल्म को लेकर विवेक ने बताया कि मणिरत्नम सर की तारीफ मेरे लिए सबसे बड़ी थी. उन्होंने मुझसे कहा कि ‘तुमने मुझे सरप्राइज कर दिया. मैं तुम्हारे साथ एक फिल्म करना चाहता हूं’. मेरे लिए इससे बड़े सम्मान की बात ही नहीं थी. इस तरह मुझे ‘युवा’ में कास्ट कर लिया.
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