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ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म ने तोड़ा टीवी-सिनेमा वालों का वर्चस्‍व, ऐसे बदली एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री

Janardan Pandey | News18Hindi
Updated: February 28, 2020, 10:20 PM IST
ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म ने तोड़ा टीवी-सिनेमा वालों का वर्चस्‍व, ऐसे बदली एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री
जानिए वेब सीरीज ने कैसे बदली एंटरटेनमेंट जगत की तस्वीर.

असम की फिल्मकार रीमा दास की फिल्म पर सिनेमा जगत का कोई निर्माता पैसे लगाने को तैयार नहीं हो रहा था. बाद में 10-15 लाख की बजट की इस फिल्म को नेटफ्लिक्स ने 2 करोड़ में खरीद लिया. जब फिल्म दुनिया के सामने आई तो इसे भारत की ओर ऑस्कर अवॉर्ड के लिए भेजा गया. आइए News 18 Hindi के Digital Prime Time में आज एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री पर वेब सीरीज के प्रभाव को जानते हैं-

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  • Last Updated: February 28, 2020, 10:20 PM IST
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नई दिल्ली. निर्माता-निर्देशक विक्रम भट्ट (Vikram Bhatt) इन दिनों व्यस्त हैं. 'राज, गुलाम, ऐतबार' जैसी कोई फिल्म बनाने में नहीं, बल्कि वेब सीरीज के निर्माण में. विक्रम कहते हैं, 'सिनेमा, थ‌िएटर, टीवी अपने रास्ते पर चल रहे हैं, लेकिन भविष्य वेब का है.' उनकी बात तार्किक लगती है. भारत में आज भी फिल्म दिखाने के लिए करीब 9,600 स्क्रीन ही हैं. बॉलीवुड की औसत 2 घंटे की फिल्मों को दिखाने के लिए इन 9,600 स्क्रीन तक चुनिंदा फिल्में ही पहुंच पाती हैं. जबकि किसी वेब कंटेंट को दिखाने के लिए आज भारत में 4G इंटरनेट सर्विस का इस्तेमाल करने वाले 400 मिलियन से ज्यादा स्मार्टफोन यूजर्स हैं.

इंटरनेट के जरिए लोगों तक एंटरटेनमेंट पहुंचाने वाले इस नए मार्केट को ओवर द टॉप यानी OTT कहते हैं. इस मीडियम के प्रभाव को ऐसे आंका जा सकता है कि आज जब जे जयललिता (J Jayalalitha) की जिंदगी पर फिल्म बनाने की बात आती है कि निर्माता निर्देशक महज फिल्म 'थलाइवी' बनाकर खुश नहीं होते. वे चाहते हैं कि वेब सीरीज भी बनाई जाए. इतना ही नहीं वे फिल्म के ही पूरे कंटेंट को वेब सीरीज में तब्दील नहीं कर देना चाहते. वे चाहते हैं वेब कंटेंट को मीडियम के लिहाज से अलग तैयार किया जाए.

फिल्म पर पैसे लगाने को तैयार नहीं थे निर्माता, बनी तो ऑस्कर पहुंच गई
दरअसल, OTT ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री पर कब्जा जमाने की स्थिति में आ चुके टीवी और सिनेमा जगत के लोगों की मोनोपली को भी तोड़ा है. अब असम की फिल्मकार रीमा दास (Rima Das) को लीजिए. काफी मशक्कत के बाद भी कोई निर्माता उनकी कहानी, उनकी फिल्म पर पैसा लगाने को तैयार नहीं था. यह ओवर द टॉप मार्केट ही था, जिसके चलते रीमा की महज 10-15 लाख रुपये के बजट में तैयार हुई 'विलेज रॉकस्टार्स' को नेटफ्लिक्स ने करीब दो करोड़ रुपये में खरीद लिया. जब ये फिल्म लोगों के सामने आई तो इतनी पसंद की गई कि उसे भारत की ओर से ऑस्कर अवॉर्ड के लिए भेजा गया.



अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) ने कई मर्तबा कहा है कि उनकी कहानियों के लिए आज भी निर्माता ढूंढना कठिन होता है. 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' जैसी फिल्म में सिनेमा जगत के लोग पैसे लगाने को तैयार न थे. तब अनुराग ने इसे उस जगह पर जाकर बनाया था जहां उन्होंने बचपन बिताया था. एक इंटरव्यू में उन्‍होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में जब वो 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' शूट कर रहे थे तब वहां के लोगों ने आटा-चावल तक की मदद की थी. आज ओटीटी मार्केट के चलते ही उन्हें 'सेक्रेड गेम्स' जैसा कंटेंट बनाने में भी ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा.

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परमानेंट रूममेट्स की एक झलक.


सिनेमा इंडस्ट्री को सभी जानते हैं, वहां इनसाइडर-आउटसाइडर जैसी बातें आम हैं. कुछ लोगों का कब्जा है. उनके बीच अपनी जगह बनाने में सालों लग जाते हैं. टीवी को लीजिए तो दूरदर्शन सरकार और अपने निराले अंदाज में चलता था. बाद में सैटेलाइट चैनलों ने एंटरटेनमेंट जगत का नक्‍शा बदल दिया. पर ज्यादा दिन नहीं गुजरे थे कि ऐसे आरोप लगने शुरू हो गए कि टीवी का ज्यादातर कंटेंट शहरी कहानियां कहता है. यहां असल भारत, ग्रामीण भारत नजर नहीं आता. इसकी वजह थी कि पहले केबल नेटवर्क गांव-कस्बे तक नहीं पहुंचा था.

अब गांव-कस्बे की कहानियां क्यों ज्यादा दिखाई जा रही हैं?
जब तक केबल वहां पहुंचा, टीवी पर गांव-कस्बों की कहानियां पहुंचनी शुरू हुई तब तक स्मार्टफोन ने नई लकीर खींच दी. साल 2014 में वेब सीरीज 'परमानेंट रूममेट्स' के जरिये सिनेमा जगत में घुसने के लिए तड़प रहे लोगों की ओटीटी मार्केट की आहट सुनाई दी. साल 2020 आते-आते ये आलम है कि मध्य प्रदेश के झाबुआ और धार जिले में विशेष रूप से मिलने वाले मुर्गे 'कड़कनाथ' या झारखंड स्थित खास जगह 'जामताड़ा' के बारे में आप कोई वीडियो कंटेंट लिख रहे हैं, उसे बनाना चाहते हैं तो आपको रोका नहीं जा सकता. आपके लिए नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो, Zee5, ALT बालाजी, हॉटस्टार, वूट, सोनी लिव, जियो टीवी, मैक्स प्लेयर, इरोज नाऊ, टीवीएफ, बिग फ्लिक्स, यूट्यूब से लेकर उल्लू ऐप जैसे निर्माता भी मौजूद हैं.

फिल्म जगत के लोगों को अब इस मीडियम से आने वाले लोगों की कद्र भी मालूम हो गई है. एक नजर इन नामों पर डालिए, अंगीरा धर, अमोल पाराशर, विक्रांत मेसी, सुमित व्यास, अहाना कुमरा, सनी कौशल, नवीन कस्तुरिया, नवीन पोलीशेट्टी, निधि सिंह, ऋत्विक साहौर, सपना पब्बी, वीर राजवंत सिंह, सबा आजाद, आयशा अहमद, अभय महाजन, श्रेया धनवंतरी, ईशा चोपड़ा, मानवी गागरू, ध्रुव सहगल, कृति विज, जितेंद्र कुमार, रंजन राज से लेकर मयूर मौरे तक. ये वो नाम हैं जिनकी आज एंटरटेनमेंट जगत में कद्र है, इसके पीछे इकलौती वजह है वेब सीरीज की दुनिया. इनमें कई एक्टर काम पाने के लिए सालों से फिल्म और टीवी वालों के चक्कर काट रहे ‌थे. लेकिन अब इन्हें अपनी फिल्मों व वेब सीरीज में लेने के लिए निर्माता चक्कर काटते हैं.

ओटीटी पर कितना समय गुजारते हैं स्मार्टफोन यूजर्स
पंजाब यूनिवर्सिटी के मास कम्यूनिकेशन एंड मीडिया स्टडीज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमवीर सिंह ने टीवी और सिनेमा पर न्यू मीडिया और ओटीटी मार्केट के प्रभाव पर अध्ययन किया. यह अध्ययन एमिटी यूनिवर्सिटी मध्य प्रदेश के जर्नल में प्रकाशित हुआ. इसके अनुसार आज भारत में दिन के वक्त करीब 17 फीसदी लोग, शाम के वक्त 26 फीसदी लोग, देर शाम 30 फीसदी लोग, जबकि देर रात 27 फीसदी लोग ओटीटी ऐप्स पर समय गुजारते हैं. रीसर्च के अनुसार करीब 43 फीसदी लोग हर रोज करीबन 1 घंटा या इससे कम समय ओटीटी ऐप पर कंटेंट देखते हैं. जबकि 39 फीसदी प्रमुख ओटीटी ऐप्स सबस्क्राइबर्स दिन का 1 से 2 घंटा कंटेंट देखते गुजारते हैं. इसी तरह 16 फीसदी 2 से 3 घंटा और करीब 2 फीसदी ऐसे लोग हैं जो हर रोज 4 घंटे से भी ज्यादा समय ओटीटी ऐप्स पर ही गुजारते हैं.

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'ये मेरी फैमिली' की एक झलक.


अगर बात करें इन एप्स पर लोगों की चॉइस की कि वे आखिर ऐप्स पर क्या देखना पसंद करते हैं तो 16 फीसदी लोग मूवीज, जबकि सबसे ज्यादा 34 फीसदी लोग वेब सीरीज देखते हैं. इसके अलावा 16 फीसदी न्यूज और 13 फीसदी रियॉलिटी शोज और 10 फीसदी लोग लाइव स्पोर्ट्स इवेंट को भी देखते हैं. लाइव स्पोर्ट्स में सबसे ज्यादा लोग हॉटस्टार पर इंडियन क्रिकेट टीम का मैच देखते हैं.

ऐसे में बीते पांच सालों में "बेक्ड, टीवीएफ पिचर्स,आएशा, चाइनीज भसड़, ऑफिशियल चुकियागिरी, टीवीएफ बैचेलर्स, मैन्स वर्ल्ड, बैंग बाजा बारात, टीवीएफ ट्रिपलिंग, सेक्रेड गेम्स, मिर्जापुर, रंगबाज जैसी वेब सीरीज ने जो लकीर खीची है, उसमें राधिका आप्टे, राजकुमार राव, सैफ अली खान, नवाजुद्दीन सिद्दिकी, पंकज त्रिपाठी, आर माधवन, स्वरा भास्कर, अली फजल, विवेक ओबेरॉय, राणा दग्गुबत्ती, निम्रत कौर, श्वेता त्रिपाठी से लेकर रसिका दुग्गल जैसे कलाकारों को समझा दिया है कि उन्हें अगर खुद को बनाए रखना है तो इस माध्यम में भी दमखम दिखाना होगा. साथ ही इस मीडियम ने टेक्निश‌ियन, जूनियर आर्टिस्ट, एडिटर्स के लिए भी काम के अपार मौके खोले हैं जो पहले कुछ चुनिंदा निर्माता-निर्देशकों के दर पर चक्कर लगाते रहते थे.

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First published: February 28, 2020, 9:00 PM IST
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