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जावेद अख्तर ने जब पेड़ के नीचे बिताई रातें, मुंबई आने के बिताए थे मुश्किल दिन, खुद किया था खुलासा

जावेद अख्तर ने जब पेड़ के नीचे बिताई रातें, मुंबई आने के बिताए थे मुश्किल दिन, खुद किया था खुलासा

जावेद अख्तर का आज 77वां जन्मदिन है. (फोटो साभारः इंस्टाग्रामः @azmishabana18)

जावेद अख्तर का आज 77वां जन्मदिन है. (फोटो साभारः इंस्टाग्रामः @azmishabana18)

1960 के दशक में जब जावेद अख्तर (Javed Akhtar) पहली बार मुंबई आए थे, तब उनके लिए यहां गुजारा करना इतना भी आसान नहीं था. जावेद अख्तर ने खुद ही एक बार इस बारे में खुलासा किया था. उन्होंने इस बारे में बात करते हुए बताया था कि कैसे मुंबई (Mumbai) में शुरुआती दिनों में उन्हें घर ना होने के चलते पेड़ के नीचे सोना पड़ा था. जावेद अख्तर के 77वें जन्मदिन (Javed Akhtar Birthday) पर आपको उनके संघर्ष भरे दिनों और एक लेजेंड बनने के उनके सफर के बारे में बताते हैं-

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मुंबईः सिनेमा और साहित्य की दुनिया में गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर (Javed Akhtar) का नाम आज बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है. जावेद अख्तर आज एंटरटेनमेंट का बड़ा नाम हैं. लेकिन, 1960 के दशक में जब वह पहली बार मुंबई आए थे, तब उनके लिए यहां गुजारा करना इतना भी आसान नहीं था. जावेद अख्तर ने खुद ही एक बार इस बारे में खुलासा किया था. उन्होंने इस बारे में बात करते हुए बताया था कि कैसे मुंबई में शुरुआती दिनों में उन्हें घर ना होने के चलते पेड़ के नीचे सोना पड़ा था. जावेद अख्तर के 77वें (Javed Akhtar Birthday) जन्मदिन पर आपको उनके संघर्ष भरे दिनों और एक लेजेंड बनने के उनके सफर के बारे में बताते हैं-

गलियारे-बरामदे में बिताई रातें
2006 में एक इंटरव्यू में जावेद अख्तर ने अलग-अलग शहरों में रहने की बात करते हुए कहा- ‘मुंबई में आकर लगा जैसे ‘जिंदा हो गया हूं.’ मुझे जहां जगह मिलती थई, वहीं सो जाता था. कभी किसी बरामदे में, कभी किसी गलियारे में तो कभी-कभी किसी पेड़ के नीचे. जहां मेरे जैसे कई बेरोजगार और बेघर लोग रहते थे. आखिरकार नवंबर 1969 में मुझे काम मिला, जिसे फिल्मी भाषा में ब्रेक कहते हैं.’

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जावेद अख्तर ने 1970 और 80 के दशक में सलीम खान के साथ मिलकर कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखी. इनमें सीता और गीता, शोले, दीवार, डॉन, मिस्टर इंडिया जैसी फिल्में शामिल हैं. यही नहीं, उन्होंने कई नेशनल अवॉर्ड भी जीते. बेस्ट लिरिसिस्ट के लिए उन्होंने एक लाइन से 3 अवॉर्ड अपने नाम किए. साज के लिए 1997 में, बॉर्डर के लिए 1998 में और गॉडमदर के लिए 1999 में नेशनल अवॉर्ड जीते.

4 अक्टूबर 1964 में मुंबई आए
इसके अलावा भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से दो पद्म श्री के साथ-साथ पद्म भूषण भी मिला. 2020 में जावेद अख्तर ने अपनी जर्नी और मुंबई में अपने पहले दिन के बारे में याद करते हुए एक ट्वीट किया था. जिसमें उन्होंने लिखा था- ‘4 अक्टूबर 1964 की बात है, जब मैं मुंबई आया था. 56 साल लंबी इस यात्रा में मैंने कई टेढ़े-मेढ़े रास्ते, कई रोलर कोस्टर, उतार-चढ़ाव देखे. लेकिन, ग्रैंड टोटल मेरे पक्ष में रहा. शुक्रिया मुंबई, शुक्रिया फिल्म इंडस्ट्री, शुक्रिया जिंदगी. आप सब बहुत दयालु रहे हैं.’

Tags: Bollywood, Bollywood Birthday, Javed akhtar

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