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संजीव कुमार को जब सत्यजीत रे ने फिल्म ‘शतरंज के खिलाड़ी’ का ऑफर दिया तो ढूंढ-ढूंढ कर देख डाली थी उनकी सारी फिल्में

संजीव कुमार को जब सत्यजीत रे ने फिल्म ‘शतरंज के खिलाड़ी’ का ऑफर दिया तो ढूंढ-ढूंढ कर देख डाली थी उनकी सारी फिल्में

सत्यजीत रे की फिल्म शतरंज के खिलाड़ी में संजीव कुमार और सईद जाफरी. (फोटो साभार: Film History Pics/Twitter)

सत्यजीत रे की फिल्म शतरंज के खिलाड़ी में संजीव कुमार और सईद जाफरी. (फोटो साभार: Film History Pics/Twitter)

संजीव कुमार (Sanjeev Kumar) अगर अपनी फिल्मों में इतनी संजीदगी के साथ कैरेक्टर निभाते थे तो इसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत भी होती थी. सत्यजीत रे (Satyajit Ray) ने जब मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘शतरंज के खिलाड़ी’ (Shatranj Ke Khiladi) पर फिल्म बनाने का फैसला किया तो उनके जेहन में संजीव थे.

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    मुंबई: महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) की कहानी पर 1977 में बनी फिल्म ‘शतरंज के खिलाड़ी’ (Shatranj Ke Khiladi) एक पीरियड फिल्म थी. प्रसिद्ध निर्माता निर्देशक सत्यजीत रे (Satyajit Ray) के निर्देशन में बनी इस फिल्म में संजीव कुमार (Sanjeev Kumar) , सईद जाफरी (Saeed Jaffery), शबाना आजमी (Shabana Azmi) और अमजद खान थे. 1957 के ब्रिटिश पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म में बहुत सी पुरानी चीजों का इस्तेमाल सत्यजीत रे ने किया था. इस फिल्म की पटकथा लिखने से लेकर कैरेक्टर सेलेक्ट करने तक में कड़ी मेहनत उन्होंने की थी. संजीव कुमार और अमजद खान को इस फिल्म में लेने की कहानी बेहद दिलचस्प है.

    ऑफर मिलने के बाद संजीव ने देखी सत्यजीत रे की फिल्में
    सत्यजीत रे के रुतबे और किसी एक्टर के जज्बे का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि जब उन्होंने संजीव कुमार को ‘शतरंज के खिलाड़ी’ में काम करने का ऑफर दिया तो संजीव पुणे चले गए और वहीं कुछ दिन रहे. इस दौरान उन्होंने नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया में मौजूद ऐसी सभी फिल्मों को देखा जिसे सत्यजीत रे ने बनाई थी. संजीव सत्यजीत के साथ काम करने से पहले उनकी फिल्म बनाने के अंदाज को अच्छी तरह समझ लेना चाहते थे. सत्यजीत रे बांग्ला फिल्में बनाने के लिए मशहूर थे लेकिन इस फिल्म से हिंदी पट्टीवालों को भी अपना मुरीद बना लिया.

    नर्तकी की तलाश में सोनागाछी के कोठे पर गए सत्यजीत रे
    सत्यजीत रे अपने फिल्मों के कैरेक्टर तलाशने में कितनी मेहनत करते थे इसे समझाने के लिए एक दिलचस्प कहानी बताते हैं. फिल्म में मुजरा करने के लिए एक युवा नर्तकी की तलाश में थे. सत्यजीत रे को किसी ने बता दिया कि कोलकाता के रेडलाइट एरिया सोनागाछी में एक लड़की है जो इस रोल को अच्छी तरह प्ले कर सकती है. सत्यजीत उससे मिलने खुद सोनागाछी गए,चाहते तो उसे स्टूडियो में बुला सकते थे लेकिन वो यहां आकर असहज महसूस न करे इसलिए खुद वहां जाना पसंद किया. कोठे पर पहुंचे और उसका मुजरा देखा फिर उससे बात की. बाद में इस रोल को सास्वती सेन ने निभाया.

    अमजद खान को फिल्म में लेने की दिलचस्प कहानी
    अमजद खान को फिल्म में लेने की कहानी भी कुछ दिलचस्प नहीं है. ‘शतरंज के खिलाड़ी’ से पहले  सत्यजीत रे कभी अमजद खान से मिले नहीं थे, हां उनकी फिल्म ‘शोले’ जरूर देखी थी. शोले देखने के बाद सत्यजीत रे ने उनकी एक तस्वीर बनाई. फिर उस तस्वीर को सजाया. कान और गले में आभूषण पहनाए, सिर पर टोपी रखी तो वाजिद अली शाह का कैरेक्टर सामने आ गया. कहते हैं सत्यजीत रे की खासियत थी जिसे कोई नहीं देख समझ पाता वो देख लिया करते थे.

    डायलॉग लिखवाने के लिए भी कम मशकक्त नहीं हुई
    फिल्म के डायलॉग लिखवाने को लेकर सत्यजीत रे को लोगों ने सलाह दी थी कि राजेंदर सिंह बेदी से लिखवाएं. शबाना आजमी को लगता था कि इसके लिए उनके पिता कैफी आजमी को मौका देना चाहिए जबकि संजीव कुमार चाहते थे कि गुलजार से लिखवाया जाए. लेकिन सत्यजीत रे ने कहा कि मैं किसी नए व्यक्ति को लेना चाहता हूं जिसकी उर्दू और अंग्रेजी दोनों ही अच्छी हो.  फिर इस फिल्म के डायलॉग के लिए जावेद सिद्दीकी को चुना. जावेद से सारे डायलॉग पहले अंग्रेजी में अनुवाद करवाए क्योंकि सत्यजीत रे को अंग्रेजी और बांग्ला ही आती थी,और वह इसे अच्छी तरह समझ लेना चाहते थे. फिर खुद हर डायलॉग को बांग्ला में लिख कर देखा. कहते हैं कि जब जावेद ने उनसे ऐसा करने की वजह पूछी तो कहा था ‘जुबान कोई भी हो, शब्दों की एक लय होती है और ये लय सही होनी चाहिए’.

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    ‘शतरंज के खिलाड़ी’ की कहानी
    मुंशी प्रेमचंद ने वाजिद अली शाह के दौर और उनके नवाबी शौक पर ‘शतरंज के खिलाड़ी’ नामक कहानी लिखी थी. इस कहानी में दो मुख्य किरदार हैं मिर्जा सज्जाद अली और मीर रोशन अली. दोनों इस कदर शतरंज के शौकीन हैं कि उन्हें दीन-दुनिया की परवाह भी नहीं रहती. कहानी के आखिर में दोनों दोस्त एक बाजी में ऐसे उलझे कि एक दूसरे की जान ही ले ली.

    Tags: Actor, Satyajit Ray

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