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कौन थी मणिकर्णिका, क्यों हो रहा है हंगामा?

मणिकर्णिका को लेकर विरोध प्रदर्शन

मणिकर्णिका को लेकर विरोध प्रदर्शन

कंगना रनौत की मुख्य भूमिका वाली फिल्म मणिकर्णिका को लेकर हो रहा है विरोध प्रदर्शन, फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड ...अधिक पढ़ें

    मणिकर्णिका. 'पद्मावत' के बाद विरोध और विवाद की राजनीति में फंसी है ये फिल्म. झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर आधारित इस फिल्म में कंगना रनौत मुख्य भूमिका में हैं. इस फिल्म पर भी 'पद्मावत' की तरह ही ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया जा रहा है. आखिर में क्या होगा, ये अभी नहीं कहा जा सकता, लेकिन इतना जरूर बताया जा सकता है कि मणिकर्णिका आखिर है कौन?

    रानी लक्ष्मीबाई ही हैं मणिकर्णिका
    ज्यादातर लोगों को ये तो मालूम है कि रानी लक्ष्मीबाई कौन थीं. ये भी मालूम है कि लक्ष्मीबाई के बचपन का नाम क्या था. ये शायद ही मालूम हो कि रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर बन रही इस फिल्म का नाम मणिकर्णिका क्यों है. बता दें कि मणिकर्णिका रानी लक्ष्मीबाई का ही नाम है. मनु उन्हें प्यार से कहकर बुलाया जाता है. मणिकर्णिका उनका वास्तविक नाम था. सन् 1835 में महाराष्ट्र के एक ब्राह्मण परिवार में उनका जन्म हुआ था. बाद में जब झांसी के राजा से उनकी शादी हुई, तब वह कहलाईं झांसी की रानी लक्ष्मीबाई.

    वेद-पुराण से घोड़े-तलवार तक
    मनु के पिता बिथूर के पेशवा के दरबार में सलाहकार थे. इस वजह से मनु का बचपन महल में बीता. कम उम्र में उस बच्ची ने न सिर्फ वेद और पुराण पढ़ना सीखा बल्कि घुड़सवारी और तलवारबाजी में भी महारत हासिल कर ली. इतिहास में कई जगह ये बात दर्ज है कि मनु बचपन से ही एक बेहतरीन घुड़सवार थी.

    झांसी के राजा से शादी
    1842 में मनु की झांसी के महाराजा गंगाधर राव से शादी हुई. गंगाधार की पहली पत्नी की मौत हो चुकी थी. उनका कोई बच्चा भी नहीं था और उन्हें अपनी विरासत सौंपने के लिए वंशज की जरूरत थी. इस तरह मणिकर्णिका और मनु रानी लक्ष्मीबाई बन गईं. बताया जाता है कि 1851 में लक्ष्मीबाई ने एक बेटे को भी जन्म दिया. लेकिन ये बच्चा तीन महीने बाद ही चल बसा था. इसके बाद गंगाधर राव और लक्ष्मीबाई ने गंगाधर के परिवार से ही दामोदार राव को गोद ले लिया था. 1853 में महाराज गंगाधर राव की मौत के बाद
    ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने गंगाधर राव की गद्दी पर दामोदर राव के दावे को मानने से इनकार कर दिया था.

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    फिर शुरू हुआ विद्रोह
    अंग्रेजों ने जब दामोदर के गोद लिए जाने को ही अवैध घोषित कर दिया, तो रानी लक्ष्मीबाई को अपना महल छोड़ना पड़ा था. वह एक साधारण सी हवेली में एकांत में रहने लगी थीं. ये 1857 का वक्त था. उस वक्त झांसी के सिपाहियों ने विद्रोह कर दिया और इसमें महिलाओं और बच्चों समेत लगभग 60 ब्रिटिश मारे गए. कहा जाता है कि रानी लक्ष्मी जो उस वक्त एकांत में रह रही थीं, इस विद्रोह के पीछे उन्हीं की योजना थी. जब अंग्रेजों को इस बारे में पता लगा, तो उन्होंने इस पर लगाम कसने की कोशिश की. 1858 में, जनरल हफ रोज अपने दल-बल के साथ झांसी आए. ये वो वक्त था, जब रानी लक्ष्मीबाई ने पीछे बैठकर रणनीति बनाने की बजाय सामने आकर तलवार उठाना बेहतर समझा. उस वक्त वह सैन्य विद्रोह का मुख्य चेहरा बन गई थीं.

    अंग्रेजों ने भी की तारीफ
    बताया जाता है कि इस युद्ध के बाद जनरल हफ रोज ने खुद कहा था कि भारतीय विद्रोह से एक पुरुष का जन्म हुआ है और वो पुरुष एक महिला है. जनरल के इस वाक्य से मालूम चलता है कि एक तरफ जहां रानी लक्ष्मीबाई को विद्रोह का मुख्य चेहरा माना जाता रहा, वहीं उनकी शख्सियत एक बहादुर महिला के तौर पर भी स्थापित हुई.

     

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    Tags: Manikarnika

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