कौन हैं कंगना रनौत की अगली फिल्म की कैरेक्टर ‘दिद्दा’, जिन्हें 'चुड़ैल रानी' तक कहा गया

कंगना रनौत. (फाइल फोटो)

कंगना रनौत. (फाइल फोटो)

कंगना रनौत (Kangana Ranaut) की फिल्म 'मणिकर्णिका रिटर्न्स: द लेजेंड ऑफ दिद्दा' (Manikarnika Returns: The Legend of Didda) ऐसी वीरांगना की कहानी है, जिसने महमूद गजनवी को दो बार धूल चटाई. जानिए उनकी रानी ‘दिद्दा (Didda)’ की हैरतअंगेज और साहस से भरी कहानी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 15, 2021, 5:32 PM IST
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मुंबई. सोशल मीडिया पर अपनी विवादास्पद पोस्ट की वजह से अक्सर सुर्खियों में रहने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने अपनी अगली फिल्म 'मणिकर्णिका रिटर्न्स: द लीजेंड ऑफ दिद्दा (Manikarnika Returns: The Legend of Didda)' की घोषणा कर दी है. इस घोषणा के बाद से उनकी फिल्म के साथ-साथ ‘दिद्दा’ पर भी जबर्दस्त चर्चा छिड़ गई है. लोग जानना चाह रहे हैं कि आखिर ‘दिद्दा’ कौन थीं और उन्हें इतिहास में किस बात के लिए याद किया जाता है.

कंगना रनौत ने इस फिल्म के बारे में बताया कि ‘दिद्दा’ कश्मीर की एक ऐसी ताकतवर रानी थी, जिन्होंने महमूद गजनवी को दो बार हराया. दिद्दा अविभाजित कश्मीर की इतिहास में प्रसिद्ध ऐसी रानी के रूप में जानी जाती हैं, जिन्होंने मुगल आक्रमणकारी को कड़ा सबक सिखाया. खास बात यह है कि वे एक पैर से अपंग थीं. इसके बाद भी देश पर आक्रमण कर सोमनाथ मंदिर को लूटने वाले गजनवी को जंग  में दो बार बुरी तरह हराया था.

दिद्दा कश्मीर की एक ऐसी वीरांगना थी, जो जन्म से दिव्यांग थीं इसलिए उनके मां-बाप ने उन्हें त्याग दिया था. कश्मीर के राजा ने उनसे विवाह किया लेकिन किस्मत ने उन्हें फिर धोखा दिया और वे विधवा हो गईं. विधवा होने के बाद उन्होंने राज्य की बागडोर अपने हाथ में ले ली. इसके बाद उन्होंने अनेक युद्ध लड़े और उनमें जीत हासिल की. उन्हें अपने सख्त प्रशासन के लिए भी जाना जाता है. उन्होंने न केवल अपने भ्रष्ट मंत्रियों बल्कि अपने प्रधानमंत्री तक को बर्खास्त कर दिया था. उन्होंने यह दिखा दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति से कोई शख्स जीवन में बहुत कुछ हासिल कर सकता है.



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जन्म से दिव्यांग थीं रानी दिद्दा
दिद्दा का जन्म लोहार राजवंश में हुआ था लेकिन दिव्यांग होने के कारण माता-पिता ने उन्हें छोड़ दिया. उन्होंने निराश होने के बजाय दिव्यांगता को ही अपनी ताकत बनाने में जुट गईं. युद्ध कला समेत बहुत सी कलाओं में उन्होंने दक्षता प्राप्त की. इसके बाद कश्मीर के उस समय के राजा क्षेमगुप्त से उनकी मुलाकात हुई.

क्षेमगुप्त उन्हें दिल दे बैठे और फिर उनसे विवाह कर लिया. इसके बाद से ही दिद्दा राजकाज देखने लगीं. 'दिद्दा-द वारियर क्वीन ऑफ कश्मीर' में लिखा है कि एक दिन शिकार के समय क्षेमगुप्त की मृत्यु हो गई. उस समय पति की मौत होने पर सती होने की परंपरा थी, लेकिन दिद्दा ने सती होने से इनकार कर दिया और मां की जिम्मेदारी निभाने और बेटे को राजकाज संभालने योग्य बनाने का फैसला किया.

इसलिए कहा गया 'चुड़ैल रानी'
इतिहास में उन्हें 'चुड़ैल रानी' और 'कश्मीर की लंगड़ी रानी' भी लिखा गया है, क्योंकि उस समय के बड़े-बड़े राजा उनकी बुद्धिमानी और दिमागी क्षमता का लोहा मानते थे. दिद्दा ने पितृ सत्तात्मक समाज के नियम न केवल तोड़े बल्कि अपने नियम बनाए. इससे बौखलाए पुरुषवादी समाज ने उन्हें 'चुड़ैल रानी' और ‘डायन’ तक कह दिया.
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