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क्यों 'हीरो नंबर 1' नहीं बन सके गोविंदा, कैसे मारी सलमान और शाहरुख ने बाज़ी?

गोविंदा के ही हमउम्र सलमान, शाहरुख और अक्षय लगातार फिल्में कर रहे हैं. जो सैकड़ों करोड़ का बिजनेस कर रही हैं. तो गोविंदा के करियर के खत्म हो जाने का ट्रिविया.

गोविंदा के ही हमउम्र सलमान, शाहरुख और अक्षय लगातार फिल्में कर रहे हैं. जो सैकड़ों करोड़ का बिजनेस कर रही हैं. तो गोविंदा के करियर के खत्म हो जाने का ट्रिविया.

गोविंदा के ही हमउम्र सलमान, शाहरुख और अक्षय लगातार फिल्में कर रहे हैं. जो सैकड़ों करोड़ का बिजनेस कर रही हैं. तो गोविंदा के करियर के खत्म हो जाने का ट्रिविया.

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आपको एक दिलचस्प आँकड़ा बताते हैं. आज से ठीक 20 साल पहले बॉलीवुड में यही सितारे सुपरस्टार थे जो आज मौजूद हैं. यानि 1998 में सलमान खान, शाहरुख खान, अक्षय कुमार ही 'हीरोपंती' कर रहे थे. लेकिन ये उतने बड़े स्टार नहीं थे जितने बड़े स्टार थे अपने 'चीची भईया' उर्फ़ गोविंदा.

ये बात कई बार समझ नहीं आती की लगभग एक ही उम्र के रहे सलमान खान (52), शाहरुख खान (52) , आमिर खान (53) और गोविंदा (54) के बीच गोविंदा से ऐसी क्या ग़लती हो गई कि आज उनको कोई पूछने वाला नहीं है.

ऐसा नहीं है कि गोविंदा किसी परेशानी में थे. साल 1998 में वो भी अपने करियर की पीक पर थे और उस साल उनकी 6 फिल्में -  'आंटी नंबर 1', 'दूल्हे राजा', 'बड़े मियां छोटे मियां', 'परदेशी बाबू', 'महाराजा' और 'अचानक' रिलीज़ हुईं थीं.

मतलब साफ है कि उस दौर के एक्टर्स में गोविंदा सबसे ज्यादा डिमांड में थे लेकिन इसके बाद कहीं कुछ ऐसी गड़बड़ गोविंदा से हो गई कि उस दौर के दूसरे सितारे सलमान खान, शाहरुख खान और अक्षय कुमार को लोगों ने सिर आँखो पर बिठा लिया और गोविंदा को लोग भूल गए.

सलमान, शाहरुख और अक्षय आज 300 - 400 करोड़ की कमाई करने वाली फिल्में कर रहे हैं और उनको काम की बिल्कुल कमी नहीं है. आज भी अक्षय कुमार की हर साल 4-5 फिल्में आ जाती हैं. पर इस दौरान ऐसा क्या हुआ कि गोविंदा को काम मिलना बंद हो गया?

98 में कैसा चल रहा था सलमान-शाहरुख का करियर?

गोविंदा की विफलता के पीछे का कारण जानने से पहले ज़रा नज़र डाल लेते हैं कि सलमान, शाहरुख और अक्षय का करियर उस वक्त कैसा चल रहा था?

1998 में सलमान खान की जो फिल्में आईं, वे थीं- 'कुछ कुछ होता है', 'प्यार किया तो डरना क्या', 'बंधन', 'जब प्यार किसी से होता है', 'सर उठा के जियो'.

इन फिल्मों में से 'कुछ कुछ होता है' और 'प्यार किया तो डरना क्या' तो सुपरहिट थीं लेकिन गोविंदा की 'आंटी नंबर 1', 'बड़े मियां छोटे मियां' और 'दूल्हे राजा' ने भी अच्छी कमाई की थी.



वहीं 1998 में शाहरुख खान के पास 'दिल से' और 'डुप्लीकेट' जैसी फिल्में थी जो मधुर संगीत के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर दम तोड़ चुकी थीं. ऐसे में शाहरुख और सलमान के पास मिला जुला कर 'कुछ कुछ होता ' है का जलवा था.

अक्षय कुमार तो इस समय फ्लॉप फिल्मों की सीरीज़ से जूझ रहे थे और 'कीमत', 'बारूद', 'अंगारे' जैसी फिल्मों से वो गोविंदा को टक्कर नहीं दे सकते थे.

गड़बड़ कहां हुई ?

गोविंदा की सबसे बड़ी ग़लती थी उनका लेट आने का अंदाज़. हालांकि बतौर 'हीरो' कई लोग इसे गोविंदा का स्टाइल मान सकते हैं लेकिन महंगे सेट और यूनिट का खर्चा निकाल कर काम रहे निर्माता इस आदत से परेशान हो जाते थे.

कई मैगज़ीन्स के अनुसार 'चीची' सेट पर घंटो की देरी से आते थे और इसके चलते बड़े बैनर उनके साथ काम करने से कतराते थे. फिल्मी दुनिया के जानकार बताते हैं कि गोविंदा ने अपने करियर को कभी सीरियसली नहीं लिया.

जिस दौर की गोविंदा की फिल्मों को देखकर आप हंसते-हंसते लोट-पोट हो जाते हैं. उन फिल्मों के डायरेक्टर गोविंदा के नखरों से चिढ़े रहते थे. सेट पर वक्त से नहीं पहुंचने के अलावा गोविंदा का मूड भी तेज़ी से बदल जाता था और इस दौरान उनके कई लोगों से झगड़े हुए.

साल 2008 में एक फैन को मारा थप्पड़ तो उन्हें इतना भारी पड़ा कि उन्हें सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी पड़ी.

दोस्तों से दूरी, पड़ी भारी 

इस दौरान गोविंदा ने खुद लोगों से दूरी भी बना ली. 'नंबर 1' सीरीज़ बनाने वाले डेविड धवन से गोविंदा का मनमुटाव गोविंदा को भारी पड़ा.

'बीवी नंबर 1' में गोविंदा की जगह सलमान को एंट्री मिल गई और 'नंबर 1' का टैग भी गोविंदा से छिन गया. इसके बाद गोविंदा ने लगातार खराब फिल्मों का चुनाव किया और उन्हें सलाह देने वाला भी कोई नहीं था.

इसी दौरान  उन्होंने राजनीतिक करियर को बनाने की सोची और दो नावों में सवार गोविंदा का करियर डांवाडोल हो गया. संसद में नहीं आने के लिए उनकी आलोचना हुई और शूटिंग के चलते लोगों से नहीं मिल पाने के कारण उन पर 'फिल्मी नेता' होने के कटाक्ष भी कसे गए.

फिटनेस

दो नौकाओं में सवार गोविंदा के साथ स्वास्थ्य समस्याएं भी थीं. स्क्रीन पर 'हीरो' तेज़ी से मस्कुलर होते जा रहे थे और वहीं गोविंदा फिटनेस पर फोकस नहीं कर पा रहे थे.

लगातार फ्लॉप होती फिल्में और राजनीतिक हमलों के बीच गोविंदा स्ट्रेस में आ गए. डेट्स की समस्या के चलते निर्माता उनसे किनारा करने लगे और बुरी तरह से तनाव में घिरे गोविंदा 'यंग' रोल्स के लिए अनफिट हो गए.

ऐस नहीं था कि गोविंदा ने फिल्मों से ब्रेक लिया हो. साल 2004 छोड़कर उन्होंने हर साल फिल्में की लेकिन जैसे दर्शक उनकी फिल्मों को देखने जा ही नहीं रहे थे. साल 2007 में 'पार्टनर' गोविंदा के लिए बड़ी राहत की तरह आई लेकिन इसके बाद उन्होंने फ्लॉप फिल्मों की झड़ी लगा दी और 2008 के 'थप्पड़ विवाद' के बाद सलमान ने भी उनसे किनारा कर लिया, गोविंदा पीछे छूट गए!

गोविंदा को छोड़ बाकी तीनों आज भी क्यों हिट हैं?

सलमान - शाहरुख - आमिर के बॉलीवुड में टिके रहने का कारण है उनका स्वाभाव. सलमान के कानूनी मामलों को छोड़ दें तो इन तीनों ही स्टार्स के किसी भी सार्वजनिक झगड़े की घटना सामने नहीं आती.  शाहरुख, आमिर और अक्षय तो विनम्र और मिलनसार रहे हैं. हां, कुछेक घटनाओं के मद्देनज़र सलमान को एरोगेंट माना जा सकता है पर वो इंडस्ट्री के अंदर यारों के यार है और कई लोगों के गॉडफ़ादर भी.



विवेक ओबेराय, ऐश्वर्या और शाहरुख से सलमान के झगड़ों को छोड़ दें तो सलमान का बॉलीवुड इंडस्ट्री के अंदर रवैया दोस्ताना ही रहा है. बल्कि शाहरुख के साथ आज उन्होंने जैसे रिश्ते फिर कायम कर लिए हैं  वो इस बात की गवाही देता है कि सलमान को अपनी भूल सुधारना आता है.

वहीं गोविंदा को करीब से जानने वाले यह भी कहते हैं कि उनकी फिल्मों में सबसे अहम रहे दो लोगों कादर खान और जॉनी लिवर से भी एक वक़्त बाद गोविंदा का मेल मिलाप बंद रह गया.

गोविंदा के सामने बड़ी मुश्किल

फिल्मी जानकार मानते हैं कि गोविंदा पर फ्लॉप होने का टैग लग गया है. 'पार्टनर' के बाद से उन्होंने दर्जन भर फिल्मों में काम किया है लेकिन वो एक भी हिट फिल्म नहीं दे पाए हैं.

यहां तक की उनकी रणवीर सिंह के साथ बनी फिल्म 'किल दिल' भी फ्लॉप हो गई थी. आदित्य चोपड़ा के साथ बनी फिल्म फ्लॉप हो जाने के बाद डिस्ट्रीब्यूटर्स ने गोविंदा से जैसे किनारा कर लिया है.



लंबे समय से तैयार होकर पड़ी उनकी फिल्म 'आ गया हीरो' (जिसे पहले अभिनयचक्र के नाम से रिलीज़ किया जाना था) डिस्ट्रीब्यूटर न मिल पाने के चलते अटकी हुई है. इस फिल्म से गोविंदा को वापसी की आस थी लेकिन फिलहाल तो यह फिल्म डिब्बे से बाहर आती नहीं लग रही है.

बॉलीवुड के ट्रेड एक्सपर्ट्स की राय में गोविंदा को अब बतौर हीरो वापसी मिलना मुश्किल है और शायद उन्हें सपोर्टिंग रोल्स के लिए काम करना चाहिए. उनके फिलहाल के परफॉर्मेंस के चलते कोई निर्माता उनपर पैसा खर्च नहीं करना चाहेगा और अपनी फिटनेस को लेकर गोविंदा अभी भी बहुत गंभीर हुए नहीं है.

बेटी नर्मदा का फिल्मी करियर भी चल नहीं सका और बेटे यशवर्धन अभी बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम कर ही रहे हैं. गोविंदा को इस समय किसी हिट की नहीं बल्कि बॉलीवुड में दोस्तों की ज़रुरत है और शायद इस बार वो कोई ग़लती नहीं करना चाहेंगे.

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