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समलैंगिक किरदारों को 'कॉमेडी करेक्‍टर' की तरह दिखाने वाला बॉलीवुड अब सुधर रहा है?

2018 में सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 रद्द कर दी थी.

2018 में सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 रद्द कर दी थी.

बॉक्‍स ऑफिस के नंबर किसी फिल्‍म का बिजनेस बताते हैं लेकिन समलैंगिकता जैसे विषय पर मेनस्‍ट्रीम सिनेमा में बनी 'शुभ मंगल ज्‍यादा सावधान' (Shubh Mangal Zyada Savdhaan) को अगर एक अच्‍छी ओपनिंग मिलती है तो ये बहुत कुछ कहती है.

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    6 सितंबर, 2018.. ये वो तारीख है जब भारत में समलैंगिक समुदाय और उससे जुड़े लाखों लोगों ने जश्‍न मनाया. इसी दिन 5 जजों की सुप्रीम कोर्ट की बैंच ने फैसला देते हुए दो बालिगों के बीच बनने वाले संबंधों को गैर कानूनी घोषि‍त करते हुए धारा 377 को रद्द कर दिया. देश की सबसे बड़ी अदालत की दहलीज से आए इस फैसले ने लाखों चेहरे पर सुकून और दिल में पल रहे प्‍यार के जज्‍बातों को तसल्‍ली दी थी.

    हालांकि इस फैसले के बाद भी इस बात पर खूब बहस हुई थी कि क्‍या से कानूनी फैसला समलैंगिकता जैसे विषय को समाज में भी एक्‍सेप्‍टेंस दिला पाएगा.... ? ये सवाल अभी भी खड़ा है क्‍योंकि समाज में समलैंगिकता को कितना स्‍वीकार्यता मिली है, इसे अभी भी समझा जाना है लेकिन इतना साफ है कि अब हिंदी फिल्‍मों की दुनिया में इस विषय पर खुलकर और ज्‍यादा संजीदगी से बात होने लगी है. दरअसल ये बात उठी है आज रिलीज हुई निर्देशक हितेश केवल्‍य की फिल्‍म 'शुभ मंगल ज्‍यादा सावधान' से, जिसकी ओपनिंग काफी अच्‍छी रही है.

    दरअसल बॉक्‍स ऑफिस के नंबर किसी फिल्‍म का बिजनेस बताते हैं लेकिन समलैंगिकता जैसे विषय पर मेनस्‍ट्रीम सिनेमा में बनी ये फिल्‍म को अगर एक अच्‍छी ओपनिंग मिलती है तो ये बहुत कुछ कहती है. 'शुभ मंगल ज्‍यादा सावधान' एक ऐसी कहानी हैं जिसमें कार्तिक और अमन, जी हां, दो लड़के एक-दूसरे से ज्‍यादा करते हैं और इस फिल्‍म के ट्रेलर में दावा किया गया है कि 'जीतेगा प्‍यार, सह परिवार'. फिल्‍म का ये दावा कई मायनों में अहम हो जाता है, क्‍योंकि कॉमेडी की चाशनी में लपेट कर परोसी गई इस फिल्‍म का पैकेट भले ही कितना दिलचस्‍प हो लेकिन इसके अंदर जो माल है उससे खरीदने से पहले दर्शकों के हाथ अक्‍सर ठिठकते रहे हैं.

    समलैंगिकता पर बनी फिल्‍मों का भविष्‍य हिंदी सिनेमा में बॉक्‍स ऑफिस पर कभी ज्‍यादा अच्‍छा नहीं रहा. अक्‍सर सेम जेंडर का प्‍यार संजीदगी से दिखाने वाली फिल्‍में बॉक्‍स ऑफिस पर औंधे मुंह ही गिरी हैं, खासतौर पर तब, जब ऑडियंस को सिनेमाघरों में जाने से पहले ये पता हो कि ये फिल्‍म किस विषय पर है.

    'शुभ मंगल ज्‍यादा सावधान' के कई मायने हैं...
    डिजिटल प्‍लेटफॉर्म स्‍टार जीतेंद्र और अपनी बेहद अलग तरह की फिल्‍मों की चॉइस के लिए प्रसिद्ध एक्‍टर आयुष्‍मान खुराना की इस फिल्‍म के ट्रेलर के बाद से ही ये फिल्‍म सुर्खियों में है. ट्रेलर के साथ ही इस फिल्‍म ने साफ कर दिया कि वह क्‍या कह रही है और कितनी सफाई से कह रही है. दरअसल धारा 377 रद्द होन के बाद दो मेनस्‍ट्रीम फिल्‍में इस तरह के विषय पर बनी हैं, जिनमें पहली रही थी सोनम कपूर और राजकुमार राव स्‍टारर फिल्‍म 'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा'. ये फिल्‍म दो लड़कियों के प्‍यार को दिखाती और सामने रखती है. लेकिन ये फिल्‍म बॉक्‍स ऑफिस पर ठंडी साबित हुई.

    इसके बाद दूसरी फिल्‍म आई है, 'शुभ मंगल ज्‍यादा सावधान', जो दो पुरुषों के बीच प्‍यार और फिर उनकी परिवार से इस प्‍यार को स्‍वीकार्यता दिलाने की लड़ाई दिखाई गई है. इन दोनों ही फिल्‍मों में न तो समलैंगिक किरदार कॉमेडियन हैं और न ही सस्‍पेंस के साथ फिल्‍म में आए हैं. बल्कि 'समलैंगिकता' और समलैंगिक किरदार इन फिल्‍मों के 'हीरो' हैं और ये हिंदी सिनेमा के बदलते नजरिए का बड़ा परिचायक है.



    समलैंगिकता पर हंसता रहा है बॉलीवुड
    2018 से पहले समलैंगिकता जैसे विषय पर बनीं फिल्‍में अक्‍सर समलैंगिक किरदारों को 'कॉमेडी करेक्‍टर' में तब्दील करती हुई ही दिखीं हैं. जैसे अभिषेक बच्‍चन, जॉन अब्राहम और प्रियंका चोपड़ा की 'दोस्‍ताना' जिसमें 'मां दा लाड़ला बिगड़ गया' जैसा साफ संदेश था. वहीं करण जौहर की फिल्‍म 'स्‍टूडेंट ऑफ द ईयर' का डीन कॉमेडी करता नजर आता है. इसके अलावा 'क्‍या सुपरकूल हैं हम', 'प्‍यार किया तो डरना क्‍या' जैसी कई फिल्‍में हैं जिनमें समलैंगिक किरदारों की जमकर खिल्‍ली उड़ाई गई है. दरअसल जब तक सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आया था, तब तक हिंदी सिनेमा भी ऐसे किरदारों को दिखाकर उनके प्रति 'स्‍टीरियोटाइप' ही पेश करता रहा है.

    समलैंगिकता पर संजीदा बॉलीवुड कमाई नहीं कर पाया
    ऐसा नहीं कि बॉलीवुड में समलैंगिका जैसे विषय पर फिल्‍में नहीं बनीं ये इसे सही तरीके से दिखाने की कोशिश करने वाले निर्देशक नहीं रहे. इस विषय को बेहद संवेदनशीलता से दिखाने वाली फिल्‍मों में सबसे पहले नाम लिया जाता है मनोज वाजपेयी और राजकुमार राव की 'अलीगढ़' का. मर्द और औरत से इतर प्‍यार के संबंधों का दिखाने वाली इस फिल्‍म की जितनी तारीफ की जाए वह कम है. इसके अलावा आलिया भट्ट, फवाद खान और सिद्धार्थ मल्‍होत्रा की फिल्‍म 'कपूर ऐंड सन्‍स' ने भी इस विषय को काफी अच्‍छे तरीके से ट्रीटमेंट दिया था. लेकिन इस फिल्‍म के प्रमोशन के दौरान इस बात का जिक्र कहीं भी नहीं किया गया था और ये दर्शकों के लिए फिल्‍म में आया एक सस्‍पेंस था.

    इसके अलावा 'बॉम्‍बे टॉकीज', 'जूली', 'फायर', 'माय ब्रदर निखिल', 'आई एम' ऐसी कई फिल्‍में हैं जो समलैंगिक रिश्‍तों को संजीदगी से दिखाती रही हैं. लेकिन इन फिल्‍मों की कमाई की बात करें तो ये कभी भी अच्‍छे नंबर नहीं बना पाईं.

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