EXCLUSIVE: 'गुल्लक 2' की सफलता के बाद अब इसके 3 सीजन की तैयारी में जुट चुके हैं दुर्गेश सिंह

गुल्लक-2 में जमील खान, गीताजंलि कुलकर्णी, वैभव राज गुप्ता और हर्ष मयार ने मुख्य भूमिका निभाई है.

गुल्लक-2 (Gullak Season 2) के लेखक दुर्गेश सिंह (Durgesh Singh) ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को अगर कानून बनाकर रेगुलेट किया जाएगा तो दर्शकों को अच्छा कंटेंट नहीं मिल पाएगा. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कोई रोक टोक नहीं होनी चाहिए.

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    नई दिल्ली. वेब सीरीज 'गुल्लक 2 (Gullak Season 2)' से चर्चा में आए फिल्म और पटकथा लेखक दुर्गेश सिंह (Durgesh Singh) ने न्यूज18 हिंदी से खास बातचीत में कहा कि ओटीटी जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स (Online Platform) पर किसी तरह सेंसर नहीं होना चाहिए और न ही उन्हें कानून बनाकर रेगुलेट किया जाना चाहिए. फिल्मकारों और रचनाकारों को अपनी क्रिएटिविटी व्यक्त करने का पूरा मौका मिलना चाहिए. सिंह ने कहा, "एक रचनाकार के तौर पर मुझे सोचने का पूरा अधिकार है. ये संविधान प्रदत्त है और सोचने के साथ दिखाने और बताने का भी अधिकार है, लेकिन अगर आप इस अधिकार को कांटने-छांटने का प्रयास करेंगे, तो शायद अच्छी रचनाएं और कंटेंट दर्शकों को नहीं मिल पाएगा. इससे अंततः समाज का ही नुकसान है." इमरजेंसी के दौर में 'आंधी' जैसी फिल्मों पर प्रतिबंध की बात करते हुए दुर्गेश सिंह ने कहा कि ''आज का समय बदल गया है, आज की पीढ़ी पर रोक लगाकर चीजों को छुपाया नहीं जा सकता, वे खोज निकालेंगे. किसी को अंदाजा नहीं है कि ये पीढ़ी क्या-क्या ढूंढ़ निकाल लेगी. इसलिए मैं किसी भी तरह के बैन और सेंसर को सही नहीं मानता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कोई रोक टोक नहीं होनी चाहिए.''

    'गुल्लक सीजन 2' की कामयाबी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आम जनता से लेकर क्रिटिक्स तक हर वर्ग के दर्शकों को काम पसंद आया है. लोग संदेश भेज रहे हैं, अपने परिवार की ओर से भी संदेश भिजवा रहे हैं. बहुत प्यार मिल रहा है. खासतौर पर महिला फिल्म समीक्षकों ने लेखन को सराहा है और इससे उम्मीदों का बोझ बढ़ गया है, जिससे थोड़ा डर भी लग रहा है. गुल्लक के किरदारों को रचने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मां का किरदार बिल्कुल यथार्थ के करीब रखने की कोशिश की है और बाकी चीजों में थोड़ी कल्पना को भी जगह दी है. ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए कहानी लिखने की चुनौती पर बात करते हुए दुर्गेश ने कहा कि ये चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि भावनाओं का लूप बनाए रखना बहुत अहम होता है.

    लिखने के लिए हिंदी कविताओं को अपनी प्रेरणा बताते हुए दुर्गेश ने कहा कि एक-एक स्क्रिप्ट पर कई-कई बार मेहनत की गई है, कई बार तो एक ड्राफ्ट को 18-18 बार लिखा गया. हर किरदार को लिखने में 80 प्रतिशत अनुभव और 20 फीसदी व्यवहार को उतारा है. अपने जीवन में जो देखा और जाना है, उसी से किरदार रचे हैं. उन्होंने कहा कि अपनी कहानी के जरिए निम्न और मध्यम वर्ग की परेशानियों और संघर्षों को सामने रखने की कोशिश की है.

    गुल्लक और पंचायत जैसी छोटे बजट की फिल्मों और सीरीज के निर्माता द वायरल फीवर (टीवीएफ) की सफलता के कारणों पर उन्होंने जावेद अख्तर के हवाले से कहा कि इस देश में पलायन सालों से चल रहा है और सालों तक चलता रहेगा. खत्म नहीं होगा. छोटे शहर के लोग बड़े शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं और गांवों से लोग छोटे शहरों की तरफ जा रहे हैं. ऐसे में जब पलायन कर शहरों में बसे लोगों की कहानी कही जाएगी, तो लोग सारे काम छोड़कर उसे देखेंगे. इसलिए छोटे शहरों की कहानी पसंद की जा रही हैं.

    उन्होंने कहा, "गुल्लक और पंचायत जैसे दो कार्यक्रम ऐसे हैं, जिन्होंने गांव से छोटे शहरों में पलायन करने वाले लोगों की भावनाओं को छुआ है. गांवों से पलायन कर जो लोग लखनऊ, भोपाल, जयपुर, कानपुर, अहमदाबाद और इंदौर जैसे शहरों में पहुंचे हैं, टीवीएफ ने उनको टारगेट किया है और यही इसकी कामयाबी का राज है. इसलिए पंचायत जैसा ड्रामा लिखने के लिए आपको जीवन का अनुभव होना चाहिए."

    ऑनलाइन कंटेंट पर कथित रूप से भावनाओं को आहत करने के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से ये काफी बढ़ा है. हमारा देश अच्छे श्रोता नहीं बना पाया, हम बोलते रहने वालों का देश बनकर रह गए हैं. हर कोई बोलना चाहता है और हर कोई बोलेगा तो आवाजें टकराएंगी. दरअसल सुनने वाले नहीं हैं, अगर सुनने वाले होते तो आवाजें हम टकरातीं. दुर्गेश ने कहा कि अगर एक पिता के तौर पर मैं अपने बच्चे की आवाज नहीं सुनूंगा, तो मैं उसका अच्छे से पालन-पोषण भी नहीं कर पाऊंगा. इसलिए सवाल पूछने की स्वतंत्रता और दूसरे को सुने जाने का धैर्य होना चाहिए.

    बता दें कि दुर्गेश सिंह ने गुल्लक 2 के लिए कहानी लिखने से पहले सीजन 1 और पंचायत सीरीज के गाने भी लिखे. फिल्म और पटकथा लेखन के क्षेत्र में कदम रखने से पहले उन्होंने कई सालों तक एडवरटाइजिंग की दुनिया में काम किया है. अब उनकी निगाहें गुल्लक-3 और पंचायत-3 लिखने पर है. दुर्गेश सिंह का ताल्लुक पूर्वी उत्तर प्रदेश के जौनपुर से है.

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