फिल्म समीक्षा: 'जॉली एलएलबी– 2' के हर सीन में आपको आएगी अरशद वारसी की याद

News18India
Updated: August 4, 2017, 12:42 PM IST
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'जॉली एलएलबी– 2' की कहानी में आतंकवाद, भ्रष्टाचार, सरकारी बाबुओं की लापरवाही और एक मर्डर भी है. इन सबके बीच कुछ जोक्स भी ठूसे गए हैं और अक्षय कुमार जैसे बड़े स्टार को पर्दे पर उतार दिया है. तैंतीस दिन में बनकर तैयार हुई 'जॉली एलएलबी-2' पहली जॉली की गुडविल भुनाने की चालाक कोशिश है.

एक बड़े वकील का मुंशी जॉली यानि जगदीश चंद्र खुद भी वकालत करना चाहता है मगर उसे मौका नहीं मिल रहा. एक ग़रीब औरत के पति की रिहाई का केस मिलता है तो जॉली उसे पैसे हड़पकर अपना चेंबर खोल लेता है, इससे आहत वह औरत आत्महत्या कर लेती है. जॉली की आत्मा हिल जाती है और वह इंसाफ की लड़ाई शुरू करता है.

अक्षय में स्टारडम है कोई शक नहीं, लेकिन अगर आपने पहली जॉली देखी है, तो हर सीन में आपको अरशद वारसी की याद आएगी. सुभाष कपूर देसी आदमी हैं, लेकिन लगता है इस बार वो स्टूडियो और पीआर के अंग्रेज़ी इंटलैक्ट का शिकार हो गए. जॉली की कहानी, स्क्रीनप्ले और अदाकारों से वो मासूमियत और वो सच्चाई ग़ायब है, जो पिछली फिल्म में थी.

सभी कलाकारों ने अपना काम बखूबी किया है मगर प्रभावित कोई नहीं करता, ऐसा लग रहा है मानो सौरभ शुक्ला जैसे कलाकार भी जल्दबाज़ी में अपना सीन निपटा रहे हों. अब अगर इस फिल्म को पिछली से जोड़कर ना भी देखें तो अपने आप में भी ये 'जॉली एलएलबी -2' का मुकदमा काफी कमजोर है. बीटीटडीडी फिल्म रिव्यू में 'जॉली एलएलबी-2' को पांच में से सिर्फ दो स्टार्स मिलते हैं. हालांकि अक्षय कुमार की मौजूदगी फिल्म के बिजनेस के लिए एक इंश्योरेंस की तरह है.

First published: February 10, 2017
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