HBD: नवाबी खानदान में पैदा हुई थीं जोहरा सहगल, मर्जी से शादी करने पर हुआ था खूब बवाल

जोहरा सहगल का पूरा नाम साहिबजादी जोहरा मुमताज-उल्लाह-खान बेगम था. फाइल फोटो

जोहरा सहगल का पूरा नाम साहिबजादी जोहरा मुमताज-उल्लाह-खान बेगम था. फाइल फोटो

Happy Birthday Zohra Sehgal: जोहरा सहगल (Zohra Sehgal) आज हमारे बीच में नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें हमारे बीच हमेशा रहेंगी. उनके जन्मदिन पर जानिए कुछ रोचक बातें. 

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 27, 2021, 8:20 AM IST
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मुंबई. जोहरा सहगल (Zohra Sehgal) हिंदी सिनेमा की एक वो एक्ट्रेस जो अपनी जिंदादिली से कभी बूढ़ी नहीं हुईं. आजादी से पहले ही ये नाम दुनिया की उन गिनी-चुनी भारतीय महिलाओं में से एक है, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली. आज उन्हीं जोहरा सहगल का जन्मदिन है. जोहरा सहगल का जन्म 27 अप्रैल 1912 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर (Saharanpur) में हुआ था. आज वह हमारे बीच में नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें हमारे बीच हमेशा रहेंगी.

रामपुर रियासत के नवाबी खानदान में पैदा हुईं जोहरा

जोहरा सहगल 27 अप्रैल 1912 को रामपुर रियासत के नवाबी खानदान में पैदा हुईं. उनका पूरा नाम साहिबजादी जोहरा मुमताज-उल्लाह-खान बेगम था. रामपुर की रोहिल्ला पठान फैमिली के दो बच्चों जकुल्लाह और हजराह की पैदाइश के बाद तीसरे नंबर पर मुमताजुल्लाह पैदा हुईं. उनके 7 भाई-बहन थे.

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बचपन में खो चुकी थीं एक आंख

सुन्नी पठान मुस्लिम परिवार में जन्मी जोहरा सहगल ने महज एक साल की उम्र में ग्लूकोमा की वजह से वह अपनी एक आंख की रोशनी खो दी थीं, लेकिन इलाज के बाद उन्हें दिखाई देने लगा था.

बचपन में ही मां का हो गया था इंतकाल



जोहरा की मां का निधन उनके बचपन में हो गया था तो पिता ने जोहरा मुमताज को पढ़ने के लिए लाहौर भेज दिया. वहां के क्वीन्स मैरी स्कूल में उनका दाखिला हो गया. ये स्कूल भारत में आजादी से पहले का इंटरनेशनल स्कूल माना जाता है. इसमें सिर्फ लड़कियों की शिक्षा-दीक्षा होती थी. स्कूल की प्रिंसपल भी एक अंग्रेज महिला थीं. जोहरा इस स्कूल की लगातार टॉपर रहीं.

10वीं में तीन बार हुईं फेल

जोहरा सहगल जिस स्कूल में पढ़ती थीं, तब वह 10वीं तक ही था. जोहरा की उम्र 15 साल हो गई थीं. पिता ने मन बना लिया था कि दसवीं के बाद उनकी शादी कर देंगे, लेकिन ये बात प्रिंसिपल को पसंद नहीं, क्योंकि वो शादी के खिलाफ थीं. इसलिए जोहरा को लगातार तीन साल तक दसवीं में रहने की खातिर फेल किया गया.

 बचपन से ही जोहरा को डांसिंग और एक्टिंग का काफी शौक था. देहरादून के डांसर और कोरियोग्राफर उदय शंकर का डांस देखकर वह काफी प्रभावित हुईं. इसके बाद उन्होंने उनकी डांस अकेडमी भी ज्वॉइन की. यहीं उनकी मुलाकात कमेश्वर सहगल हुई. कुछ ही समय में दोनों को प्यार हो गया. कमेश्वर सहगल इंदौर के कुछेक युवा वैज्ञानिकों में से एक थे, जिन्हें डांसिंग और पेंटिंग का भी शौक था.

डांस की थीं शौकीन

अपने बचपन के दिनों में जोहरा एक टॉमबॉय की तरह रहती थीं. यही कारण था कि अन्य बच्चों की तरह खिलौनों से खेलने की बजाय पेड़ पर चढ़ना और बाहर जाकर खेलना उनकी आदतों में शुमार था. जोहरा का बचपन से ही बहुत अड़ियल रवैया था. वहीं, देहरादून में एक समारोह में मशहूर डांसर और कोरियोग्राफर उदय शंकर के नृत्य से जोहरा खूब प्रभावित हुईं. यहां से जोहरा के अंदर नृत्य को सीखने की ज्वाला जाग उठी.

कार से घूमीं पूरी दुनिया

आपको बता दें कि जोहरा ने बहुत कम उम्र में अपनी मां को खो दिया था. जोहरा की मां चाहती थीं कि जोहरा समेत उनकी सभी बच्चे लाहौर के क्वीन मैरी कॉलेज में पढ़ाई करें. जोहरा को देश विदेश घूमने-फिरने, अलग-अलग संस्कृति और परंपरा को जानने में दिलचस्पी थीं. वह अपने अंकल के साथ कार में लगभग पूरा भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप की यात्रा कर चुकी थीं. वहीं, लौटने के बाद जोहरा को लाहौर के क्वीन मैरी गर्ल्स कॉलेज भेज दिया गया था.

 97 साल की उम्र में उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में पूछे गए सवालों के बहुत ही मजेदार जवाब दिए थे. उनसे पूछा गया कि इस उम्र में भी उनकी जिंदादिली का राज क्या है? उन्होंने बिंदास अंदाज में जवाब दिया- ह्यूमर और सेक्स. उन्होंने कहा था इस उम्र में भी उनके लिए सेक्स बहुत जरूरी है.

कामेश्वर सहगल को पहली नजर में दे बैठी थीं दिल

स्नातक करने के बाद जोहरा ने मशहूर डांसर उदय शंकर के ग्रुप को ज्वॉइन कर लिया. उन्होंने साल 1935 से 1940 तक उदय शंकर के साथ जापान, मिस्त्र, यूरोप और अमेरिका में कई जगह परफॉर्म किया. इसके बाद वह उदय शंकर के डांस ग्रुप की ट्रेनर बन गईं. यहां उनकी मुलाकात इंदौर के एक वैज्ञानिक, पेंटर और डांसर कामेश्वर सहगल से हुई और दोनों एक-दूसरे के प्यार में पड़ गए.

घरवालों के खिलाफ जाकर की शादी

वहीं, दोनों के परिवार उनकी शादी के खिलाफ थे, लेकिन घरवालों के खिलाफ जाकर जोहरा और कामेश्वर ने साल 1942 में शादी कर ली. खुशवंत सिंह ने एक बार बताया था कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इनके वेडिंग रिसेप्शन में दस्तक देने वाल थे लेकिन साल 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन का समर्थन करने पर उन्हें रिसेप्शन से दो दिन पहले ही अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया.

बंटवारे के बाद बॉम्बे का रुख किया

1947 में भारत-पाक विभाजन के बाद जोहरा पति के साथ बॉम्बे (मुंबई) आ गईं. मुंबई आने के बाद जोहरा, पृथ्वीराज कपूर के थिएटर से जुड़ गईं और यहां उन्होंने बतौर स्टेज आर्टिस्ट तकरीबन 14 साल काम किया. जोहरा के दो बच्चे बेटी किरण और बेटा पवन हुए. जोहरा सहगल एक नास्तिक थीं और उनके पति जीवन भर एक 'गैर-धार्मिक' व्यक्ति बनकर रहे. वहीं, इनके बच्चे इन्हें न तो हिंदू मानते थे और न ही मुसलमान.
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