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D-Day: क्योंकि सपने देखने के पैसे नहीं लगते

बृज दुग्गल
Updated: July 19, 2013, 3:54 AM IST
D-Day: क्योंकि सपने देखने के पैसे नहीं लगते
जब अमेरिका ,पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मार सकता है तो हम इंडिया के मोस्ट वांटेड दाऊद इब्राहिम को क्यों नहीं पकड़ सकते। इस थीम के साथ बनाई गई है फिल्म D-Day.

जब अमेरिका ,पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मार सकता है तो हम इंडिया के मोस्ट वांटेड दाऊद इब्राहिम को क्यों नहीं पकड़ सकते। इस थीम के साथ बनाई गई है फिल्म D-Day.

  • Last Updated: July 19, 2013, 3:54 AM IST
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नई दिल्ली। जब अमेरिका ,पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मार सकता है तो हम इंडिया के मोस्ट वांटेड दाऊद इब्राहिम को क्यों नहीं पकड़ सकते। इस थीम के साथ बनाई गई है फिल्म D-Day। ये फिल्म कैसी है ये बताने से पहले मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि सपने देखने के पैसे नहीं लगते और अगर जेब में पैसा हो तो सपने सच करने की कोशिश भी की जा सकती है। हालांकि वो सपना सच होगा या नहीं, ये सपना दिखाने वाले यानि निर्माता या निर्देशक के हाथ में नहीं होता। कुछ ऐसा ही हाल लगता है D-Day के निर्देशक निखिल आडवाणी का भी होने वाला है।

थीम बहुत अच्छी है- दाउद को पकड़कर इंडिया लाना है, सिर्फ इस एक लाइन पर हिंदुस्तानियों की भावनाएं उफान मारेंगी, ये बात निर्देशक जानते हैं। इसलिए उन्होंने फिल्म में इस मुद्दे से जुड़ा हर मुमकिन मसाला डालने की कोशिश की है। एक शानदार थीम, इरफान खान, ऋषि कपूर, अर्जुन रामपाल और हुमा कुरैशी जैसे एक्टर लेकिन फिर भी D-Day में बहुत कुछ मिसिंग है। प्रोमो में तो सबकुछ अद्भुत नजर आता है लेकिन जब आप फिल्म देखते हैं तो पता चलता है कि जितने अच्छे प्रोमो बने हैं काश फिल्म भी उतनी ही बढ़िया होती। काश निर्देशक निखिल आडवाणी ये समझते कि सिर्फ भावनाओं के सहारे कोई फिल्म कामयाब नहीं होती ।

कहानी क्या है ?

दाऊद इब्राहिम को पकड़ने के लिए इंडियन खुफिया एजेंसी यानि RAW एक खास मिशन चलाती है ‘ऑपरेशन गोल्डमैन’। चार जासूस इरफान खान, अर्जुन रामपाल , हुमा कुरैशी और संदीप कुलकर्णी पाकिस्तान में दाउद को पकड़ने के लिए एक होटल में ऑपरेशन चलाते हैं। लेकिन वो ऑपरेशन फेल हो जाता है। उसके बाद चारों दोबारा वही ऑपरेशन लॉन्च करते हैं और कैसे कामयाब होते हैं यही इस फिल्म की कहानी है।

क्यों देखें ?
बहुत से लोगों का तर्क है कि हर हिंदुस्तानी को ये फिल्म देखनी चाहिए क्योंकि ये दाउद को इंडिया लाने की थीम पर बनी है। बिल्कुल सही बात है, अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो जरुर देखें। वैसे भी ये फिल्म एक खास दर्शक वर्ग को ध्यान में रखकर बनाई गई लगती है और ऐसा नहीं लगता है कि आम दर्शकों के लिए इस फिल्म में ज्यादा कुछ है। अगर आप एक्शन फिल्मों के शौकीन है, रोमांच आपको आकर्षित करता है और देशप्रेम की भावना का तड़का लगी ये फिल्म आप देख सकते हैं। फिल्म का म्यूजिक भी अच्छा है।

फिल्म की कमजोरी
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फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी तो ये है कि फिल्म न सिर्फ लंबी है बल्कि पहले हाफ के बाद बेहद बोर करती है। बिना वजह फिल्म के ज्यादातर सीन्स को खींचा गया है। फर्स्ट हाफ तक तो फिल्म की स्पीड तेज है और फिल्म आपको बांधे रखती है, लेकिन इंटरवल के बाद पता नहीं डॉयरेक्टर को क्या होता है, बिना वजह कलाकारों की निजी जिंदगी फिल्म में घुसा दी गई है। फिल्म के कई सीन अविश्वसनीय लगते हैं। भला कौन यकीन करेगा कि पाकिस्तान में इंडियन जासूस का मिशन फेल हो जाता है और वो वहां से निकलने की बजाय , दोबारा दाऊद को पकड़ने का प्लान करते हैं। डायरेक्टर उस वक्त जासूसों की निजी जिंदगी दिखाते हैं।

इस फिल्म को बनाने से पहले निखिल आडवाणी को इस थीम पर बहुत ज्यादा रिसर्च करनी चाहिए थी। अगर फर्स्ट हाफ की फिल्म को ही पूरी फिल्म में कन्वर्ट किया जाता तो यकीनन बेहद अच्छी और मनोरंजन फिल्म बनती।

डायरेक्टर – निखिल आडवाणी

निर्माता - DAR मोशन पिक्चर्स, Emmay एंटरटेनमेंट

कलाकार- ऋषि कपूर, अर्जुन रामपाल, इरफान खान, श्रुति हसन, हुमा कुरैसी

संगीत- शंकर-एहसान-लॉय



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First published: July 19, 2013, 3:54 AM IST
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