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Trivia : बॉलीवुड की ऐसी फिल्में जिनसे बहुत कुछ सीख सकते हैं डॉक्टर

Trivia : बॉलीवुड की ऐसी फिल्में जिनसे बहुत कुछ सीख सकते हैं डॉक्टर

'डॉक्टर्स डे' ट्रिविया सीरीज में पढ़िये उन फिल्मों के बारे में जो अपने डॉक्टरों के चलते आज भी याद की जाती हैं. और हमें बताइये इनमें से कौन आपकी पसंदीदा है?

'डॉक्टर्स डे' ट्रिविया सीरीज में पढ़िये उन फिल्मों के बारे में जो अपने डॉक्टरों के चलते आज भी याद की जाती हैं. और हमें बताइये इनमें से कौन आपकी पसंदीदा है?

'डॉक्टर्स डे' ट्रिविया सीरीज में पढ़िये उन फिल्मों के बारे में जो अपने डॉक्टरों के चलते आज भी याद की जाती हैं. और हमें बताइये इनमें से कौन आपकी पसंदीदा है?

    फिल्म के कुछ किरदार ऐसे होते हैं जो हमें जीवन भर याद रह जाते हैं. ऐसे ही डॉक्टरी के पेशे से जुड़े कुछ किरदारों का हम यहां जिक्र करने जा रहे हैं. इन ऑनस्क्रीन डॉक्टरों ने ऐसी जिम्मेदारी निभाई है कि लगता है कि इनसे रियल लाइफ डॉक्टर्स को भी बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है. आइये जानते हैं कौन हैं ये ऑनस्क्रीन डॉक्टर्स?

    एक क्लीशे लाइन है, 'डॉक्टर भगवान का रूप होता है.' लेकिन शायद ऐसा इसलिए कहा जाता है कि उसकी समझदारी से किसी की जान बच जाती है और कभी छोटी सी गलती से किसी का जान चली जाती है. ऐसे में भगवान की तरह उसके पास गलतियों की संभावना नहीं के बराबर होती है. हालांकि आजकल कमर्शियल इंट्रेस्ट के चलते डॉक्टर्स की छवि धूमिल भी हुई है. फिर भी आज डॉक्टर्स के प्रोफेशन की दूसरे किसी प्रोफेशन के मुकाबले बहुत ज्यादा इज्जत है. आज हम हिंदी फिल्मों के डॉक्टर वाली फिल्मों को रीविजिट कर रहे हैं. और जानने की कोशिश कर रहे हैं कि डॉक्टरों पर बनी ये फिल्में क्यों खास हैं?

    डॉ कोटनीस की अमर कहानी



    इस लिस्ट में जो एकमात्र फिल्म दिमाग में सबसे पहले आ सकती है वह है डॉ कोटनीस की अमर कहानी. 1946 में यह फिल्म एक सच्ची कहानी पर केंद्रित है और बॉलीवुड के बेहतरीन डायरेक्टर्स में से एक व्ही. शांताराम ने बनाई है. फिल्म में डॉ कोटनीस के प्रोफेशनल कमिटमेंट के साथ देशभक्ति का तड़का है. फिल्म में डॉ कोटनीस के रोल में वी. शांताराम खुद हैं. फिल्म में डॉ कोटनीस को जिस तरह से डॉक्टर को अपने काम को करते दिखाया गया है किसी भी डॉक्टर के लिये एक आदर्श हो सकता है.

    आनंद



    1971 में आई ऋषिकेश मुखर्जी की इस फिल्म में डॉ का रोल अमिताभ बच्चन ने निभाया है. कहा जाता है कि इस रोल को अमिताभ बच्चन ने इतने अच्छे से निभाया था कि राजेश खन्ना को भी जलन हो गई थी. अमिताभ बच्चन के निभाये सबसे बेहतरीन किरदारों में से एक इस किरदार को माना जाता है. वह एक ऐसे डॉक्टर बने हैं जो जब बीमारी का इलाज दवाओं में नहीं खोज पाता तो अपने मरीज का दर्द कम करने के लिये दूसरे रास्ते तलाश करता है. फिल्म से यह संदेश निकलता है कि एक डॉक्टर और मरीज के रिश्ते की नींव भी तमाम दूसरे रिश्तों की तरह विश्वास और आशा पर टिकी होती है. आनंद फिल्म ने हमें ऐसे गाने भी दिये हैं जिन्हें हम आज भी पसंद करते हैं और सुनते हैं. आनंद के डॉक्टर को देखने के बाद हम अपने जीवन के सारे बुरे डॉक्टरों के एक्सपीरियंस भूल जाते हैं. हमें विश्वास होने लगता है कि भले ही मेडिकल सिस्टम खराब होता जा रहा हो पर कुछ डॉक्टर्स आज भी बहुत भले हैं.

    खामोशी (1970)



    जब कोई डॉक्टरी के पेशे की बात कर रहा हो तो नर्सों के जिक्र के बिना बात पूरी ही नहीं हो सकती. और वह भी जब नर्स के किरदार में वहीदा रहमान हों तो बात और खास हो जाती है. खामोशी में वहीदा रहमान का नर्स का रोल नर्सों के मानवीय पक्ष को रेखांकित करता है. नर्स जो हमें हॉस्पिटल में बिल्कुल मशीनी और असंवेदनशील दिखती हैं, भावनाएं उनमें भी होती हैं. ऐसी ही एक नर्स वहीदा रहमान को इस फिल्म में प्यार हो जाता है. और दिल टूटने से वह इतनी डरी है कि अब इस फेर में नहीं पड़ना चाहती. बारीकी से बुने इस रोल को वहीदा रहमान ने जबरदस्त ढंग से निभाया है.

    एक डॉक्टर की मौत (1991)



    1990 में आई तपन सिन्हा की फिल्म एक डॉक्टर की मौत में पंकज कपूर ने एक रिसर्चर-डॉक्टर की भूमिका निभाई है. फिल्म में डॉक्टर कम उम्र में ही एक ऐसी दवा की खोज कर लेता है जो कुष्ठ रोग के इलाज में सक्षम है. ये एक ऐसी खोज है जिसके चलते उसे दुनिया भर से सम्मान और प्रतिष्ठा मिल सकती है और इसकी शुरुआत भी होने लगती है पर तभी ब्यूरोक्रेसी के चलते उसे किसी सुदूर के जिले में पोस्ट कर दिया जाता है. फिर एक दिन फिर वह डॉक्टर देखता है कि उसका रिसर्च किसी अमेरिकन डॉक्टर के नाम से एक रिसर्च जर्नल में प्रकाशित है. बड़ी ही चतुराई से यह फिल्म सिस्टम की नाकामी के चलते डॉक्टर्स के चिढ़े होने या दूसरे देशों में जाकर बस जाने की समस्या को दिखाती है.

    मुन्नाभाई एमबीबीएस (2003)



    मजेदार तरीके से राजकुमार हीरानी ने संजय दत्त को फर्जी डॉक्टर बना डॉक्टरों के मानवीय पक्ष को फिल्म में उकेरा है. एक डॉक्टर जो सारे तरीके फेल होने पर भी चमत्कार में विश्वास करता है. यह फिल्म आज भी लोगों को बहुत भाती है. फिल्म उस अकेलेपन के माहौल पर भी सवाल खड़े करती है जिसमें किसी रोगी को धकेल दिया जाता है. फिल्म ऐसे रोगियों को साधारण माहौल में वापस लाने की बात करती है. और कहती है कि ऐसे लोगों को भी जिंदगी को खुलकर जीने दिया जाये.

    इसमें कोई शक नहीं है कि डॉक्टर लगातार बहुत अधिक दबाव के बीच अपना काम करते हैं. उनकी छोटी सी गलती से भी बड़ी दुर्घटनाएं हो सकती हैं. पर ये डॉक्टर ऐसे हैं जो प्रोफेशनल होने के साथ ही अपने मरीजों से एक ऐसा रिश्ता कायम करते हैं कि बीमार होने के बावजूद भी उनके पेशेंट्स के लिये जिंदगी खुशनुमा हो जाती है. जरूर ऐसे डॉक्टर्स से रियल लाइफ डॉक्टर्स भी धैर्य, संयम के साथ लोगों को अनोखे तरीकों से ट्रीट करना सीख सकते हैं.

    यह भी पढ़ें : बॉलीवुड से जुड़ा एक ऐसा डॉक्टर, जिससे 90 के दशक में जवान हुआ हर आदमी चिढ़ता है

    Tags: Amitabh bachchan, Bollywood, Rajesh khanna, Sanjay dutt, Shabana azmi, Trivia, Trivia Cinema

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