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भ्रमम
भ्रमम
3.5/5
पर्दे पर:7 अक्टूबर, 2021
डायरेक्टर : रवि के. चंद्रन
संगीत : जैक्स बिजॉय
कलाकार : पृथ्वीराज सुकुमारन, उन्नी मुकुंदन. ममता मोहनदास, शंकर पणिकर, राशि खन्ना
शैली : क्राइम थ्रिलर. ब्लैक कॉमेडी
यूजर रेटिंग :
0/5
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Bhramam Review: अब सिर्फ खड़ी बोली में "अंधाधुन" का रीमेक बाक़ी है?

भ्रमम (Bhramam), आयुष्मान खुराना की अंधाधुन की रीमेक है. (फोटो साभारः इंस्टाग्रामः @therealprithvi)

भ्रमम (Bhramam), आयुष्मान खुराना की अंधाधुन की रीमेक है. (फोटो साभारः इंस्टाग्रामः @therealprithvi)

Bhramam Movie Review: रीमेक बनाना आसान भी है और कठिन भी. आसान इसलिए कि फिल्म की स्क्रिप्ट पूरी तैयार होती है. इसके अलावा शूटिंग स्क्रिप्ट भी तैयार होती है. कठिन इसलिए होता है कि ओरिजिनल फिल्म सफल है. उसे कई लोग देख चुके हैं. 'भ्रमम' (Bhramam)" ऐसी कोई गलती करती नजर नहीं आती है. फ्रेम बाय फ्रेम फिल्म जैसी की तैसी रखी गयी है.

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हेमंत एम राव को दोषी ठहराया जाना चाहिए. कन्नड़ फिल्म निर्देशक हेमंत. इन्हीं के कहने पर निर्देशक श्रीराम राघवन (Sriram Raghavan) ने देखी, एक अंधे पियानो वादक की कहानी पर बनी फ्रेंच फिल्म “ल कॉर्डर” यानि पियानो ट्यून करने वाला. यहां से उनके दिमाग में आयडिया आया एक अंधे पियानो वादक की जिन्दगी पर एक मर्डर, क्राइम, सस्पेंस थ्रिलर फिल्म बनाने का और जन्म हुआ ‘अंधाधुन (Andhadhun)” का. नाम में भी उन्होंने थोड़ी कलाकारी की. अंधा और धुन मिला कर अंधाधुन रफ्तार वाली फिल्म बना दी. पहले क्रिटिक्स ने पसंद किया, फिर दर्शकों ने और फिर तो होड़ लग गयी कि इसका किस किस भाषा में रीमेक बनाया जा सकता है, प्रयोग किया जाए. 7 सितम्बर 2021 को इसका मलयालम वर्जन रिलीज हुआ है अमेजॉन प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) पर.

रीमेक बनाना आसान भी है और कठिन भी. आसान इसलिए कि फिल्म की स्क्रिप्ट पूरी तैयार होती है. इसके अलावा शूटिंग स्क्रिप्ट भी तैयार होती है. अभिनय के पैमाने भी तय होते हैं यानि फिल्म को जैसे का तैसा बनाना होता है. कठिन इसलिए होता है कि ओरिजिनल फिल्म सफल है. उसको कई लोग देख चुके हैं और स्वाभाविक तौर पर तुलना की जायेगी. इसमें एक तरह का रिस्क भी होता है कि कहीं कुछ भी चूक गए, या कहानी के परिवेश को बदलने का काम हो, तो संभव है कि दर्शक इसे सिरे से नकार दें. “भ्रमम (Bhramam)” ऐसी कोई गलती करती नजर नहीं आती है. फ्रेम बाय फ्रेम फिल्म जैसी की तैसी रखी गयी है. इसमें ख़ास बात ये है कि ये फिल्म फिर भी नयी लगती है क्योंकि इसके प्रमुख कलाकार पृथ्वीराज, राशि खन्ना या ममता मोहनदास अपने आप में मंजे हुए कलाकार हैं.

इनके अभिनय में इनकी अपनी पहचान नज़र आती है और इसलिए रीमेक होने के बावजूद, इस फिल्म को देखना अच्छा लगता है. अंधाधुन की कहानी में हेमंत राव, श्रीराम राघवन, अरिजीत बिस्वास (बंगाली फिल्मों के लेखक और निर्देशक), योगेश चांदेकर ने ज़बरदस्त सस्पेंस बनाये रखा है. श्रीराम राघवन की जादू की छड़ी, लेखिका और एडिटर पूजा लड्ढा सूरती के हाथ होती है. पूजा ने श्रीराम की प्रत्येक फिल्म या तो लिखी है या एडिट की है. अंधाधुन के हर सीन में पूजा की लेखनी का कमाल साफ़ देखा जा सकता है. भ्रमम ने इसे बदलने की गलती बिलकुल नहीं की है.

पृथ्वीराज सुकुमारन करीब सवा सौ फिल्मों में काम कर चुके हैं, नेशनल अवॉर्ड जीत चुके हैं और मलयालम फिल्मों के सबसे सफल अभिनेताओं में गिने जाते हैं. सरल, सहज, सौम्य व्यक्तित्व के धनी पृथ्वीराज ने भ्रमम में एक चालाक पियानो वादक की भूमिका में बेहतरीन अभिनय किया है. कई दृश्यों में वो आयुष्मान खुराना से बेहतर नज़र आये हैं. पृथ्वीराज का अभिनय अव्वल दर्ज़े का है. उनकी गर्लफ्रेंड की भूमिका में हैं राशि खन्ना. दिल्ली की राशि, आईएएस बनाना चाहती थीं. एक एडवरटाइजिंग फर्म में काम करते करते उन्होंने कुछ एडवर्टिजमेंट फिल्मों में काम किया और फिर धीरे से बड़े परदे पर आ गयी. राशि सुन्दर तो हैं हीं, सफल भी हैं और इस फिल्म में उन्होंने अच्छा काम किया है. अंधाधुन में राधिका आप्टे का रोल तो अच्छा था लेकिन वो हर रोल में एक जैसा अभिनय करती हैं. राशि इस मामले में बाज़ी मार गयी हैं.

दो अन्य प्रमुख भूमिकाओं में हैं उन्नी मुकुन्दन जो बने हैं सर्किल इंस्पेक्टर दिनेश प्रभाकरन और उनकी माशूका, इस फिल्म की असली हीरोइन ममता मोहनदास जिन्होंने तब्बू वाली भूमिका निभाई है. वैसे तो ममता एक सक्षम और प्रतिभाशाली अभिनेत्री हैं लेकिन तब्बू ने जो किरदार हिंदी वर्शन में निभाया है, उसके आसपास भी नहीं पहुँच पायी है. दूसरे कलाकार अपनी अपनी जगह अच्छे से किरदार निभाते हुए नज़र आते हैं. फिल्म का एक मज़बूत पक्ष फिल्म का संगीत है. मलयालम सिनेमा के संगीत की दुनिया में जैक्स बिजॉय ने तहलका मचा रखा है. पिछले कुछ सालों से हर सफल और हट-के सिनेमा के संगीत के पीछे जैक्स का ही संगीत होता है. मुन्तिरिपूवो नाम का गाना अच्छा बना है.

अधिकांश सस्पेंस फिल्मों में कई कहानियां एक साथ चलती है लेकिन वो किसी एक मूल कहानी से जुड़ती बिछड़ती हैं. भ्रमम या अंधाधुन की खासियत है एक मूल कहानी और कुछ छोटी छोटी सह-कहानियां जो सब मूल कहानी की शाखाओं की तरह लगती है. फिल्म के सिनेमेटोग्राफर रवि के. चंद्रन ही फिल्म के निर्देशक हैं. ये उनके द्वारा निर्देशित दूसरी फिल्म है. रवि ने सिनेमेटोग्राफी के लिए ढेरों अवार्ड जीते हैं. दिल चाहता है, युवा, स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर, विरासत, सावरिया और भी कई फिल्में हैं जिनमें रवि के कैमरा वर्क का जादू चला है. फिल्म के एडिटर उन्ही के मित्र, श्रीकर प्रसाद हैं जिन्होंने अब तक 100 से भी अधिक फिल्मों की एडिटिंग की है, नेशनल अवॉर्ड से लेकर केरला स्टेट फिल्म अवार्ड्स विजेता श्रीकर, इस फिल्म की रफ़्तार बनाये हुए हैं.

भ्रमम देखना चाहिए. अंधाधुन को रिलीज़ हो कर भी 3 साल हो गए हैं. फ्रेंच फिल्म पर आधारित इस कहानी के रीमेक बन रहे हैं. तेलुगु में माइस्ट्रो नाम से फिल्म रिलीज़ हो चुकी है. भ्रमम की भाषा मलयालम है. तमिल रीमेक भी जल्द ही आने वाला है. लगता है जैसे ये फिल्म हर भाषा में डब कर के रिलीज की जानी चाहिए.

डिटेल्ड रेटिंग

कहानी:
/5
स्क्रिनप्ल:
/5
डायरेक्शन:
/5
संगीत:
/5

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