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Film Review: जलते-बुझते बल्ब जैसी है 'बत्ती गुल मीटर चालू'

बत्ती गुल मीटर चालू
बत्ती गुल मीटर चालू
2/5
पर्दे पर:22 सितंबर
डायरेक्टर : श्री नारायण सिंह
संगीत : अनु मलिक
कलाकार : शाहिद कपूर, श्रद्धा कपूर, दिव्येंदु शर्मा
शैली : ड्रामा
यूजर रेटिंग :
0/5
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Film Review: जलते-बुझते बल्ब जैसी है 'बत्ती गुल मीटर चालू'

बत्ती गुल मीटर चालू

बत्ती गुल मीटर चालू

'टॉयलेट-एक प्रेमकथा' जैसी फिल्में देने वाले श्री नारायण सिंह से उम्मीदें काफी ज्यादा थीं, ऐसे में बत्ती गुल मीटर चालू खरी उतरती नहीं दिखती

  • News18Hindi
  • Last Updated :
    विवेक शाह

    उत्तराखंड के टिहरी की पृष्ठभूमि में बनी फिल्म बत्ती गुल मीटर चालू का निर्देशन किया है श्री नारायण सिंह ने. श्री ने ही टॉयलेट- एक प्रेम कथा बनाई थी. बत्ती गुल मीटर चालू उत्तरी भारत में बिजली के संकट, बढ़े हुए बिल और खराब बिजली मीटर्स की समस्या से जूझते आम आदमी का मुद्दा उठाती है. इसके जरिये शाहिद और श्री नारायण सिंह पहली बार साथ आए हैं. फिल्म में शाहिद, श्रद्धा और यामी गौतम मुख्य भूमिका में हैं.

    एसके की भूमिका में शाहिद, नॉटी की भूमिका में श्रद्धा कपूर और त्रिपाठी की भूमिका में दिव्येंदु शर्मा तीनों बचपन के दोस्त हैं. एसके एक ऐसा वकील है, जो कोर्ट के बाहर ही सेटलमेंट कराकर पैसा बनाता है. नॉटी एक फैशन डिजाइनर है, जो अपने बारे में काफी ऊंची सोच रखती है. इस कहानी में तब तक सब कुछ ठीक चलता है, जब तक कि त्रिपाठी अपनी एक प्रिंटिंग प्रेस शुरू नहीं करता है. इस प्रेस के खुलने के कुछ ही दिन बाद उसके पास डेढ़ लाख रुपये का बिजली का बिल आता है. ये बिल कुछ ही महीनों में 54 लाख तक पहुंच जाता है. उसे मालूम नहीं चलता कि ऐसे में क्या किया जाए, किसके पास शिकायत की जाए, ऐसे में त्रिपाठी आत्महत्या कर लेता है.

    इन सारी घटनाओं से एसके को बड़ा धक्का लगता है और उसका हृदय परिवर्तन हो जाता है. वो बढ़े हुए बिजली बिलों की जिम्मेदार प्राइवेट इलेक्ट्रिसिटी कंपनी एसपीटीएल के खिलाफ लड़ने का फैसला करता है. अब आगे क्या होता है, इसी पर कहानी बढ़ती है. फिल्म का पहला हिस्सा काफी दर्द भरा है. इंटरवल के बाद फिल्म रफ्तार पकड़ती है. इसके बाद काफी सीन कोर्टरूम से जुड़े हैं. हम यामी गौतम को एक वकील के तौर पर देखते हैं.

    फिल्म के गाने सिर्फ एक सजावटी सामान जैसा काम करते हैं. शाहिद की एक्टिंग अच्छी है, जिसके एकसाथ कई शेड्स नजर आते हैं. फिर भी ऐसा लगता है कि फिल्म में उनका टैलेंट काफी वेस्ट हुआ
    है और उन्हें दबाव देकर डायलॉग्स बुलवाए गए हैं. बाकी सभी कलाकारों की एक्टिंग भी ठीक ही कही जा सकती है.

    स्क्रीनप्ले और एडिटिंग भी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती है. कुल मिलाकर देखा जाए, तो एक बेहतरीन फिल्म बनाते-बनाते चूक हो गई लगती है. कहा जाना चाहिए कि टॉयलेट- एक प्रेमकथा जैसी फिल्म देने वाले श्री से उम्मीदें कुछ ज्यादा थीं, जो इस फिल्म के जरिये पूरी नहीं हो पाईं.

    इस फिल्म का अंग्रेजी रिव्यू आप यहां PickdFlick पर पढ़ सकते हैंundefined

    डिटेल्ड रेटिंग

    कहानी:
    2/5
    स्क्रिनप्ल:
    1.5/5
    डायरेक्शन:
    1.5/5
    संगीत:
    1.5/5

    Tags: Bollywood, Movie reviews, Shahid kapoor, Yami gautam

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