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तुम्बाड
तुम्बाड
3/5
पर्दे पर:12 अक्टूबर
डायरेक्टर : आनंद गांधी
संगीत : अजय अतुल
कलाकार : सोहम शाह
शैली : पीरियड फैंटेसी हॉरर फिल्म
यूजर रेटिंग :
0/5
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Film Review Tumbadd: आप लालची हैं तो ज़रूर पसंद आएगी ये फिल्म

तुम्बाड फिल्म का दृश्य

तुम्बाड फिल्म का दृश्य

इस फिल्म के निर्माण की कहानी बहुत दिलचस्प है. 6 सालों से निर्माता सोहम शाह इस फिल्म को बनाने की कोशिश कर रहे थे.

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तुंबाड़, महाराष्ट्र में मौजूद एक गांव पर बनी इस कहानी का वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन जब आप इस फिल्म को देखते हैं तो हॉल से निकलते ही पहला काम आप करेंगे, तुंबाड़ को खोजने का.
निर्माता-निर्देशक आनंद एल राय वैसे तो सिर्फ प्रेम कहानियां बनाते हैं, जैसे तनु वेड्स मनु, रांझणा, लेकिन इस बार उन्होंने अपना हाथ एक हॉरर फिल्म पर रखा है.

इस फिल्म के निर्माण की कहानी बहुत दिलचस्प है. 6 सालों से निर्माता सोहम शाह इस फिल्म को बनाने की कोशिश कर रहे थे. उनको इस कहानी में इतना भरोसा था कि उन्होंने इस फिल्म को किसी और को नहीं दिया और धीरे धीरे वो इस पर काम करते रहे.

इस फिल्म से आनंद 6 महीने पहले जुड़े और फिर इस फिल्म को एक बार में ही पूरा कर लिया गया और अब जब ये फिल्म आपके सामने हैं तो बहुत अलग टेस्ट की फिल्म बन पड़ी है. दुनिया को रचने वाली पहली देवी की कोख से निकलने वाले पहले देवता हस्तर के पास दुनिया का सारा सोना छिपा है. हस्तर से इस सोने को हासिल करने के लिए आपको हस्तर को रोटी खिलानी पड़ती है. लेकिन हस्तर को रोटी खिलाने में एक समस्या है, जिसको हस्तर छू लेता है वो अमर हो जाता है, ऐसा अमर, कि वो मौत की भीख मांगे तो भी उसे न मिले. लेकिन सोने का लालच इंसान को हस्तर के पास फिर लाता है और इस बार वो ज्यादा सोना पाना चाहता है...पर हस्तर का वरदान ‘अमरता’ किसी श्राप से कम नहीं...

Tumbadd
तुम्बाड


फिल्म के मुख्य अभिनेता हैं सोहम शाह और वही हैं फिल्म की सबसे कमज़ोर कड़ी. सोहम के अलावा इस फिल्म में सभी लोग कमाल का अभिनय करते हैं और अगर सोहम की खुद को हीरो रखने की ज़िद्द न होती तो शायद इस फिल्म को एक लेवल और उपर ले जाया जा सकता था. फिल्म एक लोक कहानी को कहती है और अगर आप देवी देवताओं की कहानियों को सुनते सुनाते आए हैं तो आपको ये फिल्म बहुत अच्छी लगेगी.

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खज़ाने की खोज, भूतिया किरदार, अमरता वरदान, स्वर्ग का रास्ता जैसी चीज़ें आपको एक अलग दुनिया में ले जाती हैं. फिल्म का मज़बूत पक्ष है इसकी सिनेमैटोग्राफी, महाराष्ट्र के बारिश के मौसम को इतनी खूबसूरती से बहुत कम फिल्मों में फिल्माया गया है. फिल्म का बैकग्राउंड संगीत फिल्म में आपको बांधे रखता है और सिरहन पैदा करता है.

फिल्म में तीन निर्देशकों ने अपना काम किया है और इसका नकारात्मक असर जहां जल्दी जल्दी बदलती कहानी में नज़र आता है वहीं अंत में इस कहानी को ऐसे रोचक अंत पर छोड़ना मज़ेदार लगता है.
बहुत इच्छा है कि इस कहानी के बारे में और लिख दूं लेकिन इससे ज्यादा लिखने से कहानी का सस्पेंस खराब होगा. बस बात इतनी है कि इस फिल्म को देखने के बाद अगर आप सोचने पर मज़बूर हुए तो समझ लीजिएगा कि आप लालची हैं.

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डिटेल्ड रेटिंग

कहानी:
4/5
स्क्रिनप्ल:
3/5
डायरेक्शन:
2.5/5
संगीत:
2.5/5

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