अंधाधुन
3.5/5
पर्दे पर : 10-अक्टूबर-2018
डायरेक्टर : श्रीराम राघवन
संगीत : अमित त्रिवेदी
कलाकार : आयुष्मान खुराना, राधिका आप्टे, तबू
शैली : थ्रिल-सस्पेंस
यूजर रेटिंग :
0/5
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Movie Review: 'अंधाधुन' देखने के बाद तबू से डरने लगेंगे आप!

फिल्म अंधाधुन धीमी रफ्तार से शुरू होती है, लेकिन फिर इसकी कहानी आपको जकड़ लेगी. तबू अपने किरदार में इतनी घातक लगीं हैं कि सामने बैठे दर्शकों को भी उनसे डर लगने लगता है.

Avinash Dwivedi | News18Hindi
Updated: October 5, 2018, 4:50 PM IST
Movie Review: 'अंधाधुन' देखने के बाद तबू से डरने लगेंगे आप!
फिल्म में तब्बू का अभिनय प्रभावित करता है.
Avinash Dwivedi | News18Hindi
Updated: October 5, 2018, 4:50 PM IST
अविश्वास अगर आपकी नसों में घुस जाए तो आप अपनी परछाई से भी डरने लगते हैं. ऐसा ही अनुभव आपको श्रीराम राघवन की फिल्म अंधाधुंध देखकर होगा. आप लगातार धोखे से भरी दुनिया में गहरे धंसकर जब थिएटर से निकलेंगे तो खुद पर भी विश्वास नहीं कर पाएंगे और यही इस फिल्म की सफलता है.

इस फिल्म की शुरुआत धीमी है, लेकिन कहानी धीरे-धीरे रचना शुरू हो जाती है. कहानी एक ऐसे संगीतकार आकाश (आयुष्मान खुराना) की है, जो अपनी एक मान्यता के चलते एक नेत्रहीन की तरह रहने लगता है. नेटफ्लिक्स से निकल कर राधिका आप्टे सिनेमा में भी खूब दिखने लगी हैं. राधिका और आयुष्मान के बीच प्यार पनपने लगता है और राधिका अपने पिता के 'पब' में उसे पियानो प्लेयर की जॉब भी दिला देती हैं, लेकिन इस सुंदर प्रेम कहानी में एक दुर्घटना हो जाती है और सब कुछ बदल जाता है.

फिल्म का अगला किरदार हैं अनिल धवन, बीते जमाने के अभिनेता जो अब रियल एस्टेट का काम करते हैं और अपने से काफी कम उम्र की तब्बू से उन्होंने शादी की हुई है जो खुद भी टीवी की एक स्ट्रगलिंग एक्ट्रेस है.

Andha dhun
आयुष्मान के साथ इस फिल्म में तबू भी हैं


तब्बू इस बेमेल शादी से निकलने के लिए एक जाल बुनती हैं और इस जाल में आयुष्मान और राधिका भी उलझ जाते हैं और इसके बाद शुरू होता है जुर्म से भरी दुनिया का अंधाधुंध खेल जिसमें हत्याएं हैं, बेरहमी है, मानव अंगो की तस्करी है और भी तरह-तरह के धोखे हैं.

इनके बीच से खुद को कौन बचा पाता है इसी का फैसला आखिरी तक फिल्म में होता है.

आयुष्मान खुराना ने एक गलत स्थिति में पड़े इंसान के रोल को ठीक से निभाया है, लेकिन फिल्म की असली जान हैं तब्बू और उनकी एक्टिंग. अपने ग्रे शेड के किरदार में वे बहुत ही घातक लगती हैं. सामने बैठे दर्शकों को भी उनसे डर लगने लगता है. बाकी राधिका आप्टे, जाकिर हुसैन और अश्विनी कालसेकर भी अपने-अपने किरदारों में फिट बैठते हैं.
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फिल्म में म्यूजिक अमित त्रिवेदी का है. जो फिर से नए तरह का टच लेकर आया है. फिल्म की शूटिंग पुणे में हुई है और सुंदर शहर को सुंदरता से दिखाने का श्रेय के.यू. मोहनन को जाता है. मोहनन आने वाली महाभारत में भी सिनेमैटोग्राफर होंगे.

फिल्म अच्छे से लिखी गई है. स्क्रिप्ट कहीं भी दर्शकों को उलझाती नहीं है. श्रीराम राघवन ने डायरेक्टर के तौर पर भी अच्छा किया है. कई बार लोगों के ब्लैंक चेहरे थोड़ा परेशान करते हैं. कई किरदारों को बिल्कुल किनारे लगाकर छोड़ दिया गया है जैसे अनिल की बेटी. फिर भी अंधाधुंध भरपूर मनोरंजक फिल्म है. और इसमें काबिल के ऋतिक रौशन जैसा कोई लार्जर दैन लाइफ कैरेक्टर नहीं है.

डिटेल्ड रेटिंग

कहानी :
3.5/5
स्क्रिनप्ल :
3.5/5
डायरेक्शन :
3.5/5
संगीत :
3/5
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